इस वक्त वैश्विक राजनीति पल-पल करवटें बदल रही है। किस वक्त क्या हो जाएगा ये किसी को नहीं पता। ऐसा ही इजरायल और हमास के बीच हो रहे युद्ध के दौरान हो रहा है। यूरोप के कई देश फिलिस्तीन को देश के तौर पर मान्यता देने के लिए तैयार हैं। इसमें फ्रांस ईयू का लीडर बनने की कोशिशों में लगा हुआ है। इसी क्रम में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ट्रंप से स्पष्ट कहा कि अगर इजरायल गाजा या वेस्ट बैंक के हिस्सों पर कब्जा करता है तो ये अमेरिका के लिए रेड लाइन होगी।
मैक्रों ने ट्रंप को ये बातें मीटिंग के बाद कही। इस दौरान उन्होंने तीन पेज का प्लान ट्रंप को सौंपा। ये न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन पर टिका है, जिसे 143 देश मंजूर कर चुके हैं। इस मैक्रों और ट्रंप की ये मुलाकात इसलिए खास थी क्योंकि अमेरिका, यूरोप और अरब देशों को एक पंक्ति में लाने की कोशिश की। उनका प्लान हमास को साइडलाइन करके फिलिस्तीन का भविष्य संवारने पर फोकस करता है। ट्रंप ने भी सहमति जताई, लेकिन मैक्रों ने जोर देकर कहा, “यूरोपियन और अमेरिकन इस मुद्दे पर एक ही मेज पर हैं।” ये प्लान सिर्फ बातें नहीं, बल्कि गाजा में सीजफायर, बंधकों की रिहाई और लंबे समय की शांति पर केंद्रित है।
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वेस्ट बैंक पर कब्जा अमेरिका के लिए रेड लाइन
मैक्रों ने साफ कहा, “ये अमेरिका के लिए रेड लाइन है।” अगर इजरायल वेस्ट बैंक के हिस्सों पर कब्जा कर ले, तो अब्राहम समझौते का अंत हो जाएगा। ये समझौते ट्रंप के पहले टर्म में UAE जैसे अरब देशों के साथ इजरायल के रिश्ते नॉर्मलाइज करने वाले थे। मैक्रों ने E1 कॉरिडोर में 3,400 नए घरों की प्लानिंग का जिक्र किया, जो सेटलमेंट्स बढ़ाने का हिस्सा है। ब्रिटिश अफसरों को डर है कि ट्रंप बदले में इजरायल को वेस्ट बैंक सेटलमेंट्स पर सॉवरेन्टी मान्यता दे सकता है, खासकर UK, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और कनाडा जैसे देश फिलिस्तीन को मान्यता देने के बाद। ये सब दो-राज्य समाधान को खतरे में डाल रहा, जहां फिलिस्तीन और इजरायल साथ-साथ रहें।
इजरायली संप्रभुता पर आंच
अगर अमेरिका इजरायल के कदम को समर्थन देगा या चुप्पी साधेगा, तो दो-राज्य समाधान बुरी तरह प्रभावित होगा। मैक्रों ने चेतावनी दी कि इससे फिलिस्तीनी लोगों की वैधता पर सवाल उठेगा। 78 साल पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने फिलिस्तीन की मान्यता दी थी, लेकिन अब उम्मीद टूट रही है। मैक्रों ने कहा, “अगर लोगों को राजनीतिक रास्ता न दें, तो वो हताशा या हिंसा की ओर चले जाएंगे”
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नेतन्याहू पर बढ़ा राजनीतिक दबाव बढ़ा
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के लिए ये मुश्किल वक्त है। ट्रंप सोमवार को व्हाइट हाउस में उनसे मिलेंगे, और शुक्रवार को वो UN जनरल असेंबली को संबोधित करेंगे। अगर ट्रंप एनैक्सेशन रोकने पर अड़े, तो नेतन्याहू का एक्सट्रीम-राइट कोलिशन टूट सकता है, जो वेस्ट बैंक कब्जे की मांग कर रहा। मैक्रों ने कहा, “अमेरिका इजरायल पर दबाव डाल सकता है, क्योंकि उसके पास असली ताकत है।”
क्या है मैक्रों का शांति प्लान
मैक्रों का ‘ब्रैंड न्यू’ प्लान मल्टी-स्टेज है – सीजफायर, बंधक रिहाई और शांति। उन्होंने नेतन्याहू की ‘टोटल वॉर’ स्ट्रेटजी को फेल बताया। उनका कहना है, “हमास के लड़ाकों की संख्या पहले जितनी ही है। टोटल वॉर प्रैक्टिकल रूप से काम नहीं कर रही। ये युद्ध फेलियर है”। उनका आरोप है कि कुछ इजरायली कैबिनेट मेंबर्स का मकसद हमास से लड़ना नहीं, बल्कि शांति को तोड़ना है। मैक्रों का दावा है कि वेस्ट बैंक में तो हमास है ही नहीं। नेतन्याहू का फोकस बंधकों पर नहीं, वरना गाजा सिटी पर आक्रमण या कतर में नेगोशिएटर्स पर हमला न करते।















