बिहार चुनाव-2025: भयाक्रांत था बिहार जब जंगल राज के दौरान अपहरण उद्योग ने वास्तविक उद्योग को बड़े पैमाने पर प्रदेश के बाहर खदेड़ दिया था। अर्थव्यवस्था पर अपराध का बोलबाला था। व्यापारी इतनी दहशत में थे कि शाम होने के बाद यात्रा करना तो दूर, वो घर से बाहर निकलने में सहमते थे। बिहार नाम सुनते ही पूँजीनिवेशक पैसा लगाने से इंकार कर देते थे। आर्थिक गतिविधियों पर लगातार भय के काले बादल छाए रहते थे। पिछले 20 सालों में उस रोग से मुक्ति मिली है।
NDA सरकार के कारण माहौल में आया सुधार
मोदी-नीतीश की NDA सरकार के चलते तीन बुनियादी बदलाव आये हैं, जिनसे माहौल पलटा है। नयी औद्योगिक नीति से उद्योग में जान आयी है। कानून की सख़्ती से उद्यमियों को सांस आयी है। अच्छी बिजली सप्लाई से उद्यम की धमनियों में रक्तप्रवाह हो रहा है। उद्योगपतियों ने एक बार फिर से पलट कर बिहार में पूंजीनिवेश करना शुरू कर दिया है। MSME और स्टार्टअप को ताकत मिली है सरकार की नीतियों से। यही कारण है कि आज बिहार खुद को एक नयी उम्मीद की नज़र से देख रहा है। नवाचार और तकनीक के केंद्र जगह-जगह उभर रहे हैं।
जंगल राज से उद्यम और नवोन्मेष का सफर
कहाँ बिहार की पहचान जंगल राज से होती थी। आज उस ही प्रदेश की पहचान बन रहे हैं उद्यम और नवोन्मेष। भय से विश्वास की ये यात्रा आसान नहीं थी। मोदी-नीतीश की इच्छा शक्ति के कारण बिहार पुराने सांचे को तोड़ कर दोबारा फल-फूल रहा है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक़, निवेषिक या बिहार आ रहे हैं, या बिहार आना चाहते हैं। यहाँ फ़ैक्टरियां लगाना चाहते हैं। नयी-नयी कम्पनियाँ खोलना चाहते हैं। वो दिन दूर नहीं जब बिहार के ज़िले-ज़िले में हमारे युवाओं की स्टार्टअप कम्पनियां होंगी।
उद्योगों को वापस बिहार लाने की कोशिश कर रही सरकार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बोला कि जो उद्योग बरौनी, मोकामा, डालमियानगर, टाटा चले गए थे, उन्हें भी वापस लाने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। बिहार को पिछड़ा प्रदेश बनाने का काम लालू यादव ने किया था। उसे विकसित प्रदेश बनाना मोदी-नीतीश की NDA सरकार की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है। लोग NDA को ये ज़िम्मेदारी निभाते हुए देख भी रहे हैं और परख भी रहे हैं।
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मसलन बेगूसराय का फ़र्टिलाइज़र प्लांट जंगल राज के दौरान बंद हो गया था। वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री बने तब उन्होंने महसूस किया कि इस प्लांट को पुनर्जीवित करने के लिए गैस की ज़रूरत होगी। पी.एम. ऊर्जा गंगा योजना के तहत, करोड़ों रूपए खर्च कर के, पश्चिम बंगाल से गैस पाइपलाइन बिछाई गयी। बिहार के युवकों को रोज़गार मिला, और किसानों को खाद। महिलाओं को रसोई के लिए पाइप के माध्यम से सस्ते दर पर गैस मिली।
बरौनी रिफ़ाइनरी को भी अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। NDA सरकार ने उस में नयी जान डाली। हज़ारों करोड़ के निवेश से अब वहां पेट्रो-केमिकल प्लांट बन रहा है। नरेंद्र मोदी ने समझाया कि इस से वहां प्लास्टिक उद्योगों को बल मिलेगा। छोटे और लघु उद्योग लगेंगे। युवाओं के लिए हज़ारों नए रोज़गार बनेंगे। बरौनी डेरी के विस्तार से पशुपालकों और किसानों की कमाई बढ़ रही है।
बेगुसराय में भी बढ़ा रोजगार
बेगूसराय में एक के बाद एक मल्टीब्रैंड शोरूम खुलते जा रहे हैं। बड़ी-बड़ी गाड़ियों के शोरूम भी खुल रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने ये भी बताया कि पिछले कुछ सालों में बिहार में पचास लाख नए रोज़गार मिले हैं। आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते बिहार में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 18 साल से 50 साल की उम्र के लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए दस लाख रूपए तक की सरकारी सहायता दी जाती है। घर बैठे ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। सौ से ज़्यादा श्रेणी के उद्योगों में से उद्यमी अपने मन पसंद का उद्योग चुन सकते हैं। केवल इंटरमीडियेट या आई.टी.आई, या उस के बराबर का प्रमाणपत्र होना चाहिए।
बहुत से उद्यमी इस योजना का लाभ उठा कर न केवल खुद रोज़गार प्राप्त कर चुके हैं, बल्कि बहुत से दूसरे लोगों को अपने उद्यम के माध्यम से रोज़गार दे रहे हैं।

















