बिहार चुनाव 2025: बिहार! यानी नालंदा, वैशाली, सीतामढ़ी (मिथिला), गुरु गोबिंद सिंह जी की जन्मस्थली (पटना साहिब), विक्रमशिला विश्व विद्यालय, ओदंतपुरी विश्व विद्यालय, बोध गया, श्री महावीर जी की जन्मस्थली (कुण्डलपुर); चाणक्य, चन्द्रगुप्त मौर्य, आर्यभट्ट की जन्मभूमि। मोदी-नीतीश की NDA सरकार ने बिहार की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित किया है। इस पुनरोद्धार के कई पहलू हैं।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने छपरा में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा, “हमारी संस्कृति, हमारी आस्था, हमारी धरोहर, यही बिहार की आत्मा है।” मोदी ने कहा कि NDA का मंत्र है “विकास भी, विरासत भी।”
प्रधानमंत्री ने समझा कर कहा, “हम धरोहर को रोजगार से जोड़ रहे हैं। आप काशी विश्वनाथ धाम या अयोध्या धाम जाइये, वहां हुए विकास के बाद श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे रिक्शा वाले, टैक्सी वाले, नाव वाले, होटल वाले, खिलौने बेचने वाले, साड़ी बेचने वाले, कपड़े बेचने वाले, सब की कमाई बढ़ी है।”
धरोहर से रोजगार तक
धरोहर को रोज़गार से जोड़ने के एक और उदाहरण के तौर पर मोदी ने गंगा जी में चलने वाली एक क्रूज़ के बार में बताया। ये क्रूज़ बनारस से शुरू होकर बिहार से होते हुए बंगाल तक जाती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि नालंदा बिहार के समृद्ध इतिहास का प्रतीक है। कुमार गुप्त ने विश्वप्रसिद्ध नालंदा विद्यापीठ बनायी थी। उस विश्व विद्यालय को बख़्तियार खिलजी ने तोड़ा भी, और जलाया भी। नालंदा के पुस्तकालय से छह महीने तक जलती हुई किताबों से धुआं उठता रहा।
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नालंदा ने बिहार की विरासत को दिया गौरव
अमित शाह ने कहा कि मोदी जी ने नालंदा यूनिवर्सिटी को फिर से बना कर बिहार की विरासत को गौरव देने का काम किया है। छठ पूजा पर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए प्रधान मंत्री ने कहा कि छठ का पर्व अब एक राष्ट्रीय पर्व बन चुका है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जैसे-जैसे प्रभाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे छठ पूजा का भारत के हर कोने में महत्व बढ़ रहा है। बिहारी समाज के प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हुए पी.एम. ने कहा कि यही एक समाज है जो सूरज की हर रूप में पूजा करता है। उगते सूरज की पूजा तो सब करते हैं। ढलते सूरज की पूजा करना, और छठ पूजा का त्योहार मनाना, अपने आप में संस्कार का परिचय कराता है।
मुज़फ़्फ़रपुर में नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा ऐलान किया कि उन की सरकार की कोशिश है कि छठ महापर्व का नाम यूनेस्को की विश्व-विरासत की सूची में शामिल हो जाए। मोदी ने एक अनोखी स्पर्धा की घोषणा की, जिस के तहत छठ पूजा के गीतों को लिखने वाले और गाने वाले कलाकारों में से जनता चुनेगी कि ज़्यादा अच्छा काम किस ने किया। मोदी ने कहा कि अगले साल, छठ पूजा से पहले, जीतने वालों को सम्मानित किया जायेगा, और पुरस्कार दिया जायेगा।
NDA के प्रचार में शीर्ष नेतृत्व बार बार एक बात दोहरा रहा है कि उस के गठबंधन में जो पांच दल हैं, वो पांच पांडव हैं। NDA के प्रचार का अनकहा इशारा ये है कि गठबंधन एक धर्म युद्ध लड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीवान में कहा कि “ये लड़ाई केवल सत्ता प्राप्त करने की लड़ाई नहीं, बिहार की आस्मिता की लड़ाई है। बिहार की आन-बान और शान, बिहार की गौरवशाली परंपरा को पुनर्प्रतिष्ठा प्रदान करने की लड़ाई है।” सीएम योगी आगे कहते हैं, “बिहार ने केवल बिहार को ही नहीं, भारत को स्वर्ण युग की और ले जाने का काम कराया था।” वह कहते हैं कि भारत विकसित होगा तब, जब बिहार विकसित होगा।
वहीं अमित शाह ने कहा श्री राम जन्मभूमि मंदिर बनने के बाद माता सीता का मंदिर बनना स्वाभाविक ही था। अमित शाह और नीतीश कुमार माता सीता के मंदिर के भूमि पूजन में शामिल हुए थे। अब सीतामढ़ी में 850 करोड़ रुपये की लागत से माता सीता का मंदिर बनाया जा रहा है। नरेंद्र मोदी उसकी प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। बिहार को बुद्ध सर्किट में तो लिया गया है। NDA का वादा है कि बिहार को रामायण सर्किट में लेने का काम भी किया जाएगा। NDA की डबल इंजन सरकार ने अयोध्या से सीतामढ़ी को जोड़ने के लिए 6,155 करोड़ रूपए की लागत से सड़क के निर्माण के कार्य को भी आगे बढ़ा दिया है।
कांग्रेस-आरजेडी ने किया था राम मंदिर का विरोध
योगी आदित्यनाथ ने स्मरण किया कि “कांग्रेस और आर.जे.डी. राम मंदिर का विरोध करते हैं।” उन्होंने याद दिलाया कि 1990 में तत्कालीन जनता दल के बिहार के मुख्य मंत्री लालू यादव ने राम रथ यात्रा को रोका था, और तत्कालीन जनता दल के उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव ने राम भक्तों पर गोली चलवाई थी। NDA के शासन काल में बिहार में संस्कृति और स्वाभिमान के विषयों पर वातावरण लालू यादव के शासन काल के विपरीत हो गया है। अब बिहार में भरपूर विकास हो रहा है, और प्रदेश अपनी खोयी हुई पहचान को दोबारा जीवित होते हुए देख रहा है। यानी ये सांस्कृतिक आत्मसम्मान के साथ-साथ आर्थिक पुनरुत्थान भी है।

















