बिहार चुनाव-2025: लालू यादव के शासनकाल में बिहार की शिक्षा व्यवस्था एक भोंडा मज़ाक बन के रह गई थी। खुल्लम-खुल्ला नकल होती थी। छात्र और शिक्षक दोनों की ग़ैरहाज़िरी आम बात थी। बात-बात में राजनेताओं के हस्तक्षेप से शिक्षा संस्थानों का मेरुदंड टूट गया था। युवाओं के मनोबल को गहरी चोट पहुंची थी। आम लोगों का शिक्षा संस्थानों पर से विश्वास उठ गया था।
मोदी-नीतीश की NDA सरकार के दौर में बिहार की शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में बिहार ने शिक्षा के लिए सब से बड़ा बजट देखा है, 60,964 करोड़ रूपए से ज़्यादा का। सन् 2005 के मुकाबले बिहार में स्कूली शिक्षा पर लागत 10 गुना बढ़ा दी गयी है। आंकड़ों के मुताबिक मोदी-नीतीश युग में बिहार में 10 से अधिक मेडिकल कॉलेज और 38 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज खुल चुके हैं।
इस साल बिहार में बढ़े 5,65,000 से अधिक शिक्षक
बिहार सरकार ने इस साल तक शिक्षकों की संख्या बढ़ा कर 5,65,000 से भी ज़्यादा कर दी है। सरकार ने अपने कार्यक्रम में विद्यालय भवनों का निर्माण और तकनीकी शिक्षा के विस्तार का डबल सुधार शुरू किया है। डिजिटल लर्निंग और स्किल ट्रेनिंग ने शिक्षा को रोज़गार से जोड़ा है।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार ने गाँव-गाँव में इंटरनेट पहुंचाया है, और बेहद सस्ता कर दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े-बड़े देशों में आज भी एक जी.बी. डेटा 100 से 150 रूपए तक का मिलता है, जब कि यहां सरकार ने ये पक्का किया है कि एक जी.बी. डेटा एक कप चाय के दाम से कम में मिल जाए। नौजवानों ने इस का भरपूर फ़ायदा उठाया है।
प्रधान मंत्री ने समझाया कि आज के युवा जो रील पर रील बना रहे हैं वो रचनात्मकता NDA की नीतियों से प्रभावित है। पीएम मोदी ने बताया कि बहुत से युवा इंटरनेट से कमाई भी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर दिया बल
जनसंबोधन में नरेंद्र मोदी ने कहा कि NDA सरकार ने स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर बल दिया है जिससे गरीब वंचित परिवार का बच्चा भी अपनी भाषा में पढ़ाई कर के अपनी ही भाषा में परीक्षा भी दे सके। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों में शिक्षा और स्वास्थ्य प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। लड़कियों की पढ़ाई सब से बड़ी प्राथमिकता है। 2014 से 2024 के दशक में उच्चतर माध्यात्मिक स्कूलों में लड़कियों के दाखिले की दर 36 प्रतिशत से बढ़ कर 50 प्रतिशत हो गयी।
केंद्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह ने जनसंबोधन में बताया कि पटना के अंदर बड़े-बड़े शिक्षा संस्थान आये हैं। 2006 में चाणक्य राष्ट्रीय विधि विद्यालय आया, 2008 में राष्ट्रीय फ़ैशन प्रौद्योगिकी संस्थान आया, ’10 में आर्यभट्ट ज्ञान विद्यालय आया, ’16 में पशु विज्ञान विद्यालय आया, एमिटी आया ’17 में, और ’18 में पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी बनाने का काम मोदी-नीतीश ने किया है।
बिहार की नालंदा विद्यापीठ, जिसमें दुनिया भर से लोग पढ़ने के लिए आते थे, उसके बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने याद दिलाया कि “बख्तियार खिलजी ने ये विद्यापीठ को तोड़ने का काम किया। मगर नरेंद्र मोदी जी ने बारहवीं सदी में टूटी हुई नालंदा विद्यापीठ को फिर से बना कर नालंदा के गौरव को जीवित करने का काम किया। और मैं आज यहाँ डंके की चोट पर कहता हूँ की अब सौ बख्तियार खिलजी आएंगे तो भी हमारी नालंदा विद्यापीठ को कोई तोड़ नहीं पायेगा।”
आज बिहार में शिक्षा केवल डिग्री पाने का रास्ता नहीं है बल्कि आत्मबल हासिल करने की बुनियाद बन गयी है। पहले बिहार का युवा अवसर ढूंढ़ता था। आज का बिहार का युवा अवसर रचता है। यही नयी पीड़ी के आत्मविश्वास का राज़ है।

















