‘आधार- Infra Confluence 2025’ : विकास के पायदान, अनूठे आयाम
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‘आधार- Infra Confluence 2025’ : विकास के पायदान, अनूठे आयाम

‘आधार- Infra Confluence 2025’ में एक सत्र था—विकास के आयाम। इस सत्र में पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी राघव चंद्रा, पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष हेमंत जैन, प्रसिद्ध इंजीनियर रंजन कुमार ढींगरा और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य अवनीश कुमार सिंह ने ढांचागत सुविधाओं के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राज चावला ने किया

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 22, 2025, 11:05 pm IST
in भारत, विश्लेषण, पाञ्चजन्य इवेंट
‘आधार- Infra Confluence 2025’ में राघव चंद्रा, हेमंत जैन, रंजन कुमार ढींगरा और अवनीश कुमार सिंह ने ढांचागत सुविधाओं के विभिन्न आयामों पर चर्चा

‘आधार- Infra Confluence 2025’ में राघव चंद्रा, हेमंत जैन, रंजन कुमार ढींगरा और अवनीश कुमार सिंह ने ढांचागत सुविधाओं के विभिन्न आयामों पर चर्चा

‘आधार- Infra Confluence 2025’ में एक सत्र था—विकास के आयाम। इस सत्र में  पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष हेमंत जैन ने ढांचागत सुविधाओं के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राज चावला ने किया

10 वर्ष में लंबी छलांग

हेमंत जैन

आज भारत सड़कों के मामले में विश्व में अपना दूसरा स्थान बना चुका है। कुछ ही समय में यह पहले स्थान पर पहुंच सकता है। अब इसमें भारत से पहले केवल अमेरिका है। यह उपलब्धि गत 10 वर्ष में मिली है। पहले भारत में प्रतिदिन सात-आठ किलोमीटर सड़कें बनती थीं, लेकिन आज इससे चार गुना अधिक सड़कें बन रही हैं। सड़कें हों, बंदरगाह या हवाई अड्डे, हर क्षेत्र में प्रगति दिखी है। छोटे-छोटे कस्बे हवाई अड्डे से जुड़ रहे हैं।

जो काम 50-60 साल में नहीं हुए, वे 10 वर्ष में हुए हैं। हमारे लोग बहुत सक्षम हैं। हमारी टेक्नोलॉजी बहुत बढ़िया है, लेकिन आज के दिन माल ढुलाई के मामले में हम दुनिया से पीछे हैं। यूरोप में, यूएसए में ऐसी व्यवस्था है कि माल लेने के लिए आपकी फैक्ट्री के अंदर ही मालगाड़ी आ जाती है। इसलिए हमें माल ढुलाई के क्षेत्र में और तेजी से सुविधाओं का विकास करना होगा।

प्रधानमंत्री ने 2047 तक भारत को विकसित बनाने का लक्ष्य रखा है। अगर किसी देश को आगे बढ़ना है तो उसको अपने सकल घरेलू उत्पाद और ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाना ही होगा।

-हेमंत जैन, अध्यक्ष, पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स

‘आधार- Infra Confluence 2025’ में एक सत्र था—विकास के आयाम। इस सत्र में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य अवनीश कुमार सिंह ने ढांचागत सुविधाओं के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राज चावला ने किया

शिक्षा में सुधार, खेती में निखार

पिछले 10 वर्ष में गांवों की तस्वीर बदल चुकी है। इसे समझने के लिए चार बिंदुओं को देखना होगा। पहला शिक्षा, दूसरा स्वास्थ्य, तीसरा आवागमन के साधन और चौथा बाजार के साथ किसानों का जुड़ाव। मैं चूंकि उत्तर प्रदेश से हूं, तो वहीं के गांवों की बात करता हूं। पहले किसी गांव में जाने पर कोई खंडहरनुमा भवन दिखता था तो लोग बताते थे कि वह प्राथमिक विद्यालय है। योगी जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस पर ध्यान दिया। आज अच्छे विद्यालय भवन बन चुके हैं। उनमें गांव के बच्चे पढ़ते हैं। छात्रों को पुस्तक, यूनिफार्म, मध्याह्न भोजन सब मिल रहा है। ऐसे ही राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार आया है। उत्तर प्रदेश में पी.एच.सी. और सी.ए.सी. में सुविधाएं मिलती ही हैं। इनके साथ ही आयुष्मान कार्ड बनने से भी लोगों को बहुत मदद मिली है।

उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए 2020 में ‘एग्रीकल्चर इंफ्रा फंड’ नाम से एक कोष बनाया गया था। इसके लिए एक लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। किसानों को अपना स्टोरेज बनाने के लिए सरकार ने उनकी मदद की। इस स्टोरेज में किसान कुछ दिन तक अपनी फसल को रख पाते हैं। इस कारण उन्हें बाद में उसकी अच्छी कीमत मिल जाती है। इससे उनकी आय बढ़ रही है। गांव-गांव में सड़कों के बनने से मंडी तक किसान की पहुंच आसान हो गई है। वे अपनी फसल को मंडी खुद ले जाते हैं। सरकार ने प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को भी बढ़ावा दिया। फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया तो छोटे-छोटे फूड प्रोसेसिंग संयंत्र शुरू हुए, उनमें कई तरह के काम हो रहे हैं। इन सबका लाभ किसानों को मिल रहा है।

-अवनीश कुमार सिंह, सदस्य, उ.प्र. विधान परिषद

‘आधार- Infra Confluence 2025’ में एक सत्र था—विकास के आयाम। इस सत्र में पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी राघव चंद्रा ने ढांचागत सुविधाओं के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राज चावला ने किया

बढ़ा सबका आत्मविश्वास

राघव चंद्रा

वास्तव में पिछले 10 साल में देश में ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने के लिए हर क्षेत्र में अच्छे कार्य हुए हैं। देश में ढांचागत सुविधाओं की बहुत जरूरत है। इससे न केवल आर्थिक गतिविधि बढ़ती है, बल्कि सामाजिक तौर पर भी इसका महत्व है। इंफ्रास्ट्रक्चर एक ‘सोशल लेवलर’ के तौर पर काम करता है, क्योंकि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं के माध्यम से समाज में समानता और समावेशी विकास को बढ़ावा देता है। सड़क, पुल आदि के बनने से आवागमन आसान हो जाता है। कोई कहीं भी आसानी से जा आ सकता है। पहले हमारे सारे राजमार्ग दो लेन के होते थे। अब अधिकतर राजमार्ग चार लेन या उससे अधिक के हो गए हैं।

हमारे राजमार्गों की लंबाई डेढ़ से दो लाख किलोमीटर हो गई है। इस कारण माल ढुलाई खर्च 25 से 30 प्रतिशत कम हो गया है। इस वजह से आज देश में सर्वांगीण विकास हो रहा है। इसका लाभ उद्योग व कृषि जगत के साथ अन्य क्षेत्रों को भी मिल रहा है। पहले होता था कि किसान ने फसल उगा दी, लेकिन उसे बाजार तक ले जाने के साधन नहीं होते थे, सड़कें नहीं होती थीं। आज हर किसान को भरोसा हो गया है कि उसके उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकते हैं।

इन कारणों से एक देशवासी का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब देश में पहले की अपेक्षा हवाई अड्डे भी दुगुने से अधिक हो गए हैं। अब प्राय: सभी जगह बिजली भी 24 घंटे आती है। पहले इसकी बड़ी किल्लत होती थी। लोग डीजल चालित जनरेटर खरीदते थे। अब डीजल जनरेटर की दुकानें बंद होने लगी हैं।

–राघव चंद्रा, पूर्व आई.ए.एस.

‘आधार- Infra Confluence 2025’ में एक सत्र था—विकास के आयाम। इस सत्र में प्रसिद्ध इंजीनियर रंजन कुमार ढींगरा  ने ढांचागत सुविधाओं के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राज चावला ने किया

सड़कों के साथ रेलवे में सुधार

रंजन कुमार ढींगरा
मुंबई-अमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन का काम जोरों से चल रहा है। कुछ ही वर्ष में बुलेट ट्रेन हकीकत बन जाएगी। यही तो ढांचागत विकास है। देश में नदियों को जोड़ने का काम भी हो रहा है। हालांकि यह सपना देखा था पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने। उनका मानना था कि नदियों को जोड़ने से देश के विकास को गति मिलेगी।

यह बात तो सही है कि देश में ढांचागत सुविधाओं में बढ़ोतरी हो रही है। देश में पुणे और मुम्बई के बीच पहला राजमार्ग बना। उसमें मेरी भी थोड़ी भूमिका रही। अब तो राजमार्गों का जाल बिछता जा रहा है। देश की गति बढ़ाने और प्रगति करने के लिए इसकी जरूरत भी है। सड़कों के साथ रेलवे में काफी सुधार हुआ है। कुछ वर्ष पहले तक रेलवे प्लेटफार्म या गाड़ियों के अंदर बदबू होती थी। किसी भी बड़े रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बैठने की स्थिति नहीं रहती थी, गंदगी ही गंदगी होती थी। अब वैसे दृश्य नहीं दिखेंगे। हां, कुछ अपवाद जरूर हो सकते हैं।

अब वंदे भारत जैसी उच्च गति वाली गाड़ियां चलने लगी हैं। कम से कम समय में आप लंबी दूरी तय कर पा रहे हैं। मुंबई-अमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन का काम भी जोरों से चल रहा है। कुछ ही वर्ष में बुलेट ट्रेन हकीकत बन जाएगी। यही तो ढांचागत विकास है। देश में नदियों को जोड़ने का काम भी हो रहा है। हालांकि यह सपना देखा था पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने। उनका मानना था कि नदियों को जोड़ने से देश के विकास को गति मिलेगी। अब उनका वह सपना साकार होता दिख रहा है। गुजरात में साबरमती और नर्मदा को जोड़ा गया है। ऐसे कार्य होते रहें।

-रंजन कुमार ढींगरा, प्रख्यात इंजीनियर

Topics: हेमंत जैन‘आधार- Infra Confluence 2025’ : विकास के पायदानअनूठे आयामराघव चंद्रारंजन कुमार ढींगराअवनीश कुमार सिंहराज चावलाटेक्नोलॉजी बहुत बढ़ियाउद्योग व कृषि जगतपाञ्चजन्य विशेषदेश के विकास को गति  प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
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