गत 10 अगस्त को इंदौर में सामाजिक सद्भभाव बैठक आयोजित हुई। इसमें मालवा प्रांत के 111 समाजों के 284 समाज प्रमुख उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत माता पूजन से हुआ। तत्पश्चात् चयनित समाज प्रमुखों ने समाज द्वारा किए जा रहे जनकल्याण एवं सेवा कार्यों की जानकारी दी।
बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि समाज है, तो सद्भावना है। समाज यानी सद्भावना। यह अपनेपन का संबंध है। यह सोसायटी अर्थात् ‘सोशल काॅन्ट्रेक्ट’ नहीं है। समाज में व्यक्ति और परिवार दोनों की सत्ता होती है। समाज का एक सामान्य उद्देश्य धर्मयुक्त जीवन होता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को शरीर और उपभोग की वस्तु मानने वाले विचार ने पूरे यूरोप को ध्वस्त किया तथा यही विचार अब भारत की परिवार व्यवस्था को ध्वस्त करने का प्रयास कर रहा है। इसने संस्थाओं को अपने नियंत्रण में लेकर समाज को तोड़ने के लिए विश्व के 50-60 घरानों से गठजोड़ कर लिया है। इनका उद्देश्य भारत के बाजार पर कब्जा करना है। इंग्लैण्ड में 2021 में आयोजित ‘डिस्मेंटलिंग हिन्दुत्व’ सेमिनार के पीछे यही विचार था।
उन्होंने कहा कि भारत में धर्म और राष्ट्र एक ही बात है। इसके लिए किया जाने वाला कार्य, ईश्वरीय कार्य है। स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकान्द आदि महापुरुषों ने जात-पात से ऊपर उठकर समाज में राष्ट्रभाव जाग्रत करने का कार्य किया। समाज व परिवार के लिए मातृ-शक्ति का चिंतन पुरुषों से अधिक व्यापक होता है।
उन्होंने कहा कि अपने-अपने क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर सभी जाति-बिरादरी साथ बैठकर अपनी बिरादरी के उत्थान के लिए चिंतन करें तथा कमजोर समाज को ऊपर उठाने में मिलकर प्रयास करें। सब समाज मिल कर राष्ट्र व हिंदू समाज के प्रश्नों का समाधान करें। हम हिंदू हैं, हर हिंदू का सुख-दु:ख हमारा सुख-दु:ख है।

















