अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा दुनियाभर के देशों पर मनमाने तरीके से टैरिफ थोपने के मामले में देश के फेडरल कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। 29 अगस्त 2025 को वाशिंगटन डीसी की एक फेडरल अपील कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने अपनी ज्यादातर वैश्विक टैरिफ नीतियों के साथ राष्ट्रपति के अधिकारों का दुरुपयोग किया है। हालांकि कोर्ट ने इन टैरिफ को तुरंत हटाने के बजाय 14 अक्टूबर तक लागू रहने दिया, ताकि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।
टैरिफ क्या हैं और क्यों लगाए गए?
टैरिफ एक तरह का कर है, जो विदेशी सामान पर आयात के समय लगाया जाता है। ट्रंप ने अप्रैल 2025 में “लिबरेशन डे” टैरिफ की घोषणा की थी, जिसमें लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर 10% का बेसलाइन टैरिफ और कुछ देशों पर “पारस्परिक” (reciprocal) टैरिफ लगाए गए। इनका मकसद था अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना। इसके अलावा, फरवरी में ट्रंप ने चीन, कनाडा और मैक्सिको पर अलग से टैरिफ लगाए, जिन्हें उन्होंने “ट्रैफिकिंग टैरिफ” कहा। इनका दावा था कि ये देश अवैध ड्रग्स, खासकर फेंटानिल, और गैर-कानूनी आव्रजन को रोकने में नाकाम रहे। ट्रंप ने इन टैरिफ को इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लागू किया, जो राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल में कुछ आर्थिक कदम उठाने की शक्ति देता है।
कोर्ट ने क्या कहा?
अपील कोर्ट ने 7-4 के फैसले में कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को कई तरह की शक्तियां देता है, लेकिन इसमें टैरिफ लगाने की शक्ति स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है। कोर्ट ने बताया कि अमेरिकी संविधान के मुताबिक, टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस को है। ट्रंप के टैरिफ को कोर्ट ने “असीमित दायरे, मात्रा और अवधि” वाला बताया, जो कानून की सीमाओं से परे है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब कांग्रेस टैरिफ लगाने की शक्ति देती है, तो वह साफ शब्दों में ऐसा करती है, जैसे कि कुछ अन्य कानूनों में। लेकिन IEEPA में “टैरिफ” या “टैक्स” जैसे शब्दों का जिक्र तक नहीं है। इस वजह से ट्रंप का इस कानून का इस्तेमाल गलत माना गया।
ट्रंप का जवाब और अगला कदम
फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसे “राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण” बताया और दावा किया कि अगर ये टैरिफ हटाए गए, तो “यह अमेरिका के लिए विनाशकारी होगा।” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में अपने पक्ष में फैसला आने की उम्मीद जताई। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए टैरिफ लगाए, और वे सुप्रीम कोर्ट में जीत की उम्मीद करते हैं। कोर्ट ने टैरिफ को 14 अक्टूबर तक लागू रहने दिया, ताकि प्रशासन अपील कर सके।
कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि
यह मामला मई में न्यूयॉर्क की यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में शुरू हुआ था, जहां VOS सिलेक्शंस इंक बनाम ट्रंप केस में ट्रंप के टैरिफ को गैर-कानूनी ठहराया गया। अपील कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा। इस केस में छोटे व्यवसायों और 12 डेमोक्रेटिक-नियंत्रित राज्यों ने ट्रंप के टैरिफ को चुनौती दी थी, जिनका कहना था कि ये टैरिफ उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रंप के टैरिफ “मेजर क्वेश्चन्स डॉक्ट्रिन” के खिलाफ हैं, जो कहता है कि बड़े आर्थिक फैसलों के लिए कांग्रेस की साफ अनुमति जरूरी है।















