जापान सरकार विदेशी पर्यटकों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए कुछ फीस बढ़ाने की तैयारी कर रही है। ये बदलाव एयरपोर्ट डिपार्चर टैक्स, वीजा शुल्क और प्री-एंट्री स्क्रीनिंग चार्जेस को छूएंगे। मुख्य वजह है पुरानी दरों को अपडेट करना और नई आय का स्रोत बनाना, ताकि एयरपोर्ट सुविधाओं और पब्लिक सर्विसेज को बेहतर फंडिंग मिल सके। ये कदम जापान को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब लाएंगे, लेकिन पर्यटन को प्रभावित न करने की कोशिश भी होगी।
डिपार्चर टैक्स में कितनी बढ़ोतरी?
अभी जापान का इंटरनेशनल टूरिस्ट टैक्स, यानी डिपार्चर टैक्स, 1,000 येन है। ये 2019 से लागू है और जापानी नागरिकों के साथ-साथ विदेशी यात्रियों पर भी लगता है। सरकार इसे बढ़ाकर लगभग 3,300 येन करने वाली है, जो अमेरिका के 22.20 डॉलर (करीब 3,300 येन) के बराबर होगा। ये बदलाव फिस्कल ईयर 2026 से शुरू होगा। इस टैक्स का पैसा एयरपोर्ट पर भीड़ कम करने, स्क्रीनिंग सिस्टम को मजबूत बनाने और नई योजनाओं के लिए इस्तेमाल होता है।
मिसाल के तौर पर, हाल ही में लॉन्च हुई फ्री हाई स्कूल ट्यूशन प्रोग्राम के लिए 400 बिलियन येन की जरूरत है। घरेलू यात्रियों पर बोझ न पड़े, इसलिए जापानी पासपोर्ट रिन्यूअल फीस को कम करने पर विचार चल रहा है। ये कदम यात्रियों को थोड़ा महंगा तो बनाएंगे, लेकिन सुविधाओं में सुधार लाएंगे।
वीजा फीस का लंबे समय बाद रिव्यू
वीजा फीस को 1978 से नहीं छेड़ा गया था। अभी सिंगल-एंट्री वीजा के लिए करीब 3,000 येन लगते हैं। अब विदेश मंत्रालय और जस्टिस मिनिस्ट्री मिलकर इसे अपडेट करेंगे। नई दरें अमेरिका के 185 डॉलर या यूरोपीय संघ के 90 यूरो के आसपास हो सकती हैं। इसके अलावा, रेसिडेंसी से जुड़े चार्जेस को अप्रैल 2025 में बदला गया, जो 1981 के बाद पहली बार हुआ। ये बदलाव विदेशियों के लिए जापान आने को थोड़ा महंगा बनाएंगे, लेकिन सिस्टम को आधुनिक रखने में मदद करेंगे। अधिकारी कहते हैं कि ये फीसें पर्यटन को हतोत्साहित नहीं करेंगी, बल्कि जापान की वेलकमिंग इमेज को बनाए रखेंगी।
नया JESTA सिस्टम
जापान एक नया इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ला रहा है – जापान इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फॉर ट्रैवल ऑथराइजेशन (JESTA)। ये अमेरिका के ESTA पर आधारित होगा और वीजा-वेवर देशों के यात्रियों के लिए होगा। लॉन्च फिस्कल ईयर 2028 में होगा, जिसमें फीस करीब 6,000 येन रखी जाएगी। ये सिस्टम प्री-एंट्री स्क्रीनिंग को आसान बनाएगा, ताकि एयरपोर्ट पर लंबी लाइनें न लगें। सरकार का मानना है कि इससे सुरक्षा बढ़ेगी और यात्रा प्रक्रिया तेज होगी।











