बगराम एयरबेस: अमेरिका की धमकाने की आदत नहीं जा रही है। उसे अब भी लगता है कि वह एक आदेश देगा और कोई देश अपना हिस्सा उसे पकड़ाने के लिए तैयार हो जाएगा। कुछ ऐसी ही हरकत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है। वह अफगानिस्तान को खुलेआम धमका रहे हैं। वह कह रहे हैं कि अगर अफगानिस्तान अपना बगराम एयरबेस अमेरिका को नहीं देगा तो वह उसे अपने ढंग से हासिल करेंगे।
सवाल ये है कि क्या किसी देश की संप्रभुता को कुचल कर उस पर हमला करना ही अमेरिकियों का ढंग है? ये सवाल इसलिए, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप जिस प्रकार से धमकियां दे रहे हैं, उससे तो यही प्रतीत होता है कि वह अफगानिस्तान पर हमला करने से भी बाज नहीं आने वाले हैं। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में अफगानिस्तान के मना करने के बाद दूसरी बार धमकी दी है। इसमें उन्होंने कहा कि अगर बगराम एयरबेस को अफगानिस्तान इसे बनाने वालों को वापस नहीं करता है तो बहुत ही बुरा होने वाला है।
इससे पहले उन्होंने अपने पूर्ववर्ती जो बाइडेन पर निशाना साधते हुए कहा था कि बगराम एयरबेस को छोड़ने की जो गलती उन्होंने (जो बाइडेन) की थी, उसे सुधारा जाएगा। बाइडेन ने ये भी स्पष्ट किया कि चूंकि बगराम से चीन काफी करीब है, इसलिए ये उन्हें चाहिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में एक बार फिर से अमेरिकी सेना की वापसी होगी।
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बगराम एयरबेस का इतिहास
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से 50 किलोमीटर उत्तर में ड्राइव करने के बाद एक बहुत ही बड़ा एयरपोर्ट है, जहां दो एयरस्ट्रिप है। वैसे तो इसे सोवियत यूनियन नौ कोल्ड वॉर के दौरान वर्ष 1950 में बनाया था। हालांकि, बाद में जब सोवियत ने अफगानिस्तान छोड़ा तो इस पर अमेरिकियों ने कब्जा कर लिया। करीब 20 साल तक अमेरिकी सेना के कंट्रोल में था ये। लेकिन, जब 2021 में अमेरिका ने अफगानिस्तान छोड़ा तो उसने इसे अफगान सेना को सौंप दिया था।
हालांकि, बाद में तालिबान ने सत्ता पर कब्जा करने के बाद इसे भी अपने कब्जे में ले लिया था। अब अमेरिका को एक बार फिर से ये चाहिए। इसके लिए वह अफगानिस्तान को धमका रहा है। उसकी इस धमकी पर अफगान तालिबान सरकार के एक राजनयिक जलाली ने दो टूक जवाब दिया कि अपने पूरे इतिहास में अफगानों ने अपनी धरती पर किसी विदेशी सेना की उपस्थिति को स्वीकार नहीं किया। और न ही करेगा।
















