आज पूरे देश में रोशनी और खुशियों का त्योहार दीवाली बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस साल कार्तिक अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर की शाम से शुरू होकर 21 अक्टूबर की शाम तक रहेगी। इसलिए, दीवाली का मुख्य पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। दीवाली के दिन लोग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी घर में समृद्धि और सुख-शांति का वास करती हैं, जबकि भगवान गणेश बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद देते हैं। शाम को घरों, मंदिरों और बाजारों में दीपक और रंग-बिरंगी लाइटें जलाई जाती हैं। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, सजावट करते हैं और मिठाइयाँ बांटते हैं। बच्चे पटाखे जलाकर खुशी मनाते हैं। भारत में दीवाली सिर्फ एक दिन का नहीं बल्कि पांच दिनों का बड़ा उत्सव होता है।
पहला दिन- धनतेरस: इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन या नए सामान खरीदते हैं। दूसरा दिन- नरक चतुर्दशी या छोटी दीवाली: इस दिन लोग घर की सफाई और दीपक जलाकर बुराइयों को दूर करने का प्रतीक मनाते हैं। तीसरा दिन- मुख्य दीवाली: इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है। चौथा दिन- गोवर्धन पूजा: इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है। पांचवां दिन- भाई दूज: इस दिन भाई-बहन का स्नेह और प्रेम मनाया जाता है। भारत के अलावा, दीवाली विदेशों में भी बहुत लोकप्रिय है। नेपाल में इसे तिहार कहा जाता है। वहीं श्रीलंका, मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, गुयाना, सिंगापुर, मलेशिया, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय भी इस त्योहार को बहुत उत्साह से मनाते हैं।
दीवाली पर पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त- संध्याकाल पूजा मुहूर्त- शाम 07:08 से 08:18 बजे तक। प्रदोष काल- शाम 05:46 से 08:18 बजे तक। वृषभ काल- शाम 07:08 से 09:03 बजे तक। निशीथ काल (रात्रि पूजा)- रात 11:41 से 12:31 बजे तक। भक्त अपनी सुविधा अनुसार इनमें से किसी भी शुभ समय पर मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं।













