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उत्तराखंड सरकार का ऐतिहासिक फैसला: देवभूमि में मदरसों की विदाई तय

उत्तराखंड में चल रहे अवैध मदरसों को सरकार ने बंद कर दिया है। जो पंजीकृत मदरसे चल रहे हैं, उनमें क्या पढ़ाया जा रहा है? इसकी भी रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Aug 18, 2025, 02:25 pm IST
inउत्तराखंड
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

उत्तराखंड में अवैध मदरसों को सरकार ने बंद कर दिया है। जो पंजीकृत मदरसे चल रहे हैं, उनमें क्या पढ़ाया जा रहा है? इस संबंध में धामी सरकार को मिली रिपोर्ट के बाद मदरसा बोर्ड को खत्म करने की कवायद शुरू हो गई है। उत्तराखंड में 2023 में 416 पंजीकृत मदरसों में 45808 बच्चे अध्ययनरत थे, जिनमें से 23174 तहतानी यानी कक्षा एक से पांच तक, 17066 बच्चे फोकानिया यानी कक्षा 6 से 8 तक, जबकि 2496 बच्चे मुंशी मौलवी यानी कक्षा 9 से 10 तक अध्ययनरत थे।

अवैध मदरसों की संख्या 576 से अधिक बताई जा रही है, यहां भी करीब 60 हजार बच्चे धार्मिक शिक्षा ले रहे थे। खास बात यह है कि मदरसा संचालक मुस्लिम समुदाय से चंदा इकट्ठा करते हैं। सरकार ने सर्वेक्षण में पाया कि अधिकांश अवैध मदरसे उक्त पैसे का कोई हिसाब नहीं देते हैं। इसके संचालक आलीशान मकानों और बंगलों में विलासितापूर्ण जीवन जी रहे हैं, जबकि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की हालत बहुत दयनीय है।

इस संबंध में उत्तराखंड बाल सुधार आयोग ने भी राज्य सरकार को एक रिपोर्ट दी थी जिसमें देहरादून की आजाद कॉलोनी स्थित एक मदरसे का जिक्र किया गया था। आयोग का कहना है कि मदरसों में शिक्षा का स्तर बेहद खराब और चिंताजनक है। ये अवैध मदरसे पहले उत्तर प्रदेश या दूसरे राज्यों में चलते थे, लेकिन सरकार द्वारा वहां सख्त कार्रवाई करने के बाद ये उत्तराखंड में सक्रिय हो गए।

इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि झारखंड, बंगाल, असम, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के बच्चे भी यहां मजहबी शिक्षा ले रहे थे। उत्तराखंड सरकार ने भी जब देखा कि फर्जी आधार कार्ड बनाकर इन बच्चों को यहां पढ़ाया जा रहा है और कल को ये यहीं के निवासी बन जाएंगे, तो अवैध मदरसों पर ताला लगाने की कार्रवाई की गई और 237 अवैध मदरसे बंद कर दिए गए। कई मदरसा संचालक नैनीताल हाईकोर्ट भी गए, लेकिन वहां से भी उन्हें यही जवाब मिला कि बिना रजिस्ट्रेशन के मदरसे नहीं खुलेंगे।

दरअसल, अवैध मदरसा संचालक इसलिए पंजीकरण नहीं कराते क्योंकि उन्हें मदरसा बोर्ड के नियमों का पालन करना होता है। मदरसों के संचालन के लिए यह भी सिद्धांत बनाए गए हैं कि वहां बैठने, बिजली, पानी और साफ-सफाई की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, आय-व्यय का ब्यौरा देना होगा और उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाना अनिवार्य है। धामी सरकार द्वारा बंद करने की कार्रवाई के बाद इस वर्ष पंजीकृत मदरसों में बच्चों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। संभवतः अवैध मदरसों के बच्चे पंजीकृत मदरसों में जा रहे हैं। दूसरी ओर, धामी सरकार ने यह भी पाया है कि मदरसों में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम केवल दिखावे के लिए पढ़ाया जा रहा है और संचालक केवल इस्लामी तालीम प्रदान करने पर ही केंद्रित हैं। वो क्या शिक्षा दे रहे है ? इस बारे में भी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

मदरसा बोर्ड और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी सहमत

हालांकि, उत्तराखंड सरकार अगले साल यानी 2026 के शैक्षिक सत्र से मदरसा बोर्ड की मान्यता समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन को मंजूरी देने जा रही है। इस प्रस्ताव को अभी विधानसभा से मंजूरी मिलना बाकी है। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष शम्मूम कासमी भी सरकार के इस फैसले से सहमत हैं। उनका कहना है कि अगर बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिलेगी तो उनका जीवन बेहतर होगा। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स का कहना है कि धामी सरकार ने उत्तराखंड में यूसीसी जैसी एक देश एक शिक्षा की व्यवस्था लागू कर अच्छा फैसला लिया है। जब यहां के मदरसे उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से पंजीकृत हो जाएंगे, तो वे वहां का पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। यह एक साहसिक निर्णय है। ये एक साहसिक निर्णय है। यह वक्फ बोर्ड द्वारा दी गई आधुनिक मदरसा अवधारणा की एक झलक है।

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन से सभी अल्पसंख्यकों को लाभ मिलने वाला है। इसमें न केवल मदरसे बल्कि सिख, पारसी, ईसाई, जैन, गोरखा, बौद्ध आदि अल्पसंख्यकों के स्कूलों को भी मान्यता दी जाएगी और उनकी संबद्धता उत्तराखंड शिक्षा विद्यालय बोर्ड से होगी। इसके साथ ही उन्हें मजहबी शिक्षा के साथ-साथ उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम अपनाना भी जरूरी होगा। धामी सरकार ने निश्चित रूप से सभी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को एक छतरी के नीचे लाने की योजना बनाई है, लेकिन वास्तव में इसका लक्ष्य मदरसों पर नकेल कसना है। अगर धामी सरकार का अध्यादेश लागू हो गया तो देवभूमि उत्तराखंड में मदरसा व्यवस्था खत्म हो जाएगी।

हालांकि, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने देश में पहली बार ऐसा अध्यादेश लाकर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं। सीएम धामी ने साफ संकेत दिए हैं कि देवभूमि में मदरसे बंद किए जाएंगे और उनकी जगह यहां के बच्चों को बेहतर पाठ्यक्रम में शिक्षा दी जाएगी।

मदरसों को बंद करने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान

जैसे सबके लिए भोजन और स्वास्थ्य योजनाएं चलाई जा रही हैं, वैसे ही शिक्षा भी सबके लिए है। हमारा फैसला वोट बैंक की राजनीति के लिए नहीं है। हम यह सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं कि हर धर्म, समुदाय और वर्ग के बच्चों को अच्छी और समान शिक्षा मिले और इसके लिए हम उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन करने जा रहे हैं।

 

Topics: Uttarakhand NewsCM Pushkar Singh DhamiUttarakhand governmentUttarakhand Hindi NewsUttarakhand Latest News
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