नई दिल्ली: नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित हो रहे संघ के तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के पहले दिन मंगलवार को सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस के बारे में चर्चा परसेप्शन के आधार पर नहीं, फेक्ट्स के आधार पर हो। उन्होंने कहा कि संघ चलाना है, ऐसा नहीं है बल्कि संघ को चलाने का एक उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि संघ के चलने का प्रयोजन भारत है। संघ की सार्थकता भारत के विश्व गुरु बनने में है। आइए सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत के पहले दिन के व्याख्यान की बीस बड़ी बातें जानते हैं।
1-संघ बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं है, बल्कि स्वयंसेवकों के व्यक्तिगत समर्पण पर चलता है।
2-हमारा प्रयास होता है विचार, संस्कार और आचार ठीक रहे। स्वयंसवेक की इतनी ही चिंता करनी है।
3-संघ के निर्मिति, संघ के चलने और संघ की सार्थकता भारत के विश्व गुरु बनने में है।
4- संघ कार्य की प्रेरणा संघ प्रार्थना के अंत में कहे जाने वाले “भारत माता की जय” से मिलती है।
5-समाज में संघ के बारे में सत्य और सही जानकारी पहुंचनी चाहिए।
100 वर्ष की संघ यात्रा: डॉ मोहन भागवत बोले- व्यक्तिगत समर्पण से चलता है RSS
6-राष्ट्र की परिभाषा सत्ता पर आधारित नहीं है। हम परतंत्र थे, तब भी राष्ट्र था।
7-हेडगेवार जी का मानना था कि समाज के दुर्गुणों को दूर किए बिना सब प्रयास अधूरे रहेंगे।
8-संघ के बारे में जानकारी परसेप्शन के आधार पर नहीं, फेक्ट के आधार पर हो।
9-‘हिंदू’ शब्द का अर्थ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव है।
10-दूसरे की श्रद्धा का भी सम्मान करो, अपमान मत करो, ये परंपरा और संस्कृति जिनकी है, वो हिंदू हैं।
11-भारत का स्वभाव समन्वय का है, संघर्ष का नहीं है। भारत की एकता का रहस्य उसके भूगोल, संसाधनों और आत्मचिंतन की परंपरा में है।
12-भारत माता और अपने पूर्वजों को मानने वाला ही सच्चा हिंदू है।
13-हम लोग ऐसा नहीं कहते कि आप हिंदू ही कहो। आप हिंदू हो, ये हम बताते हैं।
14-40 हजार वर्ष पूर्व से भारत के लोगों का डीएनए एक है।
15-संघ किसी विरोध में और प्रतिक्रिया के लिए नहीं निकला है।
16-समाज उत्थान के लिए संघ दो मार्ग अपनाता है – पहला, मनुष्यों का विकास करना और दूसरा उन्हीं से आगे समाज कार्य कराना।
17-संघ को लेकर विरोध भी हुआ और उपेक्षा भी रही। लेकिन संघ ने समाज को अपना ही माना। 18-मत अलग होना अपराध नहीं, प्रकृति का दिया हुआ गुण है।
19- संघ को हमको आगे ले जाना है, क्यों ले जाना है, क्योंकि भारत को खड़ा करना है
20-दुनिया को Struggle for existence or survival of the fittest परिस्थिति मिली लेकिन हमारे प्राचीन समय में भारत में ये स्थिति नहीं थी। There was no struggle It was abundant for everybody और जो परंपरा थी, उसमें संयम था।
















