मध्य प्रदेश और राजस्थान में कम से कम 21 मासूम बच्चों की जान लेने वाले कोल्ड्रिफ कफ सिरप के मैन्युफैक्चरर, स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स के मालिक को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। ये सिरप जहरीला केमिकल डायएथिलीन ग्लाइकॉल से भरा था, जो इंडस्ट्रियल यूज का होता है। गिरफ्तारी के बाद कंपनी को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। ये सब 9 अक्टूबर 2025 को सामने आया, जब तमिलनाडु की पुलिस ने चेन्नई में रंगनाथन नाम के इस मालिक को पकड़ा।
कंपनी की गंदी कारगुजारी: बिना सर्टिफिकेट का जहर
तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स जेनेरिक दवाएं बनाती है। लेकिन इनका कोल्ड्रिफ सिरप तो मौत का जहर निकला। तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट की 26 पेज की रिपोर्ट ने सारी पोल खोल दी। फैक्ट्री में कदम रखते ही नाक सड़ने लगे – जंग लगी मशीनें, गंदगी का अंबार, और सबसे घिनौना, फार्मा ग्रेड न होने वाले केमिकल्स का इस्तेमाल। रिपोर्ट कहती है कि सिरप में 48 फीसदी तक डायएथिलीन ग्लाइकॉल मिला था, जबकि लिमिट सिर्फ 0.1 फीसदी की है। कुल 350 उल्लंघन पकड़े गए, जिनमें हाइजीन की कमी से लेकर कंप्लायंस की धज्जियां उड़ाने तक सब शामिल।
कंपनी के पास गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) सर्टिफिकेट भी नहीं था, फिर भी ये सालों से सिरप बनाकर बेच रही थी। ये सिरप मध्य प्रदेश, ओडिशा और पुडुचेरी में सप्लाई होता था। सबसे ज्यादा तबाही मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हुई, जहां बच्चों को ये दवा देकर मां-बाप ने सोचा था कि खांसी ठीक हो जाएगी, लेकिन मौत आ गई। पहले 14 मौतें बताई गईं, लेकिन अब टोल 16 हो चुकी है – दो और बच्चे हाल ही में चल बसे। राजस्थान में भी पांच मौतें जुड़ीं। ये सिरप बाजार में आसानी से मिल जाता था, और गरीब परिवारों के बच्चे इसका शिकार बने।
गिरफ्तारी का सिलसिला
8 अक्टूबर की रात को चेन्नई के कोडंबक्कम इलाके में रंगनाथन के घर पर मध्य प्रदेश पुलिस का धावा बोल दिया। लोकल पुलिस के साथ मिलकर उन्होंने उसे उठा लिया। सुबह होते ही कांचीपुरम की फैक्ट्री ले जाकर घंटों पूछताछ की। रंगनाथन ने कोई सफाई नहीं दी, बस चुप्पी साधे रहा। अब उसे ट्रांजिट रेमांड लेकर छिंदवाड़ा ले जाया जाएगा, जहां केस दर्ज है। पुलिस कहती है कि ये शुरुआत है – और कई गिरफ्तारियां होंगी। कंपनी के दूसरे अफसरों और सप्लायर्स पर भी शिकंजा कस रहा है। ये गिरफ्तारी उन मां-बापों को थोड़ी राहत देगी, जिनके बच्चे इस जहर की भेंट चढ़ गए।
कौन जिम्मेदार?
जांच में पता चला कि ये सिरप कई राज्यों में फैला था। तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल ने तुरंत प्रोडक्शन रोक दिया और लाइसेंस सस्पेंड कर दिया। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने भी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस कैंसल करने की सिफारिश की। यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री के अफसरों ने साफ कहा कि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की निगरानी स्टेट ड्रग कंट्रोलर्स की जिम्मेदारी है। फॉर्म 25 के तहत लाइसेंस स्टेट कंट्रोलर्स ही देते हैं, लेकिन कैंसलेशन का फैसला भी उसी का होता है। सवाल ये उठता है कि इतने बड़े लापरवाही कैसे हो गई? रिपोर्ट में साफ लिखा है कि फैक्ट्री में बेसिक हाइजीन भी नहीं थी, फिर भी दवा बनती रही।













