बिहार चुनाव 2025: PM मोदी-नीतीश की कृषि क्रांति से उद्यमी बनने की ओर किसान
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बिहार चुनाव 2025: PM मोदी-नीतीश की कृषि क्रांति से उद्यमी बनने की ओर किसान

बिहार चुनाव 2025 में NDA की कृषि नीतियों ने किसानों को बाढ़-सूखे से मुक्ति दी। मखाना निर्यात, विविध फसलें और PM किसान योजना से 28,000 करोड़ का लाभ। उद्यमिता की नई ऊंचाइयां।

Written byमनोज रघुवंशीमनोज रघुवंशी — edited by कुलदीप सिंह
Nov 3, 2025, 08:44 am IST
in विश्लेषण, बिहार
Bihar election 2025

प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार चुनाव 2025: एक समय था जब बिहार का किसान या तो बाढ़ से परेशान रहता था, या सूखे से त्रस्त। एक समस्या ये थी कि बिहार के किसान केवल परम्परागत फसलों को ही अपनी सीमा मानते थे। दूसरी समस्या ये थी कि गावों की बाजार से दूरी होने के कारण किसानों की आमदनी कम होती थी। प्रदेश में ग्रामीणों के निर्धन होने के ये प्रमुख कारण थे। मोदी-नीतीश सरकार ने कृषि के सम्पूर्ण विकास के लिए एक रोडमैप बनाया जिसके द्वारा बिहार के किसानों की तीन विषयों में सहायता की। पहला: किसानों को विविध फसलें उगाने का प्रोत्साहन दिया। दूसरा: सिंचाई के साधनों में बहुत बड़ा विकास किया। तीसरा: मृदा स्वास्थ्य के विषय में किसानों की हर तरह से मदद की।

मखाना उत्पाद में आई तेजी

मखाना बोर्ड की स्थापना के बाद मखाना उत्पाद और मखाना के निर्यात की बहुत बड़ी पहल हुई है। पारम्परिक फसलों से आगे बढ़ कर फल और सब्ज़ी उगाने पर किसान ने अपना उद्यम दिखाया है। इस तरह से बिहार में एग्रीबिज़नेस पनप रहा है। सरकार द्वारा किसान को खेती के अलग-अलग आयामों में हर तरह से प्रशिक्षित किया जाता है। किसानों को सहकारिता की दिशा में प्रेरित कर के सरकार ने कृषकों की ताकत बड़ी मात्रा में बढ़ाई है।

उद्यमी बनने की ओर बिहार का किसान

NDA सरकार के तहत बिहार का किसान अब केवल उत्पादक ही नहीं, बल्कि उद्यमी भी बन रहा है। बिहार की भूमि पर अब नए-नए उद्योग शुरू हुए हैं, और पनप रहे हैं। उद्यमी के रूप में बिहार का किसान अब बहुत आगे बढ़ गया है। बिहार में एक ऐतिहासित बदलाव ये आया है कि पिछले साल उद्योग कृषि से आगे निकल गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में देखा गया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का हिस्सा 22.4 प्रतिशत था, और उद्योग का प्रतिशत 23.2 था। बिहार में ये प्रथम बार हुआ था कि उद्योग का योगदान कृषि से अधिक हुआ हो।

प्रधानमंत्री बोले-बिहार को आगे बढ़ने के लिए चाहिए ‘उद्यम’

जन भावना को जानने और उजागर करने, की दृष्टि से मुजफ्फरपुर में एक जन सभा को सम्बोधित करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “बिहार को आगे बढ़ाने के लिए उद्यम चाहिए। उद्योग चाहिए। और उद्योग के लिए ज़मीन, बिजली, कनैक्टिविटी, और कानून का राज चाहिए। अब सोचिये, जिन का इतिहास ज़मीन कब्ज़ाने का हो, वो क्या किसी उद्योग को ज़मीन देंगे?” जनता ने ज़ोर से बोला “नहीं”।

इसे भी पढ़ें: बिहार चुनाव 2025: PM मोदी ने RJD के ‘जंगलराज’ पर साधा निशाना, विकसित बिहार का संकल्प

पीएम मोदी ने एक और प्रश्न पूछा, “जिन्होंने बिहार को लालटेन युग में रखा, वो बिजली दे पाएंगे क्या?” पब्लिक की आवाज़ गूंजी “नहीं”।

इस पर पीएम ने एक और सवाल किया कि “जिन्होंने रेल को लूटा, वो बिहार में कनैक्टिविटी बढ़ाएंगे क्या?” हुजूम ने पलट कर बोला “नहीं”।

प्रधानमंत्री मोदी ने अगली जिज्ञासा प्रकट की कि “जिन्होंने भ्रष्टाचार और घोटाले के रिकॉर्ड तोड़ दिए, वो कानून का राज ला सकते हैं क्या?”

ज़ोर से जवाब मिला “नहीं”।

शाह ने भी समझाया कृषि से उद्यम तक का रोडमैप

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में कृषि से उद्यम तक का नक़्शा समझाया। “मोदी जी ने पहले इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारा। अब बिजली के कारखाने लग रहे हैं। और अब उद्योग भी बन रहे हैं। और अच्छे ऐज्युकेश्नल इंस्टीट्यूशंस भी यहाँ आ रहे हैं।” अमित शाह ने कहा कि व्यापार फिर से बिहार में आया है। बरौनी का कारखाना बन चुका है। ढेर सारे इथनॉल के प्लांट लगे हैं, और पेट्रोलियम रिफाईनरी भी आ रही है।

प्रधान मंत्री मोदी ने समस्तीपुर में एक रैली में कहा कि NDA सरकार ने छोटे किसानों को प्राथमिकता दी है। पहले बैंकों के दरवाज़े छोटे किसानों के लिए बंद होते थे। पी.एम. किसान सम्मान निधि ने बैंकों से छोटे किसानों के खातों में सीधे पैसे स्थानांतरित करवाए। बिहार में 28,000 करोड़ रूपए कृषकों को मिले।

बिहार में बन रहे रेल इंजन

एक रैली में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बोला कि “आज बिहार में रेल के इंजिन बन रहे हैं। डेरी के बड़े-बड़े प्लांट लग रहे हैं। मखाना अब दुनिया भर में जा रहा है। फ़ूड प्रोसैसिंग हो, टेक्सटाइल क्लस्टर्ज़ हों, लेज़र पार्क हो, आई.टी. पार्क हो, ये सब हमारे बिहार की पहचान बन रहे हैं। कभी बिहार अपनी ज़रूरत के लिए मछली बाहर से मांगता था। आज बिहार अपनी ज़रुरत तो पूरी करता है, लेकिन बिहार के मेरे भाई बहन, मछली दूसरे राज्यों को भी भेज रहे हैं। कमाई कर रहे हैं। ये आत्मनिर्भरता का बड़ा उदाहरण बना है।” इस प्रक्रिया की शुरुवात हुई थी सन् 2013 में, जब नरेंद्र मोदी ने बिहार में देखा कि इतना पानी है की पग-पग पर पोखर है। उन्होंने पूछा कि जब आप के पास इतना पानी है तो आप दूसरे प्रदेशों से मछली क्यों मंगवाते हैं? सन् 2014 में जब नरेंद्र मोदी की केंद्रीय सरकार बनी तब उन्होंने पी.एम. मत्स्य सम्पदा योजना के तहत मछली पालकों को भी किसान कार्ड दिया। 10 साल में बिहार में मछली उत्पादन करीब दो गुना हो गया।

जीएसटी बचत उत्सव का असर

जी.एस.टी. बचत उत्सव का असर बताते हुए प्रधानमंत्री ने स्टेज से ये आंकड़ा दिया कि “पिछले साल… इसी सितम्बर-अक्टूबर के महीने में, बिहार में 50,000 मोटरसाइकिल की बिक्री हुई थी। इस साल जी.एस.टी. बचत उत्सव में, इस वर्ष के सितम्बर-अक्टूबर के महीने में, बिहार में करीब डेढ़ लाख मोटरसाइकिल बिकी हैं।” पीएम मोदी ने जनता को याद दिलाया कि जंगल राज में गाड़ियों के शोरूम लुट जाते थे।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कही बड़ी बात

उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता के मंच से ये ऐलान किया कि “बिहार जब विकसित होगा, भारत को विकसित होने से कोई ताकत दुनिया की नहीं रोक सकती है।” योगी आदित्यनाथ ने बिहार-पुत्र चाणक्य और चन्द्रगुप्त मौर्य के समय की खूबी बतायी कि “कहते हैं दुनिया की अर्थव्यवस्था में उस समय भारत का योगदान 40 फीसदी हुआ करता था।”

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मनोज रघुवंशी
मनोज रघुवंशी
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