हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (UoH) स्टूडेंट्स यूनियन चुनाव में ABVP की धमाकेदार जीत। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने सात साल बाद कमाल कर दिया। सभी छह पोस्ट्स पर क्लीन स्वीप कर लिया। इस साल की शुरुआत में असम, गुवाहाटी, हिमाचल, पटना, पंजाब और दिल्ली यूनिवर्सिटी में अपनी शानदार जीतों के बाद, ABVP ने एक बार फिर भारत के स्टूडेंट्स का भरोसा जीता। UoH के स्टूडेंट्स यूनियन पर एबीवीपी ने सात साल बाद ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
कौन हैं विजेता
प्रेसिडेंट: सिवा पालेपू (पीएचडी, एनिमल बायोलॉजी)
वाइस प्रेसिडेंट: देबेंद्र (पीएचडी, लिंग्विस्टिक्स)
जनरल सेक्रेटरी: श्रुति प्रिया (पीएचडी, इकोनॉमिक्स)
जॉइंट सेक्रेटरी: सौरभ शुक्ला (एमबीए)
कल्चरल सेक्रेटरी: वीनस (आईएमए, लैंग्वेज साइंसेज)
स्पोर्ट्स सेक्रेटरी: ज्वाला (पीएचडी, हिंदी)
कैंपस पर लेफ्ट और NSUI का साफ रिजेक्शन
ये जीत कैंपस पर लेफ्ट और NSUI जैसी ताकतों को पूरी तरह से ठुकराने का संकेत है। तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद, HCU के स्टूडेंट्स ने उन लोगों को नकार दिया, जो यूनिवर्सिटी को अपना निजी इलाका समझते थे। सालों से फैलाई जा रही झूठी बातें और नेगेटिव प्रोपगैंडा अब स्टूडेंट्स के बीच बिल्कुल फिट नहीं बैठती।
स्टूडेंट्स की ताकत और ABVP का जज्बा
जब देश की भावनाएं स्टूडेंट्स की चाहतों से जुड़ जाती हैं, तो स्टूडेंट पावर रुकने का नाम ही नहीं लेती। ये रिजल्ट ABVP के वर्कर्स की कड़ी मेहनत, ऑर्गनाइजेशन के स्मार्ट लीडर्स की स्ट्रैटेजी और सबसे ज्यादा HCU के स्टूडेंट्स के फैसले का नतीजा है। ये मंडेट उन लोगों को हिला देगा, जो कैंपस पर अराजकता, हिंसा और देश-विरोधी कहानियां फैलाने का शौक रखते हैं। आज के जेन जेड स्टूडेंट्स ने फिर साबित कर दिया कि वो खोखले नारे और बर्बादी वाली पॉलिटिक्स को साइड पर रख देते हैं। वो ABVP जैसे ऑर्गनाइजेशन पर भरोसा करते हैं, जो पढ़ाई को मजबूत करने, कल्चर को जिंदा रखने और देश बनाने पर फोकस करता है।
‘वोट चोरी’ वालों को करारा झटका
HCU के इस स्टूडेंट वोट ने एक बड़ा पॉलिटिकल मैसेज भी दिया है। ये उन तथाकथित युवा लीडर्स को जोरदार धक्का है, जो हमेशा ‘वोट चोरी’ का रोना रोते रहते हैं। उनके लिए ये राजनीतिक करियर खत्म करने वाली आखिरी कील साबित होगा।
ABVP नेशनल जनरल सेक्रेटरी का बयान
ABVP के नेशनल जनरल सेक्रेटरी डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, “ये जीत दिखाती है कि स्टूडेंट पावर कैसे लेफ्टिस्ट और खुदगर्ज ग्रुप्स की गुमराह करने वाली कहानियों को उखाड़ फेंक सकती है, जो यूनिवर्सिटीज को अपना निजी साम्राज्य समझते हैं। ये रिजल्ट ABVP एक्टिविस्ट्स की नॉन-स्टॉप मेहनत और युवा स्टूडेंट्स के मजबूत इरादों का सबूत है, जो देशभक्ति से भरे हैं। ये स्वीपिंग मंडेट एक बार फिर बताता है कि भारत का जेन जेड प्रोग्रेसिव, कंस्ट्रक्टिव है और देश बनाने को समर्पित, न कि अराजकता या देश-विरोधी एजेंडे को। पटना, असम, गुवाहाटी, उत्तराखंड, पंजाब और दिल्ली के बाद हैदराबाद यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रवादी विचारधारा के स्टूडेंट्स में उभार को और मजबूत किया, जिससे एंटी-नेशनल ग्रुप्स और खुद को लीडर बताने वालों के लिए राजनीतिक जगह ही खत्म हो गई।”
















