नई दिल्ली: पाक अधिकृत कश्मीर (POK) के मुजफ्फराबाद में भारी बवाल हो रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर गये हैं और भारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पों में दो लोगों की मौत हो गई है। जबकि 22 से ज्यादा घायल हुए हैं। शहबाज शरीफ से पीओके नहीं संभल रहा है। वहां बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे नागरिकों पर गोलियां चलाई जा रही हैं। स्थानीय नागरिकों ने सरकार के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया है। सेना भी नागरिकों के दमन के लिए उतर आई है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई (ISI) समर्थित मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के हथियारबंद गुंडों ने नागरिकों पर गोलियां चलाई हैं। इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।
मौलिक अधिकारों के हनन को लेकर सड़कों पर उतरे लोग
पीओके से जो वीडियो सामने आए हैं उनमें लोग हवा में गोलियां चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। हथियारबंद गुंडे प्रदर्शनकारियों से घिरी कारों की छतों पर चढ़ हुए दिख रहे हैं। स्थानीय प्रदर्शनकारी ‘मौलिक अधिकारों के हनन’ को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। ये विरोध प्रदर्शन अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में हो रहे हैं। जिससे बाजार के साथ ही परिवहन सेवाएं भी ठप हो गई हैं। एएसी नेता शौकत नवाज मीर का कहना है कि हमारा अभियान 70 से ज्यादा सालों से हमारे लोगों को वंचित रखे गए मौलिक अधिकारों के लिए है। या तो अधिकार दिलाएं या जनता के गुस्से का सामना करें। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ प्रशासन को चेतावनी दी है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शक्ति प्रदर्शन से कुचल रहे विरोध प्रदर्शन
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पीओके के लोगों की मांगों को शक्ति प्रदर्शन के जरिए कुचल रहे हैं। पाकिस्तानी समाचार वेबसाइट डॉन के मुताबिक भारी हथियारों से लैस गश्ती दल ने पीओके के शहरों में फ्लैग मार्च किया है। राजधानी इस्लामाबाद से 1,000 अतिरिक्त सैनिक भेजे गए हैं। पाक सरकार ने इस क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा भी प्रतिबंधित कर दी है। आइए 5 बिंदुओं में समझते हैं क्यों सड़कों पर उतरे हैं POK के लोग
#1.POK में स्थानीय सरकार के पावर में कटौती की मांग
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में सरकार वर्सेज स्थानीय नागरिकों के बीच के विवाद ने हड़ताल का रूप ले लिया है। 29 सितंबर से स्थानीय पब्लिक एक्शन कमेटी ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। इसका असर देखने को मिल रहा है। पूरे पीओके में मोबाइल इंटरनेट सेवा पर बैन लग चुका है। सड़कों पर सेना को उतारा गया है। बताया जा रहा है कि हड़ताल के कारण स्कूल-कॉलेज सब ठप हो गए हैं। पब्लिक एक्शन कमेटी ने 25 सितंबर को सरकार के साथ एक बैठक की थी। जिसमें अपनी मांगों को सरकार को बताया था। कमेटी का कहना था कि पीओके (POK) की जो स्थानीय सरकार है उसके पावर में कटौती हो। वीआईपी व्यवस्था भी खत्म की जाए।
#2. आटे की कीमत ने लिया विद्रोह का रूप…..
पीओके में आंदोलन की शुरुआत आटे की कीमत को लेकर हुई। यहां आटे की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई थी जिससे नागरिकों में रोष था। इसी असंतोष ने धीरे-धीरे विद्रोह का रूप अख्तियार कर लिया।
#3.VIP कल्चर खत्म करने की मांग
कश्मीर संयुक्त नागरिक कमेटी ने 38 मांगों की एक लिस्ट सरकार को सौंपी है। इनमें प्रवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा की 12 सीटों को समाप्त करना और पीओके शासन के प्रमुख लोगों का भत्ता और वीआईपी कल्चर खत्म करना प्रमुख है।
#4. जल विद्युत परियोजना भी विरोध की एक वजह
प्रदर्शनकारियों की एक मांग जल विद्युत परियोजना को लेकर भी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इसकी रॉयल्टी सरकार की तरफ से नहीं दी जाती है। जिसे उन्होंने गलत बताया है। दूसरी तरफ सरकार ने इन मांगों को पूरा करने में असमर्थता जता दी है।
#5. बेरोजगारी और भ्रष्टाचार भी बना आक्रोश की वजह
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व शौकत अली मीर कर रहे हैं। पिछले दिनों मीर ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार और रोजगार को बड़ा मुद्दा बताया था। मीर का कहना था कि पाकिस्तान की सरकार ने पीओके के लोगों को दलदल में धकेल दिया है।इससे अब बाहर निकलने का वक्त आ गया है।

















