प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन पहुंचे हैं। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए वो तियानजिन शहर में हैं। इस दौरे का सबसे खास पल था उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय मुलाकात। ये मुलाकात 31 अगस्त 2025 को हुई, जो करीब 40 मिनट तक चली। दोनों नेताओं की ये दूसरी मुलाकात थी, जो पिछले दस महीनों में हुई। इससे पहले दोनों ब्रिक्स 2024 सम्मेलन में रूस के कजान में मिले थे। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं, क्योंकि भारत और चीन के रिश्तों में हाल के सालों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं।
सीमा पर शांति और सहयोग पर जोर
मोदी और शी जिनपिंग की बातचीत का मुख्य फोकस था भारत-चीन सीमा पर शांति और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन मिलकर काम करें तो ये न सिर्फ दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण का रास्ता भी खोलेगा। मोदी ने कहा, “हम अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” इसके अलावा, उन्होंने चीन को SCO की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई भी दी।
दोनों देशों के बीच फिर शुरू होंगी उड़ानें
बातचीत के दौरान एक अहम फैसला लिया गया कि भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू की जाएंगी। ये कदम दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ाने में मदद करेगा। इसके साथ ही, कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी फिर से शुरू करने पर सहमति बनी। ये फैसले दिखाते हैं कि दोनों देश पुराने तनावों को पीछे छोड़कर रिश्तों को नई दिशा देना चाहते हैं।
ड्रैगन और हाथी का साथ जरूरी
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इस मुलाकात में सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन दुनिया के दो सबसे बड़े और सभ्य देश हैं। दोनों देश ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं और वैश्विक बदलावों के दौर में उनके रिश्तों को रणनीतिक और लंबे समय के दृष्टिकोण से देखना होगा। शी ने कहा, “ड्रैगन और हाथी का साथ आना बेहद जरूरी है।” ये बयान भारत-चीन रिश्तों की अहमियत को दर्शाता है, खासकर तब जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल मची है।
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SCO समिट का मंच और वैश्विक संदर्भ
SCO समिट में हिस्सा लेने के लिए तियानजिन में 20 से ज्यादा देशों के नेता जुटे हैं। ये समिट 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगी। इस दौरान मोदी न सिर्फ शी जिनपिंग, बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। ये मुलाकातें इसलिए भी अहम हैं, क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50% तक टैरिफ लगा दिए हैं। ये टैरिफ भारत के रूस से तेल खरीदने और अन्य निर्यातों को लेकर लगाए गए हैं। ऐसे में भारत, चीन और रूस के बीच सहयोग वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अहम हो सकता है।
मोदी की जापान यात्रा और तियानजिन में गर्मजोशी से स्वागत
चीन आने से पहले पीएम मोदी जापान में थे, जहां उन्होंने जापानी पीएम शिगेरु इशिबा के साथ कई मुद्दों पर चर्चा की। तियानजिन पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
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2020 के गलवान संघर्ष के बाद रिश्तों में सुधार
2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के बाद भारत-चीन रिश्ते तनावपूर्ण रहे थे। लेकिन हाल के कूटनीतिक प्रयासों से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की कोशिशें दिख रही हैं। व्यापार के मोर्चे पर भी चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा साझेदार बना हुआ है।

















