लीची-आम के बागानों में मजारों का खेल, मुस्लिम ठेकेदारों और अफसरों की मिलीभगत?
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लीची-आम के बागानों में मजारों का खेल, मुस्लिम ठेकेदारों और अफसरों की मिलीभगत?

उत्तराखंड की पावन भूमि पर एक हजार से अधिक अवैध धर्मस्थल किसने और कैसे बना दिए? इसके पीछे कोई षडयंत्र है?

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Aug 25, 2025, 12:06 pm IST
inउत्तराखंड
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

देहरादून: उत्तराखंड की पावन भूमि पर एक हजार से अधिक अवैध धर्मस्थल किसने और कैसे बना दिए? इसके पीछे कोई षडयंत्र है? इन दिनों इस पर काफी चर्चा हो रही है। चर्चा इसलिए शुरू हुई क्योंकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन अवैध कब्रों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है और धामी सरकार का बुलडोजर इन्हें एक-एक करके ध्वस्त कर रहा है। उल्लेखनीय है कि अब तक करीब साढ़े पांच सौ अवैध कब्रों को हटाया जा चुका है और उनके अंदर कुछ भी नहीं मिला, जबकि उक्त अवैध कब्र किसी फकीर पीर की बताई गई थी। दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश अवैध निर्माण सरकारी जमीन पर बनाए गए थे।

वन भूमि पर कब्जा

जानकारी के अनुसार, अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत सरकार द्वारा वन विभाग की भूमि पर बनी करीब चार सौ अवैध कब्रों को हटाया गया है। सवाल यह उठता है कि जंगल में ये अवैध कब्रें क्यों बनाई गईं, जब इस बारे में गहन जांच की गई तो पता चला कि वहां धार्मिक संरचना बनाकर सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जा करने की रणनीति के तहत ये कृत्य किए गए थे। अअवैध मजार बनाकर वहां अंधविश्वासी लोगों को चादर, अगरबत्ती, सफेद गोली का प्रसाद, झाड़-फूंक और ताबीज चढ़ाने का धंधा शुरू कर दिया गया। यह बिजनेस मॉड्यूल बहुत तेजी से फैला, यहां बैठे खादिमों के रिश्तेदारों ने फ्रेंचाइजी कब्रें बनानी शुरू कर दीं और जगह-जगह अपना कारोबार फैलाना शुरू कर दिया, जैसे भूरे शाह नाम की कब्रें दो दर्जन जगहों पर दिखीं और इन्हें वन विभाग ने हटा दिया, इसी तरह कालू शाह नाम की दर्जनों कब्रें दिखीं।

यहां से संदेह उत्पन्न होता है कि यदि इस नाम का कोई संत था तो क्या उसे एक ही स्थान पर दफनाया गया होगा या अनेक स्थानों पर? यह बात भी सामने आई कि जहां अवैध कब्रों से आय बढ़ने लगी, वहीं इसे वक्फ बोर्ड में पंजीकृत कर दिया गया और अब इसे हटाने से पहले सरकार को कई कानूनी पहलुओं से गुजरना पड़ा, हालांकि उत्तराखंड में कई ऐसी अवैध कब्रें भी हटाई गईं जो सार्वजनिक स्थानों में बाधा डाल रही थीं और इसमें न्यायालय ने भी सरकार का साथ दिया। एक रोचक जानकारी यह भी मिली है कि जंगलों को काटने वाले ठेकेदारों ने अवैध रूप से कब्रें भी बना दीं।

निजी भूमि पर कब्जे की नीयत

जानकारी के अनुसार, देहरादून और नैनीताल जिलों में ऐसी अवैध कब्रें मिली हैं जो आम और लीची के बागों में बनाई गई थीं। गहराई से खोजबीन करने पर पता चला कि बाग का मालिक हिंदू है और बाग से पेड़ काटने वाले मुसलमान यूपी से यहाँ आते थे। उनमें से कुछ ने बाद में यहाँ डेरा डाल लिया क्योंकि मालिक कहीं बाहर रहता था। ये लोग बाग की देखभाल करते थे। एक दिन उन्होंने यहाँ ईंट-गारा इकट्ठा किया और एक अवैध कब्र बनाकर उसे हरे-नीले चादरों से ढक दिया और कब्जे का धंधा शुरू कर दिया। मालिक आया तो उन्हें डरा दिया या उन्हें चमत्कार बता दिया।

इसी तरह पिछले दिनों कुछ मुस्लिम ठेकेदारों ने सरकारी भवन बनाने बाउंड्री वाल बनाने के ठेके लिए तो खुदाई में कुछ पुरानी ईंट निकलवा कर उसके बहाने से वहां अवैध मजार बनावा दी। देहरादून की दून स्कूल की अवैध मजार, सरकारी स्कूलों में बनी अवैध मजारों के पीछे यही सच्चाई सामने आई।

केंद्र सरकार की भूमि पर कब्जे

कोई भी सरकारी पुल, नहर, रेल प्रोजेक्ट, जल विद्युत परियोजनाएं बनी वहां संवेदनशील स्थानों पर इसी तरह अवैध मजारें बनी यहां तक कि आर्मी के कैंट एरिया तक में ये अवैध धार्मिक संरचनाएं बनती चली गई।ये कोई सामान्य प्रकिया नहीं है बल्कि सोची समझी साजिश के तहत अवैध मजारे बनाई गई है। ताकि कल इन मजारों के जरिए खादिम सरकारी या निजी भूमि पर अपना दावा कर सके।

ज्यादातर मुस्लिम नही मानते मजार

दारुल उलूम देवबंद के मुस्लिम विद्वानों ने बार-बार कहा है कि इस्लाम में कब्रों के लिए कोई स्थान नहीं है; एक मुसलमान केवल ईश्वर के सामने सजदा कर सकता है। यही वजह है कि इस्लामी देशों में कब्रें नहीं होतीं। वे स्थायी कब्रें भी नहीं बनाते। जबकि उत्तराखंड में ईंटों, सीमेंट और पत्थरों से बनी कब्रें मिलती हैं।

उत्तराखंड सरकार का सख्त रवैया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा है कि नीली और हरी चादरें लगाकर सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल उत्तराखंड में नहीं चलेगा। हर कीमत पर अवैध कब्जे हटाए जाएंगे। बेहतर तो यहीं है इन्हें अवैध कब्जेदार खुद ही हटा लें। सीएम धामी का कहना है कि हमने अतिक्रमण मुक्त करने के लिए अभियान चलाया है। हमारी सरकार ने 9 हजार एकड़ सरकारी जमीन मुक्त कराई है, साढ़े पांच सौ से ज्यादा अवैध धार्मिक ढांचों को हमने हटाया है, हमारा यह अभियान जारी है।

Topics: Uttarakhand illegal mazarsPushkar Singh Dhami bulldozer actionUttarakhand mazar encroachmentcampaign to remove mazarCM DhamiUttarakhand Newsoccupation of government landDehradun encroachment
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