अटल जी ने जब आतंकी भिण्डरांवाला के गढ़ में ललकार कर कहा , 'भारत भाड़े की बंदूकों से डरने वाला नहीं'
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अटल जी ने जब आतंकी भिण्डरांवाला के गढ़ में ललकार कर कहा , ‘भारत भाड़े की बंदूकों से डरने वाला नहीं’

आतंकियों ने सीमावर्ती नगर बटाला की नाकाबंदी कर दी। कई दिनों तक चली नाकाबंदी से नगर में खाने-पीने की चीजें लगभग खत्म हो गईं, बच्चों के लिए दूध तक मिलना मुश्किल हो गया।

Written byराकेश सैनराकेश सैन
Aug 16, 2025, 02:47 pm IST
in भारत, पंजाब
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी (फाइल फोटो)

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी (फाइल फोटो)

बात उस समय की है, जब पंजाब में आतंकवाद का काला दौर चल रहा था। खालिस्तानी आतंकी दबे-छिपे पांव बाहर निकलते, निर्दोष लोगों की हत्याएं करके, बम विस्फोट कर वापस लौट आते। निर्दोष हिन्दुओं को गाड़ी-बसों से उतार-उतार कर मारा जा रहा था। पुलिस बेबस, सरकारें नाकाम, मीडिया बंटा-बंटा। आतंकियों ने सीमावर्ती नगर बटाला की नाकाबंदी कर दी। कई दिनों तक चली नाकाबंदी से नगर में खाने-पीने की चीजें लगभग खत्म हो गईं, बच्चों के लिए दूध तक मिलना मुश्किल हो गया। ऐसे में वाजपेयी जी ने आतंकी भिंडरांवाला के गढ़ में जाकर ललकारा कि किराए की बंदूकों से भारत डरने वाला नहीं। वाजपेयी जी ने नाकाबंदी तुड़वा कर न केवल आतंकियों के हौंसले तोड़े बल्कि पीडि़त लोगों को राहत दिलवाई।

बटाला को आतंकियों ने बंधक बना लिया था

1980 का दशक पंजाब के लिए डरावना और भयानक था। भय के मारे लोग शाम के पांच बजे ही घरों में बन्द हो जाते। उन्हीं दिनों की बात है जब 6 मार्च, 1986 को आतंकियों ने पंजाब के औद्योगिक शहर बटाला के सभी 16 प्रवेश मार्गों की नाकेबन्दी करके शहर को बन्धक बना कर लोगों का अन्दर-बाहर आना-जाना भी बन्द कर दिया। शहर की सीमा पर हथियारबन्द गुण्डे दनदना रहे थे और पुलिस बेबस। शहर में दूध, सब्जी व जरूरी सामान की आपूर्ति रोक दी गई। पूरे शहर में 18 दिन कर्फ्यू लगा रहा। शहर में आवश्यक खाद्य वस्तुओं का अभाव हो गया। भूख से व्याकुल बच्चे दूध के लिए तरसने लगे। न मरीजों को दवाई मिल रही थी, न सब्जी, न राशन और न ही मवेशियों के लिए चारा तथा अन्य सामान।

आतंकवादियों ने भारी लूटमार की

नाकाबन्दी के दौरान आतंकवादियों ने भारी लूटमार भी की। इस दौरान वहां अन्य वस्तुओं के साथ ही 14 कारखानों और 34 दुकानों को लूटने के अलावा 20 बन्दूकें भी लूटी गईं और 18 लाख रुपए से अधिक की सम्पत्ति नष्ट की गई। नाकाबन्दी खुलवाने के लिए बनाई गई शान्ति समिति में भी यह मामला बार-बार उठा परन्तु इसमें शामिल बटाला क्षेत्र के तीन मन्त्री और अन्य नेता भी यह नाकाबन्दी समाप्त नहीं करवा सके। लोगों में हाहाकार मचा हुआ था। केन्द्र में उस समय राजीव गान्धी के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार थी जबकि पंजाब में स. सुरजीत सिंह बरनाला मुख्यमन्त्री थे।

अटल बिहारी वाजपेयी जी को बुलाया गया

जालंधर से प्रकाशित पंजाब केसरी के सम्पादक विजय चोपड़ा के एक लेख अनुसार, उन्होंने (विजय चोपड़ा जी ने) दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य स. दरबारा सिंह को फोन किया। उन्होंने चोपड़ा जी को कहा कि वह बात करके अगले दिन बताएंगे। उनकी बात सुन कर लगा कि बात बन जाएगी परन्तु जब उनकी ओर से कोई सन्तोषजनक उत्तर न मिला तभी पंजाब के भाजपा के वरिष्ठï नेता श्री कृष्णलाल शर्मा से सम्पर्क किया गया और कहा कि यदि अटल जी बटाला आ जाएं तो यह नाकेबन्दी खुल सकती है। अटल जी उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। काम तो कठिन था, पर उन्होंने प्रयास किया। चोपड़ा के अनुसार, भाजपा नेता डॉ. बलदेव प्रकाश से सम्पर्क किया गया और श्री वाजपेयी को फोन द्वारा सारे घटनाक्रम और हालात की गम्भीरता के बारे में बताया गया। एक दिन कृष्णलाल शर्मा ने बताया कि वाजपेयी जी आने के लिए राजी हो गए हैं। केवल चोपड़ा जी ही नहीं, बल्कि पंजाब के कई नेताओं ने भी इस ओर प्रयास किया जो सफल रहा।

पंजाब सरकार पर पड़ा दबाव

अटल जी के बटाला आने के समाचार से पंजाब के राज्यपाल और सरकार पर बहुत दबाव पड़ा। पंजाब सरकार तुरन्त हरकत में आई और श्री वाजपेयी तथा उनके साथ दिल्ली से आने वाले भाजपा नेता श्री केदारनाथ साहनी एवं पंजाब के कुछ भाजपा नेताओं को भारी सुरक्षा प्रबन्धों में बटाला पहुंचाने की व्यवस्था की गई। अमृतसर से बटाला जाने के दो रास्ते हैं।

पहला अमृतसर से सीधे बटाला जाता है और दूसरा खालिस्तानी आतंकियों के गढ़ के रूप में बदनाम मेहता चौक से बटाला जाता है। यह कहने के बावजूद कि अमृतसर से सीधे बटाला जाना ही सुरक्षित है, अटल जी ने कहा, चाहे जो भी हो, मैं तो उस रास्ते से ही जाऊंगा जहां आतंकवादी अपना डेरा लगाए हुए हैं। जान हथेली पर रख कर अटल जी मेहता चौक के रास्ते ही 25 मार्च,1986 को बटाला पहुंचे और लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए किला मण्डी बटाला के प्रांगण में एक विशाल रैली को सम्बोधित किया जिसे सुनने हजारों लोग पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने सभी पक्षों के साथ बैठकें करके आतंकियों की नाकेबन्दी समाप्त करवा दी जिससे बटाला वासियों के साथ-साथ पूरे पंजाब के लोगों ने राहत की सांस ली। शायद पंजाब के इन्हीं हालात को देख कर उनका कवि हृदय विह्वल हो उठा और जिससे कविता निकली कि –

दूध में दरार पड़ गई

खून क्यों सफेद हो गया ?

भेद में अभेद खो गया।

बण्ट गये शहीद, गीत कट गए।

कलेजे में कटार दड़ गई।

दूध में दरार पड़ गई।

खेतों में बारूदी गन्ध।

टूट गये नानक के छन्द

सतलुज सहम उठी।

व्यथित सी बितस्ता है।

वसन्त से बहार झड़ गई

दूध में दरार पड़ गई।

अपनी ही छाया से बैर।

गले लगने लगे हैं गैर।

खुदकुशी का रास्ता।

तुम्हें वतन का वास्ता।

बात बनाएँ, बिगड़ गई।

दूध में दरार पड़ गई।

 

पंजाब के लोग इस घटना को याद कर आज भी वाजपेयी जी की स्मृतियों के सम्मुख नतमस्त हो जाते हैं।

 

Topics: अटल बिहारी वाजपेयी‘पंजाब केसरी’अटल जी की कवितापंजाब आतंकवादबटाला नाकाबंदीऑपरेशन बटालाविजय चोपड़ादूध में दरार पड़ गईखालिस्तानी आतंकी
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