जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने न सिर्फ सड़कों और रेल सेवाओं को ठप कर दिया, बल्कि अब तक 41 लोगों की मौत भी हो चुकी है। रियासी जिले में माता वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते पर हुए भूस्खलन और डोडा में बादल फटने की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, और प्रशासन राहत-बचाव कार्यों में दिन-रात जुटा है।
वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन, कई श्रद्धालु हताहत
रियासी जिले में माता वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते पर अर्धकुमारी के पास इंद्रप्रस्थ भोजनालय के आसपास मंगलवार दोपहर को भूस्खलन हुआ। इस हादसे में कम से कम 41 लोगों की मौत हो चुकी है, और कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। यह भूस्खलन इतना भयानक था कि बड़े-बड़े पत्थर और मलबा रास्ते पर आ गिरा, जिससे कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने तत्काल यात्रा को रोक दिया और श्रद्धालुओं से मौसम ठीक होने तक यात्रा टालने की अपील की है। बोर्ड ने हेल्पलाइन नंबर (+91 9906019460, +91 9906019446, +91 9103491554) भी जारी किए हैं, ताकि लोग अपडेट ले सकें। बचाव कार्यों में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवक जुटे हैं, जो मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
डोडा में बादल फटने से तबाही
डोडा जिले में मंगलवार को बादल फटने की घटना ने हालात को और बिगाड़ दिया। इस बादल फटने से अचानक आई बाढ़ ने कई घरों को बहा दिया और सड़कों को क्षतिग्रस्त कर दिया। डोडा के डिप्टी कमिश्नर हरविंदर सिंह ने बताया कि तेज बहाव में तीन लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों जैसे डोडा कम्युनिटी हॉल में पहुंचाया गया है। भद्रवाह इलाके में नीरू नाले में बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया। जम्मू-श्रीनगर और किश्तवाड़-डोडा राजमार्ग भी बंद हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप है।
जम्मू में बाढ़ ने मचाया हाहाकार
जम्मू शहर में तवी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिसके चलते निचले इलाकों में बाढ़ आ गई। पिछले 24 घंटों में जम्मू में 296 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो पिछले 100 सालों में सबसे ज्यादा है। कठुआ, सांबा, और रियासी जैसे जिलों में भी नदियां उफान पर हैं। रावी और चिनाब नदियों ने कई गांवों को जलमग्न कर दिया है। जम्मू-पठानकोट राजमार्ग पर एक पुल के क्षतिग्रस्त होने से यातायात बाधित है। प्रशासन ने 3,500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है, और राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई और मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं।
प्रशासन और सरकार का राहत कार्य
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से बात की। पीएम मोदी ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। अब्दुल्ला ने जम्मू में प्रभावित इलाकों का दौरा किया और अधिकारियों को आपातकालीन कार्यों के लिए अतिरिक्त फंड देने के निर्देश दिए। भारतीय सेना ने भी कई स्थानों पर हेलीकॉप्टर और राहत दलों को तैनात किया है। कठुआ में रंजीत सागर बांध के सभी गेट खोल दिए गए, जिससे बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने जम्मू संभाग में अगले 40 घंटों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। लोगों से नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। जम्मू में रात के समय लोगों की आवाजाही पर भी पाबंदी लगा दी गई है।

















