ओडिशा पुलिस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी फाउंडेशन से उसके वित्तीय लेनदेन के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। पुलिस ने फाउंडेशन से 1991 में इसकी स्थापना के बाद से प्राप्त सभी विदेशी फंडिंग का विवरण देने को कहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारसुगुड़ा के उपविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) और मामले के जांच अधिकारी उमाशंकर सिंह ने तीन सितंबर को आरजीएफ निदेशक संदीप आनंद को लिखे पत्र में जून 1991 से प्राप्त विदेशी अंशदान का वर्षवार ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। इसके अलावा पुलिस ने उन बैंकों की भी जानकारी मांगी है, जिनमें यह राशि जमा की गई, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं का विवरण, उनके नाम, पते, उम्र, माता-पिता के नाम और मोबाइल नंबर भी साझा करने का निर्देश दिया गया है।
यह कार्रवाई इस वर्ष 7 फरवरी को झारसुगुडा पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ी है। यह शिकायत स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पदाधिकारी रामहरि पुजारी ने दर्ज कराई थी। आरोप है कि 15 जनवरी को नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के उद्घाटन समारोह में दिए गए भाषण के दौरान राहुल गांधी ने ऐसे बयान दिए जो “भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरा” पहुंचाते हैं। अपने संबोधन में राहुल ने कहा था कि “हम अब भाजपा, आरएसएस और स्वयं भारतीय स्टेट से लड़ रहे हैं”, साथ ही यह भी आरोप लगाया था कि भाजपा और आरएसएस ने राष्ट्रीय संस्थानों पर कब्जा कर लिया है।
पुलिस के पत्र में फाउंडेशन से उसका विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस, लेखा परीक्षकों की जानकारी और वित्तीय लेन-देन के पूरे ब्योरे की भी मांग की गई है। इसके अलावा जांच अधिकारियों ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2011 में विवादास्पद इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक से फाउंडेशन ने दान प्राप्त किया था और इसे चीनी सरकार से भी भारी फंडिंग मिली थी। पुलिस ने फाउंडेशन से ऐसे चंदों के उद्देश्य स्पष्ट करने और उनके उपयोग का ब्यौरा देने को कहा है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग/UPA) सरकार के दौरान वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री राहत कोष से धनराशि को राजीव गांधी फाउंडेशन की ओर मोड़ा गया। पुलिस ने निर्देश दिया है कि यदि ये आरोप सही हैं तो दान प्राप्त करने के कारण और उसके उपयोग का पूरा स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाए।
फाउंडेशन को 4 नवंबर तक सभी मांगी गई जानकारियां प्रस्तुत करने का समय दिया गया है। इसके साथ ही फाउंडेशन के वित्त निदेशक को व्यक्तिगत रूप से पूछताछ में शामिल होने का भी नोटिस दिया गया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 210 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जो पहले से दर्ज धाराओं के अतिरिक्त होगी।
गौरतलब है कि राहुल गांधी फाउंडेशन के ट्रस्टी और कार्यकारी समिति के सदस्य हैं। शिकायतकर्ता रमा हरि पुजारी ने भाजपा, आरएसएस और संबद्ध संगठनों की ओर से आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर “राष्ट्रविरोधी बयान” दिए, जिसने “हर भारतीय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई”। इसके आधार पर झारसुगुड़ा पुलिस ने उनके खिलाफ BNSS की धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य) तथा धारा 197(1)(d) (जन-विघटनकारी बयान) के तहत मामला दर्ज किया।

















