पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हुए सांप्रदायिक दंगे को लेकर बनाई गई जांच कमेटी ने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 450 पन्नों की रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे किए गए हैं जो न केवल दंगे के कारणों पर प्रकाश डालते हैं, बल्कि संभल में पिछले कुछ दशकों में हुए सामाजिक और जनसंख्या संबंधी बदलावों की भी जानकारी देते हैं।
हिंदू आबादी में भारी गिरावट- रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्रता के समय यानी वर्ष 1947 में संभल में हिंदू आबादी लगभग 45% थी। लेकिन अब यह घटकर केवल 15% रह गई है। रिपोर्ट का कहना है कि दंगों, तुष्टिकरण की राजनीति और योजनाबद्ध हिंसा ने संभल की जनसंख्या संरचना (डेमोग्राफी) को पूरी तरह बदल दिया है। यह गिरावट सामान्य जनसंख्या परिवर्तन नहीं बल्कि सांप्रदायिक दबाव, पलायन और असुरक्षा की भावना का परिणाम है।
दंगों का इतिहास और आपराधिक गतिविधियाँ- जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि आज़ादी के बाद संभल में कुल 15 सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं। इसके अलावा, यह भी उल्लेख किया गया है कि संभल कई आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। अमेरिका ने मौलाना सनाउल हक को आतंकवादी घोषित किया है, जो इसी क्षेत्र से जुड़े हैं। संभल में अवैध हथियारों और नारकोटिक्स से जुड़े गिरोह भी सक्रिय हैं, जिससे क्षेत्र में अपराध और असुरक्षा बढ़ी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 22 नवम्बर 2024 को हुए एक विवादित भाषण ने इस दंगे की नींव रखी। यह भाषण स्थानीय सांसद जिया-उर-रहमान बर्क ने दिया था। उन्होंने नमाजियों को संबोधित करते हुए कहा, “हम इस देश के मालिक हैं, नौकर-गुलाम नहीं। मस्जिद थी, मस्जिद है और कयामत तक रहेगी। अयोध्या जैसा यहां नहीं होने देंगे।” इस बयान के बाद साम्प्रदायिक तनाव तेजी से बढ़ा और 24 नवम्बर को तुर्क और पठान समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष भड़क उठा। इस संघर्ष में 4 लोगों की मृत्यु हुई।
दंगे की योजना और षड्यंत्र- जांच रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि हिंदुओं को निशाना बनाने की एक पूर्व नियोजित योजना थी। दंगे के लिए बाहरी उपद्रवियों को बुलाया गया था। हिंदू मोहल्लों में पुलिस की समय पर मौजूदगी के कारण बड़ी जनहानि टल गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तुर्क पठानों के बीच आपसी रंजिश भी दंगे का एक कारण बनी, लेकिन सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश जानबूझकर की गई।
मुख्य आरोपी और भूमिका- रिपोर्ट में साफ तौर पर तीन प्रमुख लोगों को इस षड्यंत्र का मास्टरमाइंड बताया गया है- सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, उनके विवादित भाषण ने माहौल को भड़काया। विधायक के पुत्र सुहैल इकबाल, जिन पर हिंसा को प्रायोजित करने का आरोप है। इंतेजामिया कमेटी के पदाधिकारी, जिनकी भूमिका भी इस दंगे की योजना में संदिग्ध बताई गई है। इन सभी लोगों पर हिंसा को भड़काने, उपद्रवियों को समर्थन देने और समाज में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया गया है।














