जिन्ना के देश के फौजी और नेताओं का मानसिक स्तर किस हद तक नीचे आ गया है, इसका उदाहरण दो दिन पहले सेना प्रमुख ‘फील्ड मार्शल’ असीम मुनीर ने दिया था। लेकिन राजनीतिक क्षेत्र से भी इस मामले में अगुआई करते हुूए राष्ट्रपति आसिफ जरदारी के पुत्र, पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने अपनी कमअक्ली और अक्खड़पन का परिचय दे दिया। बिलावल ने एक बार फिर सिंधु जल संधि को लेकर बड़बोलापन दिखाया और भारत को युद्ध की धमकी दी। उनकी इस विषय पर दूसरी बार दी गई यह धमकी एक गंभीर कूटनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। असीम मुनीर की परमाणु हमले की धमकी के बाद आया बिलावल का यह बयान दोनों देशों के बीच बजाय तनाव को कम करने के और बढ़ाने वाला प्रतीत होता है।
सिंधु जल संधि (1960) भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को लेकर है। भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का। लेकिन भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जिहाद को पोसने वाले पाकिस्तान के प्रति कड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की, जिससे पाकिस्तान में जल संकट की आशंका बढ़ गई।
बिलावल भुट्टो जरदारी कल सिंध सरकार के एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे। उसमें उन्होंने कहा कि यदि भारत इंडस वाटर ट्रीटी को बहाल नहीं करता तो यह पाकिस्तान की संस्कृति और सभ्यता पर हमला करने जैसा होगा। उन्होंने थोथी चेतावनी दी कि पाकिस्तान के सभी प्रांत युद्ध के लिए तैयार हैं, भारत को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

दो दिन पहले जिन्ना के देश के सेना प्रमुख मुनीर ने अमेरिका की धरती से कहा था कि यदि भारत ने पाकिस्तान आने वाले पानी का बहाव रोका तो पाकिस्तान परमाणु हमला करके “आधी दुनिया को तबाह कर देगा”। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत ने जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने इन धमकियों को “पाकिस्तान की आदत” बताया और कहा कि भारत अपनी जल नीति अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत तय करता है।
लेकिन पाकिस्तान द्वारा परमाणु हथियारों की धमकी और युद्ध की चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है। दक्षिण एशिया पहले से ही एक संवेदनशील क्षेत्र है, तिस पर ऐसे बयान शांति प्रयासों को बेशक आघात पहुंचाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और सेना-राजनीति के टकराव के बीच ऐसे बयान जनता को बरगलाए रखने और अपनी पार्टी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश हो सकते हैं। वैसे रिपोर्ट यह है कि पाकिस्तान में पानी की कमी एक वास्तविक समस्या बन चुकी है और सिंधु जल संधि पर भारत की सख्ती से यह और गंभीर होती जा रही है।
हालांकि जिन्ना के देश की ओर पिछले 70 साल से भारत के प्रति नफरत फैलाई जाती रही है, चार युद्धों में भारत से मुंह की खाने के बाद भी उस इस्लामी देश ने जिहाद के रास्ते भारत राज्य के विरुद्ध छद्म युद्ध छेड़ा हुआ है। भारत ने बार बार संयम बरतते हुए कूटनीतिक रास्तों से विवाद सुलझाने के भरपूर प्रयास किए हैं। लेकिन अब अगर भारत अपने अधिकार क्षेत्र में जल संसाधनों का उपयोग बढ़ा रहा है, तो पाकिस्तान को बेचैनी हो रही है।
भारत ने स्पष्ट कहा है कि वह संधि के प्रावधानों के तहत ही कार्य कर रहा है। लेकिन तथ्यों से परे जाकर और दुष्प्रचार तंत्र का सहारा लेकर पाकिस्तान इसे “जल आक्रमण” कह रहा है। यह तय है कि किसी देश को युद्ध की धमकी देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। इसलिए यदि पाकिस्तान ने किसी भी प्रकार का सैन्य कदम उठाने की हिमाकत की तो उसे सभ्य जगत से आलोचना और अलगाव का सामना करना पड़ेगा।
ऐसे में इसमें संदेह नहीं है कि बिलावल भुट्टो और असीम मुनीर के बयान पाकिस्तान की हताशा और आंतरिक दबाव को दर्शाते हैं। इधर भारत संयम और कूटनीति के साथ अपनी जल नीति पर आगे बढ़ रहा है।

















