बिहार विधानसभा का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे कई बहरूपिए सक्रिय हो गए हैं। एक ओर अपने को ‘दत्तात्रेय ब्राह्मण’ कहने वाले राहुल गांधी बिहार में यात्रा कर रहे हैं। मजेदार बात यह है कि उनकी यात्रा मुस्लिम—बहुल क्षेत्रों से गुजर ही है। वहीं दूसरी ओर स्वयं को कट्टर सनातनी बताने वाले प्रशांत किशोर जालीदार टोपी पहन कर कुरान की आयतें पढ़ रहे हैं। बता दें कि प्रशांत किशोर जाति से ब्राह्मण हैं।
प्रशांत किशोर दावा कर रहे हैं कि बिहार में उनकी ‘जन सुराज पार्टी’ के सदस्यों की संख्या एक करोड़ से अधिक हो चुकी है। बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ है। अगर प्रशांत किशोर की बात मान भी ली जाए तो अब वे बिहार की सबसे बड़ी पार्टी के प्रमुख हैं। लेकिन इसकी छाप उनकी सभाओं में नहीं दिख रही है। उनकी सभाओं से अधिक भीड़ महागठबंधन की सभाओं में देखी जा रही है। प्रशांत किशोर की कार्यशैली को देखकर ऐसा लगता है कि वे बिहार में ठीक वैसे ही कर रहे हैं, जैसे अरविंद केजरीवाल ने अपने शुरुआती दिनों में दिल्ली में किया था। अरविंद केजरीवाल विरोधियों पर झूठे आरोप लगाने में माहिर हैं। इसके लिए उन्हें कई बार माफी भी मांगनी पड़ी है। वैसे ही प्रशांत किशोर बिहार में विरोधी, नेताओं, विशेषकर भाजपा के नेताओं पर कुछ भी आरोप मढ़ देते हैं।
मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की कोशिश
अन्य विपक्षी नेताओं की तरह प्रशांत किशोर भी अपनी सभाओं में मुसलमानों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आर.एस.एस. का भय दिखाते हैं। वे कहते हैं कि असली लड़ाई भाजपा से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से है। वे उदाहरण देकर कहते हैं, ”एक समय अटल जी को मुसलमान पसंद नहीं करते थे। कुछ दिनों के बाद मुस्लिम अटल जी को पसंद करने लगे और आडवाणी जी के प्रति नफरत। समय बीता तो आडवाणी जी को पसंद करने लगे और मोदी जी के प्रति नफरत का भाव, लेकिन अब मोदी जी को लोग स्वीकार करने लगे हैं, लेकिन योगी जी को कतई पसंद नहीं करते। अगर अब भी मुसलमान नहीं चेते तो एक से एक कट्टरपंथी हिंदू देश पर शासन करने लगेंगे।” इसके साथ ही वे यह भी कहते हैं कि भाजपा को राकेने के लिए मुसलमानों को एक होना होगा।
महागठबंधन के साथ अनौपचारिक साझेदारी
पटना स्थित हज भवन में
16 अगस्त को जब हिंदू समाज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मना रहा था, तब पटना स्थित हज भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रशांत किशोर ने मुसलमानों को संबोधित किया। काय्रक्रम में लगभग 3,000 मुसलमान मौजूद थे। प्रशांत किशोर ने इस कार्यक्रम में घोषणा की कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में 40 मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जहां पर महागठबंधन मुस्लिम प्रत्याशी देगा वहां वे कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं उतारेंगे। यानी एक प्रकार से उन्होंने महागठबंधन के साथ साझेदारी की अनौपचारिक घोषणा कर दी। बकौल प्रशांत किशोर, ”हिंदू मतदाताओं का बंटवारा होने पर ही देश में डॉ. आंबेडकर और महात्मा गांधी की विचारधारा लागू हो सकती है।”
इसका मतलब है कि वे मानते हैं कि हिंदुओं की एकता से ही भाजपा जीत रही है। यही कारण है कि वे सबसे अधिक भाजपा के नेताओं पर ही आरोप लगाते हैं, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं देते हैं। प्रशांत किशोर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर लगातार हमलावर हैं। सबसे पहले उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल के खिलाफ मोर्चा खोला। उनके ऊपर फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेज और जमीन के अधिग्रहण का मुद्दा उठाया। प्रशांत किशोर ने तो उन्हें हत्या का अभियुक्त भी बता दिया। दूसरा मामला बिहार सरकार के मंत्री जीवेश मिश्र का था। उन्होंने उनके ऊपर गलत दवा बनाने का आरोप लगाया। तीसरा मामला भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बिहार सरकार के स्वास्थ्य और विधि मंत्री मंगल पांडे का था। इनके ऊपर डॉ दिलीप जायसवाल के पैसे से नोएडा में फ्लैट खरीदने का आरोप था। इसके अलावा भी कुछ और आरोप लगाए गए थे।
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार प्रशांत आज भी कांग्रेस के लिए ही कार्य कर रहे हैं। अगस्त, 2014 में प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के लिए कार्य करना स्वीकार किया था। उसके बाद वे विभिन्न राज्यों के चुनाव में महागठबंधन के साथ ही कार्य करते दिखे। इस चुनाव में भी उनकी परोक्ष कोशिश है कि महागठबंधन को सफलता मिले।

















