2008 में मुंबई में आतंकी हमले के 17 साल के बाद कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने बड़ा खुलासा किया है। उनका कहना है कि वो मुंबई हमले का बदला लेना चाहते थे, लेकिन उस वक्त की मनमोहन सिंह सरकार ने इसकी इजाजत ही नहीं दी। उनका कहना है कि हम पर कार्रवाई नहीं करने के लिए पूरी दुनिया से दवाब डाला गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, चिदंबरम ने ये बातें एक इंटरव्यू के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि मुंबई हमले के बाद अमेरिका की तत्कालीन विदेश मंत्री दिल्ली के दौरे पर आई थीं और उन्होंने हमसे एक्शन नहीं लेने के लिए कहा था। हालांकि, उस दौरान मेरे मन में बदला लेने का खयाल आया था और इसको लेकर मैंने संबंधित अधिकारियों और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ चर्चा की थी। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने भी हमसे एक्शन नहीं लेने को कहा था।
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भाजपा ने साधा निशाना
चिदंबरम के इस बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस नेता पर जमकर निशाना साधा है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने तंज देश को तो पहले से ही पता था विदेशी दबाव के चलते ही सही से हैंडल नहीं किया गया।
इसके साथ ही भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि चिदंबरम तो मुंबई हमलों के बाद देश के गृह मंत्री का पद भी संभालने से हिचकिचा रहे थे। वे पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के पक्ष में थे, लेकिन बाकी लोग उन पर भारी पड़ गए।
क्या हुआ था 26 नवंबर 2008 को
गौरतलब है कि 26 नवंबर 2008 में बड़ी साजिश के तहत पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयबा के आतंकी समंदर के रास्ते मुंबई में घुसते हैं। सीएसटी, ताज होटल और नरीमन प्वॉइंट होटल को कब्जे में लेते हैं। इस आतंकी हमले को निष्क्रिय करने के लिए सेना और एनएसजी ने 60 घंटे तक लगातार अभियान चलाया। इस हमले में 175 लोगों की मौत हो गई थी। खास बात ये भी है कई बार भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने भी कहा था कि उस दौरान वे हमले के लिए तैयार थे, लेकिन सरकार ने ही इजाजत नहीं दी।

















