हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में खजुराहो के प्रसिद्ध जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की मरम्मत को लेकर एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई की एक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि आप भगवान विष्णु के इतने बड़े भक्त हैं, तो उनसे ही प्रार्थना कीजिए। उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और कई लोगों ने इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बताया।
विश्व हिंदू परिषद का बयान- विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि न्यायालय न्याय का मंदिर है। भारतीय समाज की न्यायालयों में श्रद्धा और विश्वास है। हम सब का कर्तव्य है कि यह विश्वास ना सिर्फ बना रहे वरन और मजबूत हो। हम सब का यह भी कर्तव्य है कि अपनी वाणी में संयम रखें। विशेष तौर पर न्यायालय के अंदर। यह जिम्मेवारी मुकदमा लड़ने वालों की है, वकीलों की है और उतनी ही न्यायाधीशों की भी है। हमें लगता है कि मुख्य न्यायाधीश की मौखिक टिप्पणी ने हिन्दू धर्म की आस्थाओं का उपहास उड़ाया गया है। अच्छा होगा अगर इस तरह की टिप्पणी करने से बचा जाए।
बढ़ते विवाद के बीच मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने सफाई दी कि उनकी बात को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उनका इरादा किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने बताया कि उन्हें बाद में पता चला कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में वायरल किया जा रहा है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी न्यायाधीश का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वह पिछले 10 वर्षों से चीफ जस्टिस को जानते हैं और वे सभी धर्मों के स्थलों पर जाते हैं तथा सभी का सम्मान करते हैं। इसी तरह वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में इस तरह की आलोचनाओं का अक्सर सामना करना पड़ता है लेकिन किसी की छवि को गलत तरीके से पेश करना उचित नहीं है।












