अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में चारों सीटें जीतने जा रही है, ईवीएम को लेकर एनएसयूआई के आरोप निराधार हैं, यह उनकी संभावित हार की घबराहट है। एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि एनएसयूआई दिल्ली विश्वविद्यालय में एबीवीपी की लगातार बढ़ती लोकप्रियता से चिंतित है और लगातार एबीवीपी पर निराधार आरोप लगा रही है। इस बार एनएसयूआई डूसू चुनाव में दूसरे नहीं, बल्कि तीसरे स्थान के लिए प्रयासरत है।
एबीवीपी दिल्ली प्रदेश सचिव सार्थक शर्मा ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस हर चुनाव में हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहराती है, उसी तरह एनएसयूआई भी उसी पैटर्न पर चल रही है। संभावित हार को लेकर एनएसयूआई की हताशा और छात्रों के बीच उसकी अलोकप्रियता स्पष्ट है।
एबीवीपी के प्रत्याशी
एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार आर्यन मान, उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार गोविंद तंवर, सचिव पद के उम्मीदवार कुणाल चौधरी और संयुक्त सचिव पद की उम्मीदवार दीपिका झा हैं।
पत्तों पर नाम लिखकर पहुंचाया संदेश
इस वर्ष डूसू चुनाव प्रचार का स्वरूप खासा अनूठा रहा। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए एबीवीपी कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों ने प्रचार-प्रसार के नए तरीके अपनाए। उन्होंने पत्तों पर नाम लिखकर छात्रों तक संदेश पहुंचाया और डिजिटल माध्यमों का अधिकतम उपयोग किया। इंस्टाग्राम रील, फेसबुक लाइव, ‘एक्स’ पोस्ट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए चुनावी संदेश व्यापक स्तर तक पहुँचाया गया।

















