राहुल गांधी के बिहार में वोट अधिकार यात्रा में पहले बिहार के सहयोगी दल राजद, विकासशील इंसान पार्टी, भाकपा माले जैसे दल शामिल हुए। मगर अब इसमें उनके राष्ट्रीय स्तर के सहयोगी दल जैसे तमिलनाडु की द्रमुक भी शामिल हो गई हैं। द्रमुक के प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन और उनकी बहन कनिमोझी भी इस यात्रा में शामिल हुई हैं। जैसे-जैसे यह यात्रा आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे राहुल गांधी का बिहार और बिहारियों के प्रति अपमान का असल रूप भी सामने आता जा रहा है। बिहार और बिहारियों के प्रति अपमान करने वाले नेताओं के साथ राहुल गांधी और उनके पार्टी का काफी नजदीक और सन्निकट सम्बन्ध लम्बे समय से रहा है। राहुल गांधी के अनेक राजनीतिक दोस्तों का नाम इस तालिका में शामिल है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन, उनके पार्टी के तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, स्टालिन के पार्टी के वरिष्ठ नेता और उनके सम्बन्धी दयानिधि मारन, उद्धव ठाकरे, चरणजीत सिंह चन्नी जैसे कई नाम इस फेहरिस्त में शामिल हैं।
बिहारियों का अपमान करने वाले बिहार में ही राहुल-तेजस्वी के लिए मांग रहे वोट
बिहार का दुर्भाग्य है कि हमारे देश के अन्य राज्यों के नेतागण, जिन्होंने अपने-अपने राज्यों में बिहारियों को अपमानित किया और बिहारियों को राज्य छोड़कर जाने के लिए मजबूर किया वह नेतागण बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के लिए वोट मांग रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर में राहुल गांधी के साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और उनकी बहन कनिमोझी यात्रा में शामिल हुए और जनता से राहुल गांधी के पक्ष में समर्थन माँगा।
स्टालिन, दयानिधि मारन और रेवंत रेड्डी कांग्रेस के लिए कर रहे प्रचार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन अक्सर हिंदी भाषी लोगों का विरोध करने का इतिहास रहा है। वहीं स्टालिन के नजदीकी सम्बन्धी और पार्टी के वरिष्ठ नेता दयानिधि मारन ने बिहार के लोगों के बारे में आपत्तिजनक बयान दिया था। दयानिधि मारन ने कहा था कि बिहार के हिंदी भाषी लोग तमिलनाडु में घर बनाते हैं, और टॉयलेट साफ करते हैं। 26 अगस्त को कांग्रेस नेता और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बिहार के सुपौल में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ यात्रा में शरीक हुए थे। रेवंत रेड्डी ने भी बिहारियों का अपमान यह कहकर किया था कि तेलंगाना का डीएनए बिहारियों के डीएनए से अच्छा है। रेड्डी के अनुसार मजदूरी करना बिहार के लोगों के डीएनए में है।
अब बिहार कांग्रेस-आरजेडी से मांग रहा जबाव
बिहार की जनता कांग्रेस से सवाल पूछ रही है कि जब तमिलनाडु में बिहार के लोगों के साथ मारपीट की जा रही थी, उस समय कांग्रेस क्या कर रही थी। बिहार और बिहारियों के खिलाफ बोलने वाले नेताओं की फेहरिस्त में राहुल गांधी के सहयोगी उद्धव ठाकरे भी हैं। उद्धव ठाकरे की पार्टी की राजनीति उत्तर भारतीयों के विरोध पर टिकी है। आजकल मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एकजुट होकर गैर–मराठी लोगों के खिलाफ लगातार बयान दे रहे है। यह भी आश्चर्यजनक है कि जब तक उद्धव और राज ठाकरे भाजपा के सहयोगी थे तब तक इस तरह के बयान नहीं देते थे।
कांग्रेस पार्टी के सिर्फ सहयोगी ही नहीं वरन पार्टी के नेता भी बिहारियों का अपमान करने से नहीं चूकते हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बिहार के लोगों का मजाक उड़ाया था। आश्चर्यजनक तौर पर जब चरणजीत सिंह चन्नी बिहारियों का अपमान कर रहे थे, उस समय प्रियंका गांधी वाड्रा उनके साथ खड़ी होकर हंस रही थीं और खुशी से तालियां बजा रही थीं।
दिन ब दिन गिरता जा रहा राहुल गांधी का स्तर
बिहारियों पर विवादित बयान देने वाले नेताओं के साथ चुनाव प्रचार करने पर भाजपा ने राहुल गांधी पर हमला किया है। राहुल गांधी के सहयोगी और उनकी पार्टी के नेता लगातार बिहारियों के बारे में आपत्तिजनक बयान देते रहे हैं। राहुल गांधी के भाषण का स्तर भी दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। एक स्वस्थ राजनीति के लिए जरूरी है कि नेता अपनी भाषा में मर्यादा रखें और भाषण के दौरान देश की संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करें। राहुल गांधी ने स्टालिन के साथ बिहार में अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया, वह देश के करोड़ों लोगों को गुस्सा दिलाने वाला है।
कांग्रेस-आरजेडी का महागठबंधन इंडि गठबंधन बना
बिहार में कांग्रेस पार्टी की यह यात्रा पहले महागठबंधन की यात्रा बनी और अब यह यात्रा इंडि गठबंधन की यात्रा में परिवर्तित हो गई है। मगर इसमें कुछ ख़ास बातें गायब हैं। उनमें ममता बनर्जी और केजरीवाल का इस यात्रा से किनारा करना। ममता बनर्जी इस यात्रा के प्रति पूरी तरह उदासीन हैं। ममता बनर्जी का किनारा करना इस गठबंधन के लिए समस्या खड़ी कर सकता है। ममता बनर्जी अपने राज्य की सीमा से सटे मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल क्षेत्र में अपने उम्मीदवार खड़े करके इस गठबंधन के लिए समस्या खड़ी कर सकती हैं। ममता बनर्जी यह भी सोच सकती हैं कि कांग्रेस उनके खिलाफ अगले 2026 के विधानसभा चुनाव में कम्युनिस्ट दलों के साथ उनको टक्कर देगा। अतएव वो इसका रास्ता रोकने का प्रयास कर सकती हैं। कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल में अपने सबसे बड़े नेता अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से बच रही है, जबकि चौधरी ममता बनर्जी के खिलाफ राजनितिक विषवमन करने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
केरल के सीएम ने भी कांग्रेस-आरजेडी से किया किनारा
इतना ही नहीं बल्कि केरल के सीएम विजयन इस रैली में शामिल नहीं हो रहे हैं। विजयन को भी पता है कि अगर वो इस यात्रा में शामिल हो जाते हैं तो उनका और गाँधी परिवार का आपसी गठजोड़ सबके सामने आ जाएगा। इस तथ्य के स्पष्ट प्रमाण है कि विजयन और गांधी परिवारों में राजनीतिक सांठगांठ है। इस साठगांठ में गांधी परिवार को वायनाड लोकसभा की सीट और केरल से ज्यादा लोकसभा की सीट जीतना है। राहुल गांधी द्वारा रायबरेली और वायनाड लोकसभा दोनों सीटों से चुनाव जीतने के बाद बिना किसी विशेष सोच के गांधी परिवार ने वायनाड की सीट को प्रियंका के लिए खाली किया, जबकि इस परिवार के लिए रायबरेली ज्यादा पारंपरिक सीट थी। गांधी परिवार के विश्वस्त ओमान चांडी के निधन के बाद गांधी परिवार का केरल की राजनीति में केवल अधिक लोकसभा की सीट जीतने और वायनाड की सीट को बनाये रखने भर से रह गया है।
इस साठगांठ के तहत अगले वर्ष 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी कमजोरी से चुनाव लड़कर पी विजयन को मुख्यमंत्री बने रहने में मदद करेगी, जैसा कि कांग्रेस पार्टी ने विगत 2021 के विधानसभा के चुनाव में किया था। कई अन्य तथ्य भी हैं जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों परिवारों के बीच आपसी सांठगांठ है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 96 विधानसभा की सीटों पर बढ़त बनाई थी, वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 84 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की थी। मगर 2021 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस महज 21 सीट ही जीत सकी थी। लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में इतना अंतर काफी आश्चर्यजनक है।
केरल में 60 ऐसी विधानसभा के सीटें हैं जिन पर एलडीएफ ने 2021 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, जबकि 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस/यूडीएफ ने बढ़त हासिल किया था। इन 60 विधानसभा का यह आकड़ा दर्शाता है कि कांग्रेस विधानसभा का चुनाव कमजोरी से लड़कर विजयन को मदद करती है। वहीं लोकसभा चुनाव में विजयन कमजोरी से लड़कर कांग्रेस पार्टी नीत यूडीएफ को।
पी विजयन को केंद्र की राजनीति में कोई व्यक्तिगत दावा नहीं बनता हैं और उनका एकमात्र लक्ष्य अपने दामाद मोहम्मद रियास जो वर्तमान में उनके मंत्रिमंडल में पर्यटन मंत्री है, को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाना है। वहीं सोनिया गांधी को अपनी संतानों को राजनीति में आगे बढ़ाना है। अब उनकी पारिवारिक सीट अमेठी और राय बरेली सुरक्षित नहीं रही अतएव केरल की वायनाड लोकसभा की सीट उनके लिए अब राजनितिक वजूद बनाये रखने के लिए अनिवार्य हो गई है।
(डिस्क्लेमर! ये लेखक के स्वयं के विचार हैं। आवश्यक नहीं कि पाञ्चजन्य उनसे सहमत हो)

















