नई दिल्ली (हि.स.) । मैसूर के प्रसिद्ध दशहरा समारोह में बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में गैर-हिंदू की भागीदारी उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तैयारी
चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की गई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आश्वासन दिया कि इस पर सुनवाई की जाएगी। उच्चतम न्यायालय में 19 सितंबर को याचिका पर सुनवाई हो सकती है।
याचिकाकर्ता की दलीलें
याचिका एचएस गौरव ने दायर की है। उनका कहना है कि दूसरे धर्म के व्यक्ति के लिए हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होना उचित नहीं है। इनमें पवित्र दीप जलाना, देवी-देवता को फल-फूल अर्पित करना और वैदिक मंत्रों का जाप शामिल हैं। याचिकाकर्ता ने इस पर धार्मिक परंपराओं के सम्मान की बात उठाई है।
कर्नाटक हाई कोर्ट का पूर्व निर्णय
इससे पहले कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि दशहरा जैसे सार्वजनिक उत्सव में किसी गैर-हिंदू की भागीदारी किसी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करती। हाई कोर्ट ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और समावेशिता के अनुरूप माना।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अंतिम निर्णय देगा। यह फैसला न केवल मैसूर दशहरा समारोह बल्कि भविष्य में अन्य धार्मिक उत्सवों में गैर-हिंदू की भागीदारी के लिए भी दिशा-निर्देश तय कर सकता है। पूरे देश की नजर अब उच्चतम न्यायालय की सुनवाई पर टिकी है।















