NSA डोवल-चीनी विदेश मंत्री वांग ने तलाशे समाधान के सूत्र, रिश्तों की सलवटें मिटाने में कितनी कारगर रहेगी वांग की यात्रा
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NSA डोवल-चीनी विदेश मंत्री वांग ने तलाशे समाधान के सूत्र, रिश्तों की सलवटें मिटाने में कितनी कारगर रहेगी वांग की यात्रा

यह वार्ता सिर्फ सीमा विवाद का समाधान नहीं खोज रही है, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर पहले कदम का संकेत भी हो सकती है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Aug 19, 2025, 06:15 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी

आज नई दिल्ली में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच सीमा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत वार्ता हुई। विदेश मंत्री जयशंकर ने वांग यी के साथ चर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने रखी थी कि संबंधों में मधुरता लाने के लिए सीमा विवाद का समाधान होना महत्वपूर्ण है। इसलिए विशेष प्रतिनिधि स्तर की 24वीं बैठक भारत के एनएसए डोवल के साथ मुख्यत: भारत-चीन सीमा विवाद को सुलझाने के उद्देश्य से की गई थी। इस मौके पर विश्व की भूराजनीति और सुरक्षा माहौल पर भी चर्चा हुई।

इसमें संदेह नहीं है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है, विशेष रूप से लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर दोनों देशों के बीच सतत तनाव बना रहा है। 2020 में गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई है। इस 24वें दौर की वार्ता को पिछले ब्रिक्स सम्मेलन के बाद एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सहमति बनी थी कि सीमा पर शांति बहाल करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

वांग—डोवल बैठक में अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। जैस वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करना। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के लिए आवश्यक है। दूसरे, विवादित क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी और सैन्य गतिविधियों में कमी लाने पर विचार हुआ। तीसरे, दोनों देशों ने विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ताओं को नियमित रूप से करते रहने की बात कही। चौथे, सीमा विवाद के समाधान के साथ-साथ व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देने की इच्छा जताई गई।

23 अक्तूबर 2024 को कजान, रूस में ब्रिक्स सम्मेलन में चर्चा हुई थी भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की (फाइल चित्र)

भारत के एनएसए अजीत डोवल ने वार्ता की शुरुआत करते हुए कहा कि वर्तमान में सीमाएं अपेक्षाकृत शांत हैं और दोनों देशों के रिश्तों में सुधार हो रहा है। वांग यी ने भी इस बात पर बल दिया कि चीन भारत के साथ सहयोग को बढ़ाना चाहता है और सीमा विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।

नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित इस वार्ता में दोनों पक्षों ने स्पष्ट रूप से यह संकेत दिया कि वे टकराव नहीं, बल्कि सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। कह सकते हैं कि यह वार्ता रणनीतिक रूप से बहुत महत्व रखती है। कारण यह कि भारत और चीन एशिया के दो सबसे बड़े देश हैं। इनके बीच तनाव पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित करता है। ब्रिक्स, जी20 और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों की भूमिका विशेष महत्व रखती है। इसलिए भी सीमा विवाद का समाधान इन मंचों पर दोनों के बीच सहयोग को और प्रभावी बना सकता है।

आर्थिक नजरिए से देखें तो भारत-चीन के बीच व्यापार संबंधों में सुधार से दोनों देशों को आर्थिक लाभ मिल सकता है, विशेष रूप से तकनीक, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में। इस संदर्भ में यह वार्ता सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन वास्तविक प्रगति तो तभी कही जा सकेगी जब जमीनी स्तर पर बदलाव दिखाई दें। दोनों को सैनिकों की वापसी, गश्त की पारदर्शिता और स्थानीय स्तर पर संवाद की बहाली जैसे कदम उठाने होंगे। साथ ही, दोनों देशों को मीडिया और राजनीतिक बयानबाजी में संयम बरतना होगा ताकि वार्ता जिस भावना के साथ की जा रही है उसे आघात न पहुंचे।

वांग यी की यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकती है, यदि बीजिंग इसमें तय हुई बातों को गंभीरता से लेता है और पाकिस्तान के संदर्भ में भारत की आशंकाओं पर गौर करता है। यह वार्ता सिर्फ सीमा विवाद का समाधान नहीं खोज रही है, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर पहले कदम का संकेत भी हो सकती है। चीन में 1 सितम्बर को होने जा रही एससीओ शिखर बैठक से पूर्व यह द्विपक्षीय चर्चा राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच होने वाली वार्ता की मजबूत पृष्ठभूमि बन सकती है।

Topics: चीनModiJaishankarborder disputewang yinsa dovalindo china relationsएनएसए अजीत डोवलविदेश मंत्री वांग यीभारत
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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