उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है। बिल्डरों ने सरकारी जमीन पर कब्जा करके उस पर अवैध रूप से कॉलोनी काट दी और प्लॉट बेच डाले। यह जमीन एंटी करप्शन थाने के लिए आवंटित की गई थी लेकिन बिल्डरों ने इस पर कॉलोनी बसा दी।
यह मामला मेरठ के मोदीपुरम क्षेत्र का है। यहां की पल्लवपुरम की मधुर एन्क्लेव कॉलोनी में वह जमीन थी, जिसे एंटी करप्शन थाने के लिए सरकार ने आरक्षित किया था। लेकिन बिल्डर कंपनियों मधुर इंफ्रा डेवलपर्स लिमिटेड और चंद्रपाल एसोसिएट्स के निदेशकों और पार्टनरों ने मिलकर लगभग 0.5060 हेक्टेयर जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया और वहां मधुर एन्क्लेव व पल्लव विहार कॉलोनी में प्लॉट काटकर बेच दिए। इस जमीन की कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
मुकदमा दर्ज- इस घोटाले की जानकारी सामने आने के बाद 18 जुलाई 2025 को लेखपाल हरवीर सिंह ने पल्लवपुरम थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मधुर इंफ्रा डेवलपर्स लिमिटेड के डायरेक्टर आशीष गुप्ता और आदित्य गुप्ता, साथ ही चंद्रपाल एसोसिएट्स के डायरेक्टर अंकुश कुमार और सिद्धार्थ पवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इनके साथ दोनों कंपनियों के अन्य पार्टनरों और कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है। जांच के दौरान पुलिस को इस घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत मिले, जिसके आधार पर आरोपियों की धरपकड़ के लिए एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की टीम को लगाया गया।
गिरफ्तारी और फरार आरोपी- एसओजी की टीम ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अंकुश कुमार, चंद्रपाल एसोसिएट्स का डायरेक्टर, अजय चौधरी, पुत्र ब्रह्मसिंह, निवासी दबथुवा। बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीम देर रात तक दबिश देती रही लेकिन खबर है कि कार्रवाई की सूचना लीक हो गई, जिसके चलते बाकी आरोपी फरार हो गए। एसओजी की टीम ने इस घोटाले से जुड़े कई दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं। अब इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि और भी साक्ष्य जुटाए जा सकें। पुलिस और प्रशासन की कोशिश है कि इस मामले में शामिल सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाए।

















