पाकिस्तान के अधिकारियों और पीसीबी से गहरा भेदभाव झेलने वाले पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने एक बार फिर भारत के प्रति अपना अगाध प्रेम प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि भारत मेरे लिए मंदिर के समान है। उन्होंने भारतीय नागरिकता को लेकर भी बयान दिया।
दानिश कनेरिया ने कहा कि भारत और उसकी नागरिकता के बारे में मैं बिल्कुल स्पष्ट कर दूं। पाकिस्तान मेरी जन्मभूमि हो सकती है, लेकिन मेरे पूर्वजों की भूमि भारत मेरी मातृभूमि है। मेरे लिए भारत एक मंदिर के समान है। फिलहाल, मेरी भारतीय नागरिकता लेने की कोई योजना नहीं है। अगर भविष्य में कोई ऐसा करना चाहे, तो हमारे जैसे लोगों के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम पहले से ही लागू है।
पाकिस्तान में हिंदू होने के कारण दानिश को बहुत कुछ सहना पड़ा है। उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि हाल ही में कई लोगों ने मुझसे सवाल किया कि मैं पाकिस्तान के बारे में क्यों नहीं बोलता, भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी क्यों करता हूं और कुछ तो यह भी आरोप लगाते हैं कि मैं यह सब भारतीय नागरिकता के लिए लेने के लिए कर रहा हूं। मुझे लगता है कि इस पर अपनी बात स्पष्ट बेहद जरूरी थी।
‘जबरन कन्वर्जन के प्रयास किए गए’
पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर के शब्दों में, “पाकिस्तान और उसके लोगों से मुझे बहुत कुछ मिला है, खासकर आवाम का प्यार। लेकिन उस प्यार के साथ-साथ मुझे पाकिस्तानी अधिकारियों और पीसीबी से गहरे भेदभाव का भी सामना करना पड़ा, जिसमें जबरन कन्वर्जन के प्रयास भी शामिल है।”
‘मैं धर्म के लिए खड़ा रहूंगा और राष्ट्र-विरोधियों का पर्दाफाश करूंगा’
दानिश कनेरिया ने कहा कि जो लोग यह दावा करते हैं कि मेरे शब्द या कार्य भारत की नागरिकता लेने का प्रयास है, तो वे पूरी तरह से गलत हैं। मैं धर्म के लिए हमेशा खड़ा रहूंगा और उन राष्ट्र-विरोधियों व छद्म धर्मनिरपेक्षतावादियों का पर्दाफाश करता रहूंगा, जो हमारे मूल्यों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमारे समाज को विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरी सुरक्षा के लिए चिंतित लोगों से यही कहूंगा कि प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से मैं अपने परिवार के साथ सुरक्षित और खुश हूं। मेरा भाग्य भगवान राम के हाथों में है।
‘पाकिस्तान में मेरे साथ बहुत भेदभाव हुआ’
इस वर्ष मार्च में दानिश कनेरिया ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान में उनके साथ बहुत भेदभाव हुआ और उनका करियर बर्बाद हो गया। कनेरिया हिंदू हैं। उन्होंने पाकिस्तान में ‘अल्पसंख्यकों की दुर्दशा’ पर एक ब्रीफिंग में कहा था, “मैंने भी पाकिस्तान में भेदभाव का सामना किया और मेरा करियर बर्बाद हो गया। मुझे पाकिस्तान में समान मूल्य, सम्मान नहीं मिला।” बताया जाता है कि कनेरिया ने पाकिस्तान के लिए कई मैच खेले हैं और वह अनिल दलपत के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में शामिल होने वाले दूसरे हिंदू हैं।

















