छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में बड़ी खबर है, जहां एक साथ 208 नक्सलियों ने हिंसा और लाल आतंक को छोड़कर विकास की मुख्यधारा को चुना है। सरेंडर करने वालों 110 महिलाएं और 98 पुरुष शामिल हैं। इसके साथ ही इन लोगों ने 153 हथियारों को भी जमा कर दिया है। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने का लक्ष्य रखा है।
#WATCH | Chhattisgarh | 208 Naxalites surrender and lay down their weapons before security forces in Bastar's Jagdalpur to join the mainstream, as they express confidence in the Constitution of India pic.twitter.com/mDkpFOvLSP
— ANI (@ANI) October 17, 2025
बस्तर में इतना बड़ा सरेंडर, कभी न सुना!
बस्तर के अबुझमाड़ इलाके में यह सरेंडर हुआ, जो नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी कामयाबी है। एक साथ इतने सारे लोग—110 महिलाएं और 98 पुरुष ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिए। ये सभी प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के अलग-अलग पदों पर थे। ये लोग सालों से जंगलों में छिपे हुए थे, लेकिन अब शांति चुन ली।
उत्तर बस्तर अब लाल आतंक से आजाद
इसी के साथ अबुझमाड़ का ज्यादातर हिस्सा नक्सलियों के चंगुल से मुक्त हो गया है। दशकों से यहां लाल आतंक का राज था। लेकिन अब उत्तरी बस्तर में यह खतरा लगभग खत्म हो चुका है। सिर्फ दक्षिणी बस्तर में थोड़ा-बहुत बचा है। अधिकारी कहते हैं कि यह सरेंडर से इलाके में शांति लौट रही है, और लोग बेझिझक खेती-बाड़ी कर पा रहे हैं।
संगठन के हर स्तर से लोगों का सरेंडर
ये सरेंडर करने वाले माओवादी संगठन के हर कोने से आए थे। इनमें एक केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम), चार दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति (डीकेएसजेडसी) के सदस्य, एक क्षेत्रीय समिति सदस्य, 21 संभागीय समिति सदस्य (डीवीसीएम), 61 क्षेत्रीय समिति सदस्य (एसीएम), 98 पार्टी सदस्य और 22 पीएलजीए/आरपीसी/अन्य कार्यकर्ता थे। यानी ऊपर से नीचे तक, सबने हथियार छोड़ दिए। ये आंकड़े बताते हैं कि संगठन की जड़ें हिल रही हैं।
हथियारों का भंडार सौंपा
सरेंडर के दौरान जो हथियार मिले उनमें 19 एके-47 राइफलें, 17 एसएलआर राइफलें, 23 इंसास राइफलें, एक इंसास एलएमजी, 36 .303 राइफलें, चार कार्बाइन, 11 बीजीएल लांचर, 41 बारह-बोर या सिंगल-शॉट बंदूकें और एक पिस्तौल शामिल थे।
#WATCH | Jagdalpur, Chhattisgarh | A total of 208 Naxalites, along with 153 weapons, brought to the Police Lines for surrender and rehabilitation. pic.twitter.com/zuGwsCDt1n
— ANI (@ANI) October 17, 2025
बड़े नक्सली नेता भी शामिल
इस सरेंडर में कई बड़े नाम शामिल थे, जो संगठन के कंधों पर थे। जैसे रूपेश उर्फ सतीश (केंद्रीय समिति सदस्य), भास्कर उर्फ राजमन मंडावी (डीकेएसजेडसी सदस्य), रनिता (डीकेएसजेडसी सदस्य), राजू सलाम (डीकेएसजेडसी सदस्य), धन्नू वेट्टी उर्फ संटू (डीकेएसजेडसी सदस्य) और रतन एलम (क्षेत्रीय समिति सदस्य)। ये लोग अब मुख्यधारा में लौट आए हैं। बस्तर, जो कभी वामपंथी उग्रवाद का गढ़ था, वहां माओवादी नेटवर्क और ढीला पड़ रहा है।

















