अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण को शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। उत्तराखंड के रुड़की में स्थित दो संस्थानों आईआईटी रुड़की और केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) के पाठ्यक्रम में राम मंदिर निर्माण का विषय शामिल होगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की निर्माण समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया है। इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को राम मंदिर निर्माण की तकनीकी और कारीगरी को समझने का मौका मिलेगा। भूमि पूजन से लेकर मंदिर के शिलान्यास और फिर पूरे निर्माण कार्य तक, हर चरण के बारे में बारीकी से अध्ययन किया जा सकेगा। खासतौर पर छात्रों को यह बताया जाएगा कि अयोध्या में बिना लोहे का इस्तेमाल किए राम मंदिर का निर्माण कैसे किया गया? दरअसल मंदिर को बनाने में विशेष प्रकार के पत्थरों का उपयोग किया गया है, जिनमें खांचे बने हुए हैं, जिससे वे एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे का भी इस्तेमाल किया गया है।
संस्थानों को सौंपी जाएगी मंदिर निर्माण से जुड़ी जानकारी
अयोध्या में आयोजित बैठक में दोनों संस्थानों को मंदिर निर्माण से जुड़ी जानकारी और रिकॉर्डिंग सौंपने का फैसला लिया गया है। इसमें संस्थानों को पांच साल के टाइम-लैप्स वीडियो फुटेज सौंपी जाएगी ताकि उन्हें अध्ययन सामग्री के रूप में तैयार किया जा सके और एक डोक्यूमेंट्री में दिखाया जा सके। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एक मीडिया संस्थान को बताया कि जैसे ही वह दिल्ली लौटेंगे, दोनों संस्थानों के प्रमुखों को आमंत्रित करेंगे और इस संबंध में उनके साथ एक विस्तृत समझौते पर हस्ताक्षर करने पर चर्चा करेंगे। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण के हर दिन के टाइम-लैप्स वीडियो फुटेज को कैप्चर करने के लिए मंदिर परिसर में पांच कैमरे लगाए गए थे। अगस्त 2020 में आधारशिला रखने के दिन से लेकर मंदिर निर्माण के विभिन्न चरणों और इस वर्ष दिसंबर में इसके पूरे होने तक का हर एक पल वीडियो में कैद है।
‘मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को दिखाना चाहते थे’
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने बताया, “हमने पहले ही विचार कर लिया था कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को दिखाने के लिए सभी संभावित और प्रासंगिक तस्वीरें ली जाएं। हमने आईआईटी रुड़की और सीबीआरआई के साथ बातचीत शुरू करने का फैसला किया है ताकि वे मंदिर निर्माण की तकनीक, खासकर ‘बिना लोहे का इस्तेमाल किए पत्थरों से कैसे बनाया गया राम मंदिर’ इस पर एक पाठ्यक्रम तैयार कर सकें।”
फुटेज कैसे सौंपी जाएगी इस पर उन्होंने बताया, “संस्थानों के साथ एक विस्तृत समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, क्योंकि फुटेज पर मंदिर ट्रस्ट का बौद्धिक संपदा अधिकार है।”
बता दें कि आईआईटी रुड़की और सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) उत्तराखंड में स्थित दो अलग संस्थान हैं। आईआईटी रुड़की एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान है, जो इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, वास्तुकला और अन्य संबंधित क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्रदान करता है। वहीं, CBRI वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) का एक घटक संस्थान है, जो भवन निर्माण विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिए समर्पित है।

















