जरा सोचिए कि कोई पुरस्कार महिलाओं के लिए हों और उन्हें दे दिया जाए, जैविक पुरुषों को। उन्हें जो शरीर से पुरुष हैं, मगर खुद को महिला मानते हैं, तो कैसा लगेगा और यह क्या संदेश देगा? क्या यह पश्चिम की या कहें ईसाई महिलाओं के अधिकारों और स्पेस पर अतिक्रमण नहीं है? वोक आइडियोलॉजी आखिर महिलाओं की इतनी बड़ी दुश्मन क्यों है कि वह महिलाओं का स्पेस ही समाप्त कर देना चाहती है?
क्या है मामला?
मामला है यूके की महिला पत्रिका “ग्लैमर” का। ग्लैमर ने 29 अक्टूबर 2025 को वर्ष 2025 के लिए “वुमन ऑफ द ईयर” के अवार्ड घोषित किये। जिनमें गायिका टाइला, अभिनेत्री डेमऊ मूर के साथ ही 9 “ट्रांस वुमन” का समूह “द डॉल्स” शामिल है। ग्लैमर ने यह अवार्ड्स इन लोगों को फैशन, मीडिया और ऐडवोकेसी के क्षेत्र में उनके काम के लिए दिए हैं।
इन अवार्ड्स का हो रहा है विरोध
इन अवार्ड्स की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर उनका विरोध होने लगा है। यह विरोध इस बात को लेकर हो रहा है कि क्या महिलाओं के लिए बने अवार्ड्स उन्हें दिए जा सकते हैं, जो देह से पुरुष हैं। इस मामले की सबसे बड़ी और मुखर आलोचक जे के रोलिंग ने एक्स पर लिखा, “मैं उस समय में बड़ी हुई, जब मुख्यधारा की महिलाओं की पत्रिका लड़कियों को यह बताती थी, कि उन्हें पतला और सुंदर होना चाहिए। अब मुख्यधारा की मीडिया लड़कियों से यह कह रही है कि आदमी, महिलाओं से बेहतर होते हैं।“
I grew up in an era when mainstream women’s magazines told girls they needed to be thinner and prettier.
Now mainstream women’s magazines tell girls that men are better women than they are. pic.twitter.com/ybEFr8XdSv
— J.K. Rowling (@jk_rowling) October 30, 2025
पुरुष जननांग वाले लोग महिला कैसे?
जब भी ट्रांस वुमन को महिला कहा जाता है, तो एक प्रश्न रह-रहकर उभरता है और जो बहुत स्वाभाविक भी है कि आखिर कैसे वे लोग महिला होने का दावा कर सकते हैं, जिनका जननांग पुरुषों का है? कैसे वे लोग महिला होने का दावा कर सकते हैं, जिनमें एक्सवाई क्रोमोसोम्स होते हैं। टॉमी रॉबिन्सन ने यही प्रश्न करते हुए एक्स पर लिखा, “महिलाओं के पुरुष जननांग नहीं होते और न ही एक्सवाई क्रोमोसोम होते हैं। तो नौ ऐसे लोगों को महिला के रूप में ग्लैमर मैगजीन ने “वुमन ऑफ द ईयर” का अवार्ड दिया है।”
“पत्रिका के समर्थकों ने इस कदम का बचाव करते हुए इसे महिला होने की परिभाषा का “विस्तार” करने और ट्रांसजेंडर आवाजों को सुर्खियों में लाने का प्रयास बताया, और वे ऐसे कदमों को ट्रांस अधिकारों के लिए उठाई गई आवाज कहते हैं!”
ट्रांस वुमन के कारण असली महिलाओं के साथ बढ़ी हिंसा
पाञ्चजन्य में हमने पहले यूएनओ की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा था कि कैसे ट्रांस वुमन के कारण खेलकूद प्रतिस्पर्धाओं में महिला खिलाड़ियों के साथ हिंसा बढ़ गई है और हमने यह भी लिखा कि कैसे ऐसी घटनाओं से महिलाओं के लिए अवसरों पर प्रभाव पड़ रहा है। जो क्षेत्र केवल महिलाओं के लिए हैं, उनमें ऐसे पुरुष महिला रूप रखकर या कथित रूप से यह दावा करते हुए आ रहे हैं, कि वे जैविक रूप से पुरुष भले ही हैं, मगर मन से महिला हैं।
यह एक बहुत ही जटिल विषय है, परंतु इसे जिस प्रकार से उठाया जा रहा है, उसे देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई न कोई तो ताकत है, जो इस मुद्दे को बनाए रखना चाहती हैं। यह महिला विरोधी सोच है और जो ताकत है, वह महिला विरोधी ताकत है, जो महिलाओं को उनके ही स्पेस से हटा देना चाहती है।
हालांकि अब महिलाओं की खेलकूद प्रतिस्पर्धाओं में महिलाओं का सामना इनसे नहीं हो रहा है, क्योंकि भारी विरोध एवं महिलाओं के प्रति हिंसा की बढ़ती घटनाओं के चलते कई खेल एसोसिएशन्स ने ट्रांस वुमन को महिलाओं की खेल कूद प्रतिस्पर्धाओं से बाहर कर दिया है।
परंतु जिस प्रकार से महिलाओं का चेहरा ऐसे आदमियों को बनाया जा रहा है, जो महिला हैं ही नहीं, तो यह स्पष्ट रूप से उभर कर आता है कि यह महिलाओं के प्रति घृणा के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। यह इस सीमा तक घृणा है, कि जो महिलाओं को यह तक साबित करने में लगी हुई है, वे दरअसल कुछ भी नहीं कर सकती हैं और उनसे बेहतर तो उनके वस्त्र आदि पहने हुए पुरुष ही हैं।
इन पुरुषों ने महिलाओं के पूरे स्पेस पर कब्जा करने का प्रयास किया है। और इसे समझना होगा कि महिला होना, केवल महिला जैसे वस्त्र पहनना ही नहीं होता है, जिसे देखकर लोग डर जाएं, बल्कि यह एक पवित्र भाव है, यह तमाम गुणों से भरा हुआ शब्द है। महिला होना अर्थात मातृत्व भाव का होना, स्नेहिल होना न कि एक कार्टून के रूप में खुद को बदलकर महिलाओं की एक कार्टून की छवि बनाना।
ग्लैमर पत्रिका के इंस्टाग्राम पेज पर लोग कर रहे आलोचना
ग्लैमर पत्रिका ने जब अपने इस अंक का पोस्टर जारी किया तो जहां वोक विचार के लोग इसका समर्थन करते हुए दिखाई दिए तो वहीं इस निर्णय की आलोचना करने वाले भी कम नहीं थे। हालांकि एक्स पर कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पत्रिका ने विपरीत टिप्पणियों को डिलीट कर दिया था।
लोगों ने इसे महिला विरोधी कदम, महिलाओं के प्रति घृणा बताया। एक यूजर ने लिखा कि “सबसे कमजोर आदमी महिलाओं के साथ मुकाबला करते हैं और सबसे कमजोर दिमाग वाले लोग इसका जश्न मनाते हैं!”
मगर मूल प्रश्न यही है कि आखिर ट्रांस महिला अर्थात शरीर से पुरुष और मन से महिला लोगों की मांग अपने लिए नई श्रेणी की क्यों नहीं होती है, क्यों उन्हें महिलाओं का ही स्पेस चाहिए?”
ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या यह कहीं महिलाओं को सार्वजनिक स्पेस से गायब करने की कवायद तो नहीं है?












