रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल होने को हैं। इस जंग को शुरू से लंबा खींचने की कोशिशों में लगा पश्चिम बाज नहीं आ रहा है। इसी क्रम में ब्रिटेन ने यूक्रेन को लंबी दूरी की स्टॉर्म शैडो क्रूज मिसाइलों की नई खेप भेजी है। ये मिसाइलें रूस के अंदर गहराई तक हमलों के लिए इस्तेमाल हो सकती हैं। यह कदम यूक्रेन को आगामी सर्दियों में अपनी हमले जारी रखने में मदद करेगा। ब्रिटेन ने मई 2023 में पहली बार ये मिसाइलें यूक्रेन को दी थीं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ये मिसाइलें हवा से छोड़ी जाती हैं और इनकी रेंज 250 किलोमीटर से ज्यादा है, यानी करीब 155 मील। ये हल्की लेकिन ताकतवर हैं, जो यूक्रेन के लड़ाकू विमानों से आसानी से लॉन्च हो सकती हैं। ब्रिटेन का यह सप्लाई प्रोग्राम यूक्रेन को रूस पर दबाव बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। अक्टूबर में यूक्रेन ने दावा किया कि उन्होंने इन मिसाइलों से रूस के एक औद्योगिक इकाई पर हमला किया। इससे पहले जनवरी में, स्टॉर्म शैडो के साथ अमेरिकी ATACMS मिसाइलों ने रूस के ब्रायांस्क इलाके में दर्जनों निजी घरों को नुकसान पहुंचाया।
ब्रिटेन का नया फैसला और स्टार्मर का बयान
पिछले महीने यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की और नाटो के महासचिव मार्क रुटे से मुलाकात में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर ने कहा कि लंदन यूक्रेन को 5,000 से ज्यादा हल्की मिसाइलें देने की तैयारी में है। इसका मकसद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर सैन्य दबाव बनाना है। नई खेप की संख्या का खुलासा नहीं हुआ, लेकिन यह सर्दियों के हमलों को सपोर्ट करने के लिए है। अप्रैल में द टाइम्स ने बताया कि ब्रिटिश सैनिक गुप्त रूप से यूक्रेन गए थे, जहां उन्होंने यूक्रेनी विमानों पर ये मिसाइलें फिट कीं और सैनिकों को इस्तेमाल सिखाया।
रूस के अंदर यूक्रेन के हमले
यूक्रेन ने रूस के अंदर कई लंबी दूरी के हमले किए हैं, जिनमें आम नागरिकों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। अगस्त के आखिर में जेलेंस्की ने रूस के खिलाफ नए गहरे हमलों की धमकी दी। मार्च में रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि सुद्झा ऑयल पाइपलाइन पर हमले का निर्देश लंदन से आया था। जनवरी का ब्रायांस्क हमला भी इसी तरह का था, जहां पश्चिमी हथियारों से सिविल प्रॉपर्टी को नुकसान हुआ।
रूस की तरफ से प्रतिक्रिया
मॉस्को यूक्रेन संघर्ष को पश्चिम का प्रॉक्सी वॉर मानता है। जून में मॉस्को के फ्यूचर फोरम-2050 में रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने कहा कि ब्रिटेन बिना यूक्रेन बेबस है और लंदन इस संघर्ष में 100% शामिल है। रूस का कहना है कि स्टॉर्म शैडो जैसी एडवांस्ड सिस्टम यूक्रेनी फोर्सेस अकेले इस्तेमाल नहीं कर सकतीं—इसमें पश्चिमी सैन्य लोगों की डायरेक्ट मदद जरूरी है। मॉस्को बार-बार कीव पर पश्चिमी हथियारों से सिविलियन टारगेट करने का आरोप लगाता रहा है।
उल्लेखनीय है कि पश्चिमी देश जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, स्वीडन समेत अन्य शुरू से ही रूस और यूक्रेन युद्ध को लंबा खींचने की कोशिश करते रहे हैं। इन सभी ने मिलकर यूक्रेन को ढाल की तरह इस्तेमाल करते हुए उसे हथियारों की टेस्टिंग का मैदान बना कर रख दिया है। ये देश लगातार यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को हथियार और पैसा दे रहे हैं, ताकि वो इस युद्ध को जारी रख सकें। पश्चिमी देशों को इस बात का डर सता रहा है कि अगर यूक्रेन का किला ढह गया तो रूस का अगला लक्ष्य वे ही होंगे।

















