ट्रंप प्रशासन में खुफिया विभाग की निदेशक तुलसी गबार्ड ने खुलकर अमेरिका की पुरानी विदेश नीति पर बात की है। उन्होंने उस कड़वी सच्चाई को स्वीकार कर लिया है कि अमेरिका दूसरे देशों में हस्तक्षेप करता रहा है और वहां सत्ता बदलवाता रहा है। हालांकि, वो ये भी मानती हैं कि लेकिन ये नीति उल्टी असर डालती रही—वैश्विक सुरक्षा बढ़ाने की बजाय दुश्मनों की तादाद बढ़ा रही है। गबार्ड ने आईएसआईएस और अलकायदा जैसे संगठनों को इसी नीति का नतीजा बताया। अब चूंकि तुलसी ट्रंप प्रशासन का हिस्सा है, इसलिए वो उनका बचाव करते हुए कहती हैं कि ये अच्छी बात ये कि ट्रंप प्रशासन ने अब इस रास्ते को छोड़ दिया है।
लोकतंत्र और स्थिरता पर फोकस
गबार्ड ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका की नीति लोकतंत्र को मजबूत करने, वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और इलाकाई शांति पर केंद्रित है। ये बदलाव हाल के घटनाक्रमों में दिखा। मिसाल के तौर पर, गाजा में सीजफायर हुआ, जहां युद्ध थमा। साथ ही, ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हमलों से इजरायल-ईरान का टकराव खत्म हो गया। गबार्ड ने इसे ट्रंप के नेतृत्व का कमाल बताया। ये कदम न सिर्फ तनाव कम करते हैं, बल्कि लंबे वक्त के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
गाजा और मिडिल ईस्ट की चुनौती अभी भी
गबार्ड इस बात को मानती हैं कि गाजा में हालात अभी नाजुक हैं। सीजफायर तो हो गया, लेकिन शांति पक्की नहीं। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में चीन अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हलचल दिख रही है। ये नई मुश्किलों की ओर इशारा करता है। गबार्ड बोलीं, “रास्ता आसान नहीं, लेकिन ट्रंप इस पर पूरी तरह से कमिटेड हैं।” ये सब बताता है कि इलाके में सतर्कता बरतनी पड़ेगी।
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सत्ता बदलने से अमेरिका के दुश्मन बढ़े
इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक स्टडीज इंस्टीट्यूट के मनामा डायलॉग में गबार्ड ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “कई दशकों से हमारी विदेश नीति दूसरे देशों के शासन को बदलने और राष्ट्र निर्माण के बेकार चक्र में फंसी रही। ये किसी की सरकार उखाड़ फेंकना और अपनी सिस्टम थोपना था, जो हम पर ही भारी पड़ा। इससे सहयोगियों से ज्यादा दुश्मन बढ़े।” नीति के नतीजे विनाशकारी रहे—लाखों जिंदगियां गईं, और खतरे और बड़े हो गए। गबार्ड ने इसे अमेरिका के लिए सबक बताया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, तुलसी गबार्ड खुद हमेशा से दूसरे देशों के युद्धों में उलझने के खिलाफ रहीं। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव कैंपेन में भी उन्होंने ये मुद्दा उठाया था। ट्रंप भी डीप स्टेट से नाराज रहते हैं। आईएसआईएस और अलकायदा को इसी हस्तक्षेप का फल बताया गया। वाशिंगटन की ये कोशिशें अक्सर उल्टी पड़ती रहीं, जिससे दुश्मनों की फेहरिस्त लंबी होती गई। ट्रंप के आने से अब फोकस बदल गया—लोकतंत्र, आर्थिक ग्रोथ और स्थिरता पर। गाजा सीजफायर और ईरान हमले जैसे कदम इसी की मिसाल हैं।
















