राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 1925 में हुई थी और अब 2025 में विजयादशमी के दिन 100 साल पूरे होंगे। इस खास अवसर पर शनिवार को नागपुर के रेशिमबाग स्थित महर्षि व्यास सभागार में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने संघ की पारंपरिक प्रार्थना के नए संस्करण को सभी के सामने प्रस्तुत किया।
इस नई प्रार्थना को प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन ने गाया है। रिकॉर्डिंग लंदन में की गई है। संगीतकार राहुल रानाडे के निर्देशन में तैयार इस प्रार्थना को सुनकर सभी दर्शक भाव-विभोर हो गए। कार्यक्रम में मशहूर उद्घोषक हरीश भिमानी की उपस्थिति ने भी आयोजन को और खास बना दिया। संघ की इस प्रार्थना का प्रारूप पहले 1939 में एक बैठक में तैयार किया गया था। इसे नरहरि नारायण भिडे ने लिखा था। इसके बाद 23 अप्रैल 1940 को पुणे में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग में स्वयंसेवक यादवराव जोशी ने इसे पहली बार गाया था। तभी से यह प्रार्थना संघ की हर सभा और कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
अब जब RSS अपने 100 साल पूरे कर रहा है, तब इस प्रार्थना को नए रूप में पेश किया गया है। शंकर महादेवन की आवाज और राहुल रानाडे के संगीत ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया है। यह नया रूप न केवल सुनने में मधुर है, बल्कि यह स्वयंसेवकों को नई ऊर्जा और प्रेरणा देने वाला है। महर्षि व्यास सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों स्वयंसेवक और कई गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने इस नई प्रार्थना की सराहना की और इसे संघ की विरासत से जोड़कर देखा। RSS ने पिछले 100 वर्षों में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा, आपदा प्रबंधन, और सांस्कृतिक एकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नई प्रार्थना का यह संस्करण भी इसी उत्सव का एक विशेष हिस्सा है। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल संघ के 100 वर्षों की यात्रा को सम्मान देना था, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को संघ के मूल्यों, विचारों और सेवा भाव से जोड़ना भी है।















