बांग्लादेश में चुनावों की आहट होने लगी है। चुनावों को लेकर तमाम तैयारियां भी की जा रही हैं। और अब वहाँ के चुनाव आयुक्त ब्रिगेडियर जनरल (सेवा निवृत्त) अबुल फजल मोहम्मद सनाउल्ला ने यह आश्वासन दिया है कि वहाँ का चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि बांग्लादेश में अब मतदाता रहित और एजेंट रहित चुनाव कभी नहीं होंगे।
चुनाव आयोग की जिम्मेदारी और सुधार
मीडिया के अनुसार सनाउल्ला ने कहा कि जिला चुनाव अधिकारियों के पास पोलिंग स्टेशन बनाने की जिम्मेदारी होगी और साथ ही ऑनलाइन नॉमिनेशन सबमिशन के लिए प्रावधानों को आरपीओ से हटा दिया गया है। इसके साथ ही उन्होनें चुनावी प्रतीकों पर भी बात की। उन्होनें कहा कि अगर किसी भी राजनीतिक दल की गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया है, तो साथ ही उसके चुनावी प्रतीकों को भी निलंबित कर दिया जेआगा और उन्हें चुनावों में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही सेकुरिटी डिपाज़ट को भी 20,000 टका से बढ़ाकर 50,000 टका कर दिया गया है।
हिंसा की घटनाओं के बीच चुनावी तैयारियां
चुनावों को लेकर तमाम सुधार वहाँ पर किये जाने का दावा किया जा रहा है। मगर चुनावों की तैयारियों के बीच भी बांग्लादेश में आए दिन हिंसा की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इन घटनाओं में अल्पसंख्यकों पर और साथ ही अवामी लीग के सहयोगी दलों के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं।
सूफी दरवेश नूरा पगला की कब्र पर हमला
शुक्रवार को ही दो घटनाएं सामने आ गाईं। बांग्लादेश में शुक्रवार को एक कट्टरपंथी भीड़ ने सूफी दरवेश नूरा पगला की कब्र को निशाना बनाया। नूरा की मौत दो हफ्ते पहले हुई थी। हमलावरों ने नूरा की कब्र को खोदकर शव को बाहर निकाला और आग लगा दी। उसके साथ ही उन्होनें दरगाह मे भी तोडफोड की। नूरा के अनुनायियों और कट्टरपंथी भीड़ के बीच हिंसक झड़प भी हुई और जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और साथ ही 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
जातीय पार्टी कार्यालय पर हमला
एक और घटना में हिंसक भीड़ ने ढाका के पुराना पलटन क्षेत्र में जातीय पार्टी नामक राजनीतिक दल के केन्द्रीय कार्यालय में आग लगा दी। यह पार्टी शेख हसीना की अवामी लीग की सहयोगी पार्टी है। दरअसल एक हफ्ते पहले गोनो अधिकार परिषद के नेता नुरुल हक नूर पर हमला हुआ था और नुरूल हक ने शेख हसीना के खिलाफ हुए कथित विद्रोह में शेख हसीना के विरोध में भाग लिया था। पिछले हफ्ते ही पुलिस और सेना ने मिलकर गोनो अधिकार परिषद के कार्यकर्ताओं को तितर बितर करने के लिए लाठी का प्रयोग किया था। इस कार्यवाही को लेकर गोनो परिषद के लोग और यूनुस सरकार दोनों ही खफा थी। और अब जातीय पार्टी पर के कार्यालय पर हुए हमले को लेकर गोनो परिषद के लोगों पर ही संदेह व्यक्त किया जा रहा है, जबकि गोनो परिषद का कहना है कि उनका हाथ नहीं है। हालांकि जातीय पार्टी चूंकि अवामी लीग के साथ थी और इस प्रकार से गोनो परिषद के अनुसार वह कथित जीनोसाइड का भी हिस्सा थी, जो शेख हसीना ने करवाया था। और गोनो परिषद के राशिद का कहना है ई अगर सरकार ने जातीय पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया होता और उसके चेयरमैन जी एम कादर को गिरफ्तार किया होता, तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।
बीएनपी का आरोप
वहीं बीएनपी ने कहा कि भारत में अवामी लीग के नेता रह रहे हैं और वहाँ से बैठकर वे बांग्लादेश को अस्थिर करने का षड्यन्त्र कर रहे हैं। बीएनपी के वरिष्ठ नेता जैनउल अबदीन ने कहा कि बांग्लादेश में कुछ लोग इन नेताओं के साथ मिलकर अंतरिम सरकार के अंतर्गत होने वाले चुनावों को रोकने के लिए कार्य कर रहे हैं।

















