गत 10 सितंबर को नागपुर के मानकापुर स्थित स्टेडियम में ‘आर्ट आफ लिविंग’ द्वारा सोमनाथ ज्योतिर्लिंग महारुद्र पूजा का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत और प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु और ‘आर्ट आफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने ज्योतिर्लिंग की पूजा की।
इस अवसर पर श्री भागवत ने कहा कि देवभक्ति और देशभक्ति, ये दो शब्द भले ही अलग दिखते हों, लेकिन हमारे देश में ये शब्द अलग नहीं हैं। जो वास्तविक देवभक्ति करेगा, वह देश की भी भक्ति करेगा। और जो प्रामाणिकता से देशभक्ति करेगा, उससे भगवान देवभक्ति भी करवा लेंगे। उन्होंने कहा कि सबके अंदर जो एकतत्वता है, उसको जानने के 108 रास्ते हैं। सबको सिखाने वाले शिवजी हैं। मनुष्यों की प्रकृति अनेक प्रकार की है।
सबको एक ही रास्ता नहीं सुहाता। अलग-अलग रुचि के कारण अनेक प्रकार के रास्ते हैं, लेकिन जाना सभी को एक ही जगह है। यह जो नाना पथ हैं, इसके उद्गाता शिवजी हैं। उन्होंने कहा कि जीवन अपनेपन के आधार पर चलता है। आज इस अपनेपन के संबंधों को लेकर दुनिया तरस रही है, क्योंकि 2000 वर्ष से दुनिया जिस प्रभाव में चली, वह प्रभाव अधूरी बात पर आधारित है। उसको ये जोड़ने वाला ज्ञात नहीं, जो सबके अंदर है।
जो बलवान है वह जिएगा और जो दुर्बल है वह मरेगा, ऐसा मानकर दुनिया चल रही है। मनुष्यों का ज्ञान बढ़ा, विकास हुआ, लेकिन इसके बाद भी झगड़े चल रहे हैं। मनुष्यों में असंतोष आज भी बरकरार है। सुख-सुविधाएं बहुत हो गईं, पर संतोष नहीं है। उनको रास्ता नहीं मिल रहा है। रास्ता कहां है, यहीं है, शिवजी के पास।
उन्होंने कहा कि राम मनोहर लोहिया कहते थे कि भगवान राम उत्तर से दक्षिण को जोड़ते हैं। भगवान कृष्ण पूरब से पश्चिम को जोड़ने वाले हैं। लेकिन भगवान शिव भारत के कण-कण में हैं। श्री श्री रविशंकर ने कहा कि श्री भागवत जी के मार्गदर्शन में करोड़ों लोग देशभक्ति, धर्म की स्थापना में लगे हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 साल से देश की धरोहर और संस्कृति को बचाने का काम कर रहा है। वह यशस्वी भी हुआ है। संघ के लाखों स्वयंसेवक समाज के लिए समय दे रहे हैं। संघ का काम बढ़ते रहना चाहिए।

















