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प्रदर्शनों और हिंसा की आग में झुलसा दुनिया का सबसे बड़ा इस्लामिक मुल्क इंडोनेशिया, क्या है कारण?

इंडोनेशिया में सांसदों के मोटे हाउसिंग भत्ते के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन फैल गए हैं। राष्ट्रपति प्रबोवो ने भत्ते रद्द किए, लेकिन तनाव और हिंसा जारी है। जकार्ता से लेकर अन्य शहरों में जनता सड़कों पर है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह — edited by कुलदीप सिंह
Sep 1, 2025, 06:45 am IST
in विश्व
Indoneshia Protest violence

इंडोनेशिया में प्रदर्शनकारियों ने फूंकी पुलिस बिल्डिंग (फोटो साभार: द गॉर्जियन)

इंडोनेशिया में पिछले कुछ दिनों से सड़कों पर गुस्सा फूट रहा है। लोग सांसदों को मिलने वाले मोटे भत्तों और विशेषाधिकारों से नाराज़ हैं। इस गुस्से को देखते हुए राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने सांसदों का 3,000 डॉलर का मासिक हाउसिंग भत्ता रद्द करने का ऐलान किया। यह फैसला तब आया, जब हिंसक प्रदर्शनों में छह लोगों की मौत हो गई। जकार्ता से लेकर कई शहरों में लोग सड़कों पर हैं, और माहौल तनावपूर्ण है।

प्रदर्शनों और हिंसा

सोमवार से शुरू हुए ये प्रदर्शन जकार्ता, योग्याकार्ता, बांडुंग और सुराबाया तक फैल गए। लोग सांसदों को मिलने वाले 50 मिलियन रुपिया (लगभग 3,000 डॉलर) के हाउसिंग भत्ते से खफा हैं, जो जकार्ता के न्यूनतम वेतन से 10 गुना ज्यादा है। देश में महंगाई और बेरोजगारी ने पहले ही लोगों का जीना मुश्किल किया हुआ है, और ये भत्ता आग में घी का काम कर रहा था। गुरुवार को जकार्ता में हालात तब और बिगड़ गए, जब 21 साल के राइड-हेलिंग ड्राइवर अफन कुरनियावान की पुलिस के बख्तरबंद वाहन से कुचलकर मौत हो गई। अफन प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे, बस खाना डिलीवर करने जा रहे थे। उनकी मौत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने जनता का गुस्सा और भड़का दिया।

प्रबोवो का फैसला

रविवार को जकार्ता में प्रबोवो ने आठ राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने सांसदों के हाउसिंग भत्ते और विदेश यात्राओं पर रोक लगाने का वादा किया। प्रबोवो ने कहा कि सोमवार तक ये बदलाव लागू हो जाएंगे। लेकिन उन्होंने हिंसा पर सख्त रुख भी दिखाया, यह कहते हुए कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या लूटपाट करने वालों के खिलाफ सेना और पुलिस कड़ी कार्रवाई करेंगे। कुछ प्रदर्शनों को उन्होंने “देशद्रोह और आतंकवाद” की ओर बढ़ता हुआ बताया, जिससे विवाद और बढ़ गया।

पुलिस की कार्रवाई और हिंसा की घटनाएं

अफन की मौत के बाद सात पुलिस अधिकारियों को जांच के लिए हिरासत में लिया गया। प्रबोवो ने अफन के परिवार से मुलाकात कर सहायता का वादा किया। लेकिन गुस्सा थम नहीं रहा। मकassar में प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन को आग लगा दी, जिसमें तीन सरकारी कर्मचारी मारे गए। एक अन्य व्यक्ति को भीड़ ने खुफिया एजेंट समझकर पीट-पीटकर मार डाला। ये घटनाएं तनाव को और बढ़ा रही हैं।

आर्थिक और सामाजिक कारण

प्रदर्शन सिर्फ भत्तों के खिलाफ नहीं हैं। लोग प्रबोवो की नीतियों, जैसे बजट कटौती और सैन्य विस्तार, से भी नाखुश हैं। प्रबोवो ने 100 नए सैन्य बटालियन बनाए हैं, जिसे कुछ लोग सत्तावादी शासन की वापसी मान रहे हैं। महंगाई और बेरोजगारी ने जनता का गुस्सा और बढ़ा दिया है।

Topics: इंडोनेशिया प्रदर्शनसांसद भत्तेप्रबोवो सुबियांतोजकार्ता हिंसाहाउसिंग भत्ताIndonesia protestsMP allowancesPrabowo SubiantoJakarta violencehousing allowance
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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