अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच भारत और रूस के बीच ऊर्जा के कारोबार में नई जान फूंकने की बात चल रही है। रूस का कहना है कि वो भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और कोल की सप्लाई को और तेज कर सकता है। रूसी एनर्जी मिनिस्टर सर्जेई त्सिविलेव ने साफ कहा है कि भारत अगर अपनी एनर्जी मिक्स में गैस का हिस्सा 15 फीसदी तक ले जाना चाहता है, तो रूस इसके लिए तैयार है। अभी रूस भारत को हर साल करीब 3 मिलियन टन LNG भेजता है, और ये आंकड़ा और ऊपर चढ़ सकता है। कोल की बात करें तो रूस 2035 तक भारत को 40 मिलियन टन तक एक्सपोर्ट करने का प्लान बना रहा है।
ये सब तब हो रहा है जब अमेरिका ने रूस के तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर सैंक्शंस लगाए हैं, लेकिन भारत-रूस का तेल कारोबार फिर भी मजबूत बना हुआ है। भारत रूस के फ्यूल और एनर्जी सेक्टर का एक बड़ा पार्टनर बना हुआ है।
LNG सप्लाई में नया मोड़
रूस भारत को LNG के मौजूदा प्रोजेक्ट्स से ही सप्लाई बढ़ाने को तैयार है, ऊपर से आने वाले प्रोजेक्ट्स भी जोड़े जा सकते हैं। त्सिविलेव ने कहा, “भारत के गैस मिक्स को 15 फीसदी तक ले जाने के प्लान को देखते हुए, हम मौजूदा और आने वाले रूसी प्रोजेक्ट्स से LNG ऑफर करने को तैयार हैं।” जुलाई में रूस के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर अलेक्जेंडर नोवाक ने भी कहा था कि दोनों देश गैस सेक्टर में कोऑपरेशन को गहरा करने की तलाश में हैं, जिसमें गैस सप्लाई बढ़ाना शामिल है। अभी रूस भारत को सालाना 3 मिलियन टन LNG देता है, जो पहले से ही अच्छा अमाउंट है, लेकिन इसमें और इजाफा हो सकता है। ये कदम भारत की एनर्जी जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगा, क्योंकि भारत तेजी से गैस पर निर्भरता बढ़ा रहा है। रूस के लिए ये एक बड़ा बाजार है, जहां वो अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी का फायदा उठा सकता है।
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कोल एक्सपोर्ट का बड़ा लक्ष्य
कोल की डिमांड में भी रूस भारत को प्राथमिकता दे रहा है। त्सिविलेव ने बताया कि भारत रूसी कोल का एक बड़ा खरीदार है। उन्होंने कहा, “हम कोल एक्सपोर्ट को 2035 तक 40 मिलियन टन तक ले जाना चाहते हैं।” ये प्लान रूस के डिप्टी एनर्जी मिनिस्टर दिमित्री इस्लामोव के बयान से मेल खाता है, जिन्होंने TASS न्यूज एजेंसी को बताया था कि रूसी कोल के मुख्य बाजार चीन, भारत और अफ्रीका हैं। भारत में कोल की खपत ऊर्जा उत्पादन और इंडस्ट्री के लिए क्रिटिकल है, और रूस इसे सस्ते दामों पर उपलब्ध करा सकता है। 2024 में भारत ने रूस से तेल इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा लिया, और इस साल भी सप्लाई हाई लेवल पर बनी हुई है। US सैंक्शंस के बावजूद ये पार्टनरशिप मजबूत बनी हुई है, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद है।
ऊर्जा पार्टनरशिप की मजबूती
भारत रूस के एनर्जी सेक्टर के लिए की पार्टनर बना हुआ है। त्सिविलेव ने जोर देकर कहा कि 2024 में भारत ने रूस के तेल एक्सपोर्ट का बड़ा शेयर लिया, और इस साल भी वैसा ही ट्रेंड चल रहा है। सैंक्शंस ने थोड़ा असर डाला, लेकिन ओवरऑल सप्लाई चेन मजबूत है। रूस भारत को कोल के अलावा अन्य फ्यूल्स में भी सपोर्ट करने को तैयार है। ये सब मिलकर दोनों देशों के बीच एनर्जी ट्रेड को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। भारत की बढ़ती एनर्जी डिमांड को देखते हुए रूस का ये ऑफर टाइमली लगता है।












