नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवादी समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सब कुछ ठीक नहीं है। अब इस संगठन के फैसले दुनिया की प्राथमिकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। दुनिया कठिन दौर से गुजर रही है और UN में सबकुछ ठीक नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने बिना नाम लिए चीन और पाकिस्तान को भी आड़े हाथ लिया। विदेश मंत्री जयशंकर ने ये बातें संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक डाक टिकट के विमोचन के दौरान कही।
आतंकवाद का संरक्षण करते हैं कुछ देश….
उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौर में शांति की आवश्यकता है और डाक टिकट इसी का प्रतीक है। दुनिया कठिन दौर से गुजर रही है। संयुक्त राष्ट्र में सब कुछ ठीक नहीं है। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्य आतंकवादियों को जवाबदेह ठहराने के बजाय उनका संरक्षण करते हैं। यह बात विदेश मंत्री ने बिना नाम लिए चीन और पाकिस्तान के लिए कही। क्योंकि भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को संरक्षण देता है और भारत को अस्थिर करने की कोशिश करता है। चीन इसमें पाकिस्तान का साथ देता है।

चीन के दोहरे रैवये की खोली पोल…
न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए गंभीर सुधारों की जरूरत है। भारत हमेशा से संयुक्त राष्ट्र का दृढ़ समर्थक रहा है और आगे भी रहेगा लेकिन वैश्विक दक्षिण की आवाज और वास्तविक शक्ति-संतुलन को शामिल किए बिना संगठन एकतरफा और अप्रभावी बना रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से आतंकवाद के मुद्दे पर कथनी और करनी के फर्क को बताता रहा है। लेकिन वैश्विक रणनीति के नाम पर आतंकवाद के पीड़ितों और अपराधियों को समान दर्जा दिया जा रहा है जो बेहद निंदनीय और खतरनाक है। उनकी यह टिप्पणी चीन की तरफ थी। क्योंकि चीन ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के सरगनाओं पर प्रतिबंध संबंधी प्रस्तावों को कई बार रोक चुका है।
विदेश मंत्री जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान बार-बार कश्मीर पर झूठ फैलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की चर्चाओं को हाईजैक करने की कोशिश कर रहा है। जबकि उसे पहलगाम में किए गए आतंकी हमले के लिए वैश्विक निंदा का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तानी राजनयिकों ने एक बार फिर आतंकवादियों को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में चित्रित करने की कोशिश की है। जिस पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।











