गाजा से अंतत: इज़रायली बंधकों की रिहाई आरंभ हुई और हमास ने बंधकों के शवों को भी लौटा दिया। बंधकों के शवों में सबसे हतप्रभ करने वाला शव नेपाली हिन्दू युवक बिपिन जोशी का रहा। क्योंकि बिपिन जोशी न ही इजरायल के थे और न ही यहूदी, वह बस इजरायल में पढ़ाई करने के लिए गए थे और इसी बीच 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला करके लोगों को मारा और सैकड़ों लोगों को बंधक बनाकर ले गए। इन्हीं बंधकों में नेपाल के बिपिन जोशी भी थे, जिन्होंने अपनी वीरता से 7 अक्टूबर 2023 को हमले वाले दिन 17 लोगों की जान बचाई थी। बिपिन जोशी के सम्मान में इजरायल ने एक विदाई समारोह आयोजित किया था। और अब उसका अंतिम संस्कार भी नेपाल में हो गया है।
उन्होंने शेल्टर से ग्रेनेड को बाहर फेंक दिया था। और इसके बाद उन्हें जिंदा पकड़ लिया गया था। ऐसा हमास और हमास के समर्थकों द्वारा कहा जाता है कि वे अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, और यहूदियों से ही केवल उनकी दुश्मनी है। यदि मात्र यहूदियों का धार्मिक अस्तित्व ही उनका शत्रु है, तो फिर बिपिन जोशी की हत्या हमास ने क्यों की और उन्हें बंधक रहते हुए ही मारा, क्योंकि हमास की कैद का उनका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमें वे अपना परिचय दे रहे हैं कि कैसे वे बताया रहे हैं कि वे एक विद्यार्थी हैं और वे कृषि की पढ़ाई करने के लिए इजरायल आए हैं।
Which Arab or Hamasnik wants to explain how killing a Nepali agriculture student is “resistance”? Monsters, every one of you.
Bipin Joshi 💔
May his memory forever be a blessing. pic.twitter.com/hJ7TvTvyDk— Caт 🐝 (@CatShoshanna) October 14, 2025
hen Mazzig की पोस्ट पर बिपिन के परिजनों की ओर से एक संदेश साझा किया गया है। और उसमें यह लिखा है कि परिजनों के अनुसार एक सप्ताह पहले उनके साथ बिपिन के जिंदा होने के सबूत साझा किये गए थे। इसे 7 अक्टूबर के बाद हमास की सुरंग में एक महीने बाद का फिल्माया हुआ बताया जा रहा है, जिसमें उनका बेटा कैमरे पर स्वस्थ और मजबूत लग रहा था। इसमें आगे लिखा है कि इस वीडियो से उन्हें यह आस बंधी थी कि वह जिंदा और सुरक्षित होगा और वे लोग एक दिन बिपिन की मुस्कान देखेंगे। मगर उन्हें आज यह हृदयविदारक समाचार मिला। इसमें लिखा कि उनका बेटा बिपिन और पुष्पा का जीवन साथी, हमास की कैद में मारा गया।
The family of Bipin Joshi has asked to share the following message:
"A week ago, we shared proof of life of our beloved son, Bipin. It was filmed in Hamas tunnels about a month after October 7th, showing our son speaking to the camera, healthy and strong. We held on to that… pic.twitter.com/PuKCRjZBsr
— Hen Mazzig (@HenMazzig) October 15, 2025
लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल एक ही नेपाली युवक का इस प्रकार ठंडे दिमाग से खून किया गया। 7 अक्टूबर 2023 को जब हमास ने हमला किया था, तो उस हमले में 10 नेपाली छात्रों की भी हत्या हमास के आतंकियों ने की थी और चार नेपाली छात्र घायल हुए थे।
दरअसल नेपाल से छात्र learn and earn कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि तकनीकें सीखने के लिए इजरायल आए हुए थे और उस समय नेपाल के छात्र उस खेत में काम कर रहे थे, जहां पर हमास के लड़ाकों ने हमला किया था। और ये छात्र उस हमले की चपेट में आ गए थे। दस छात्र तो मारे गए थे, मगर बिपिन जोशी को बंधक बनाकर ले जाया गया और फिर उन्हें एकदम ठंडे दिमाग से क्रूर तरीके से मारा गया।
समस्या यहूदियों और इजरायल से तो फिर नेपाली छात्रों की हत्या क्यों?
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि हमास को समस्या यहूदियों और इजरायल से है तो फिर नेपाली छात्रों की हत्या इस प्रकार क्यों की गई? बिपिन जोशी को बंधक क्यों बनाया गया? और यदि उनकी हत्या ही कर दी गई थी, तो फिर यह बताया क्यों नहीं गया? सोशल मीडिया पर बिपिन की माँ को अपने बेटे की सुरक्षित रिहाई के लिए भटकता हुआ देखा जा सकता है।
बिपिन जोशी की हत्या पर भारत में हमास समर्थकों के मध्य असहज
परंतु इन नेपाली छात्रों की मृत्यु पर और अब बिपिन जोशी की बंधक बनाए हुए हत्या को लेकर भारत में बैठे हुए हमास समर्थकों के मध्य एक असहज मौन पसरा हुआ है। यह मौन बहुत ही भयभीत करने वाला मौन है, क्योंकि यह सुनियोजित मौन है और यह हमास के पापों को छुपाने वाला मौन है।
जब उनकी तरफ से यह कहा जाता है कि हमास यहूदियों द्वारा फिलिस्तीनी नागरिकों अर्थात मुस्लिमों पर किये गए अत्याचारों के खिलाफ लड़ रहा है और वह अपने धार्मिक अस्तित्व के लिए लड़ रहा है, तो ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि यदि उनकी लड़ाई यहूदियों और इजरायल से थी, तो फिर उन्होनें उस धार्मिक अस्तित्व के लोगों को क्यों मारा, जिसकी उनसे कोई दुश्मनी नहीं है?
बिपिन जोशी की बंधक रहते हुए हत्या क्यों की गई, यह अपने आप में बहुत बड़ा प्रश्न है और बंधक बनाया ही क्यों, जब वह उस धार्मिक पहचान के नहीं थे, जिनसे हमास घृणा करता है? और भारत में ही नहीं, अपितु कहीं भी बिपिन जोशी की इस निर्मम हत्या पर पसरा मौन और भी बड़े खतरे का संकेत देता है।













