रक्षाबंधन पर फिर से गूंजेगी रानी कर्णावती और हुमायूँ वाली झूठी कहानी
June 5, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

रक्षाबंधन पर एक बार फिर से गूंजेगी रानी कर्णावती और हुमायूँ वाली झूठी कहानी

जौहर पूरी तरह से सच है, हुमायूँ का न आना सच है, मगर वह कहानी सच नहीं है कि हुमायूँ जब तक आया तब तक रानी ने जौहर कर लिया था और राखी का मान रखते हुए हुमायूँ ने बहादुरशाह पर हमला किया।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Aug 8, 2025, 09:30 pm IST
in भारत
रक्षाबंधन पर रानी कर्णावती और हुमायूं की झूठी कहानी प्रसारित की जाती है

रक्षाबंधन पर रानी कर्णावती और हुमायूं की झूठी कहानी प्रसारित की जाती है

रक्षाबंधन आते ही एक ऐसी कहानी दोहराई जाने लगती है, जो हिन्दू स्त्रियों का और हिन्दू पर्व का सबसे बड़ा अपमान है। जो पर्व भविष्य पुराण के उत्तर पर्व के 137वें अध्याय में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर संवाद के रूप में सामने आया है। रक्षाभाव के इस सबसे बड़े पर्व को भी तुष्टीकरण की भेंट चढ़ा दिया गया। जो पर्व स्त्रियों के तपोबल का प्रतीक था, उसे महिलाओं की निर्बलता का प्रतीक बना दिया गया।

भविष्य पुराण में इसका उल्लेख आता है कि कैसे श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को समझा रहे हैं कि रक्षासूत्र का कितना महत्व होता है। जब वृत्तासुर के वध के लिए दधीचि ने अपनी अस्थियां प्रदान कर दी थीं और उनकी अस्थियों से निर्मित वज्र से जब वृत्तासुर के साथ युद्ध करने के लिए इन्द्र जा रहे थे, तो उनकी रक्षा के लिए उनकी पत्नी ने रक्षासूत्र बांधा था। वह रक्षासूत्र उन्होंने अपने तपोबल की शक्ति के साथ बांधा था।

जबकि विमर्श क्या बनाया गया और अभी तक बनाया जाता है कि बहनें अपने भाई को राखी इसलिए बांधती हैं, कि जिससे वह उनकी रक्षा करें अर्थात यह प्रमाणित करने का प्रयास किया जाता है कि महिलाएं निर्बल हैं और वे अपनी रक्षा का भार भाइयों पर डालती हैं। जबकि भविष्य पुराण के अनुसार रक्षासूत्र इसलिए बांधा जाता है, जिससे वह रक्षासूत्र उसकी रक्षा करे, जिसकी कलाई पर बांधा जा रहा है।

जो कलाई पर रक्षासूत्र बांधता है, वह अपने तमाम तपोबल के साथ उस रक्षासूत्र को बांधता है। जब वृत्तासुर की मृत्यु के बाद दैत्यराज बलि गुरु शुक्राचार्य के पास गए और उन्हें बताया कि कैसे देवता विजयी हुए तो शुक्राचार्य ने कहा कि उन्हें विषाद नहीं करना चाहिए। इस समय वर्ष भर के लिए तुम देवराज इन्द्र के साथ संधि कर लो, क्योंकि इन्द्र पत्नी शची ने इन्द्र को रक्षासूत्र बांधकर अजेय बना दिया है। उसीके प्रभाव से दानवेंद्र तुम इन्द्र से परास्त हुए हो।

अर्थात जो रक्षासूत्र बांधता है, वह इस भाव के साथ रक्षासूत्र बांधता है, उसके लिए स्वयं की रक्षा के लिए याचना का भाव नहीं अपितु जिसकी कलाई में रक्षासूत्र बांधा जा रहा है उसकी रक्षा का भाव होता है। मगर हुमायूँ और रानी कर्णावती की कहानी के माध्यम से एक तो इस पर्व की ऐतिहासिकता को मुगल काल से ही आरंभ होने तक सीमित किया गया और साथ ही यह भी प्रमाणित करने का कुप्रयास किया गया कि हिन्दू धर्म में महिलाएं (बहनें) दरअसल अपने भाइयों पर बोझ होती हैं और वे अपनी निर्बलता के लिए भाई को राखी बांधती हैं कि वह उनकी रक्षा करें।

साल-दर-साल यह झूठ हमें विभिन्न माध्यमों से परोसा जाता है, जिसमें रानी कर्णावती को बदनाम करने वाली यह कहानी भी सम्मिलित है।

 

क्या है यह कहानी और क्या है सच?

हिंदुओं पर आक्रमण करने वाला बाबर केवल भारत पर चार वर्ष के लगभग ही रुक सका था और पानीपत के प्रथम युद्ध के चौथे वर्ष 1530 में उसकी मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद जहां दिल्ली की गद्दी पर हुमायूँ बैठा तो वहीं गुजरात में बहादुर शाह का शासन था। उस समय चित्तौड़ में राणा सांगा के बेटे विक्रमादित्य को सिंहासन पर बैठाकर रानी कर्णावती शासन कर रही थी। बहादुरशाह और हुमायूँ दोनों की ही नजर चित्तौड़ पर थी। बहादुर शाह, राणा सांगा और राणा रतन सिंह के रहते चित्तौड़ पर देखने की हिम्मत नहीं कर सका था। मगर विक्रमादित्य के शासन के प्रति उसे आशा थी कि वह चित्तौड़ जीत लेगा। उसने चित्तौड़ पर हमला करने का विचार किया और आगे बढ़ा।

ऐसा कहा जाता है कि राणा सांगा की पत्नी रानी कर्णावती ने बहादुर शाह के हमले से रक्षा के लिए हुमायूँ को पत्र भेजा था। परंतु हिस्ट्री ऑफ मेडिवल इंडिया (पृष्ठ 213) में इतिहासकार सतीश चंद्र लिखते हैं कि “कुछ ऐतिहासिक किवदंतियों के अनुसार राणा सांगा की विधवा रानी कर्णावती ने हुमायूँ की मदद की चाह में हुमायूँ को राखी भेजी थी, और हुमायूँ ने उसका उत्तर भी दिया था। परंतु किसी भी समकालीन इतिहासकार ने इस कहानी का उल्लेख नहीं किया है, और यह सच भी नहीं हो सकता है।“

एसके बनर्जी की हुमायूँ बादशाह पर एक पुस्तक है, जिसमें यह विस्तार से लिखा है कि रानी कर्णावती की सहायता के लिए हुमायूँ नहीं आया था और राखी तो रानी ने भेजी ही नहीं थी। वे इस पुस्तक के पृष्ठ 87 पर लिखते हैं कि रानी कर्णावती ने हुमायूँ से सहायता के लिए अपील की थी, मगर इसके अतिरिक्त कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई थी, कि हुमायूँ ग्वालियर तक आ गया था और वह दो महीने तक वहाँ टिका रहा था। यह चित्तौड़ की पहली घेराबंदी की बात थी। इसमें रानी को बहादुरशाह के साथ एक अपमानजनक संधि करनी पड़ी थी। यह संधि 24 मार्च 1533 को हुई थी।

उसके बाद वर्ष 1535 में बहादुरशाह ने फिर से चित्तौड़ पर हमला कर दिया। कर्णावती ने राजपूत राजाओं से सहायता मांगी और सभी राजपूत सहायता के लिए एक साथ आए। मगर इस बार जब रानी ने देखा कि विजय की आशा नहीं है तो राजपूत पुरुषों ने साका और रानियों ने जौहर कर लिया। यह जौहर 8 मार्च 1535 को हुआ था।

इसी पुस्तक में हुमायूँ और बहादुरशाह का पत्राचार भी सम्मिलित है। इस लंबे पत्राचार में चित्तौड़ को लेकर भी बात है और एक और महत्वपूर्ण तथ्य पृष्ठ 108 पर अंकित है। जिसमें बहादुरशाह के चौथे पत्र के हवाले से लिखा गया है कि “चूंकि हम ईमान और इंसाफ लाने वाले हैं, तो पैगंबर के अल्फ़ाज़ों में ‘अपने भाई की मदद करो, फिर चाहे वह जुल्मी हो या जुल्म सहने वाला!।“ हालांकि यह कहा और किसी संदर्भ में गया है। परंतु यह हो उसी दौरान रहा था।

 

जब 1534 में हुमायूँ कालपी पहुंचा था तो वहाँ का शासक आलम खान, मुगलों के प्रति आत्मसमर्पण करने के स्थान पर बहादुरशाह के पास चला गया था। बहादुरशाह और हुमायूँ दोनों को ही एक दूसरे से खतरा था। हुमायूँ के लिए बहादुरशाह और बहादुरशाह के लिए हुमायूँ सबसे बड़ी चुनौती थे। ये सारे पत्राचार चित्तौड़ के युद्ध से पहले के हैं। जिनमें चित्तौड़ का भी उल्लेख है। एक पत्र में बहादुरशाह ने हुमायूँ से कहा था कि वह चित्तौड़ शहर का दुश्मन है, और वह काफिरों को अपनी ताकत से नष्ट करने जा रहा है, जो भी रास्ते में आएगा, वह उसे मिटा देगा।

 

इसके आगे एसके बनर्जी पृष्ठ 111 पर लिखते हैं कि मिरात-ए-सिकंदरी ने तजकिराह-ए-बुखारा में एक और बात कही है। यह हुमायूँ ने कहा था।

 

इसका अर्थ है

 

“मेरे दिल का दर्द अब यह सोच कर खून में बदल गया है, कि हमारे एक होने के बावजूद हम दो है।

 

मैने कभी भी आपको रोते हुए याद नहीं किया है, मैने कभी सोचा नहीं था कि मैं इतना रोऊँगा,”

 

यह पत्राचार बहुत बड़ा है, परन्तु चित्तौड़ के साथ ही यह पत्राचार समाप्त होता है। चित्तौड़ एक हिन्दू राज्य था, जिसे पराजित करना जितना जरूरी बहादुरशाह के लिए था, उतना ही जरूरी हुमायूँ के लिए था, क्योंकि काफिरों के राज्य पर हमला करना और नेस्तनाबूत करना ही उनके मजहब की सेवा थी और उस सेवा में कोई मुस्लिम कैसे दीवार बन सकता था।बनर्जी इसी पुस्तक में लिखते हैं कि मुस्लिम शासकों की नीति हिन्दू राजाओं और मुस्लिम राजाओं के प्रति अलग थी। मुस्लिम राजा को एक ‘काफिर’ राज्य के साथ स्थाई संधि बनाए रखने की अनुमति नहीं थी। यही कारण था कि वर्ष 1533 में राणा के साथ संधि के बाद भी बहादुर शाह के पास एक काफिर राज्य को अपने नियंत्रण में लेने के अतिरिक्त चित्तौड़ को नष्ट करने का कोई और कारण था ही नहीं।

सारंगपुर में एक महीने तक रहा हुमायूँ

इसी पुस्तक के अगले अध्याय (पृष्ठ 118) में लिखा है कि हुमायूँ और बहादुरशाह के बीच जब पत्राचार समाप्त हुआ, तब तक हुमायूँ सारंगपुर पहुँच गया था और वहाँ पर वह एक महीने से अधिक रहा। हुमायूँ जब पूर्वी मालवा की ओर बढ़ रहा था तो बहादुरशाह को चिंता हुई कि वह उस पर हमला न कर दे। मगर उसके वजीर सदर खान को उस मुस्लिम रिवाज पर यकीन था कि एक काफिर की मदद में कभी भी एक मुस्लिम शासक दूसरे मुस्लिम शासक पर हमला नहीं करेगा और फिर उसने बहादुरशाह को यकीन दिलाया कि हुमायूँ उस पर तब हमला नहीं करेगा जब वह गैर-मुस्लिम के साथ युद्ध कर रहा है। और वही हुआ।

 

जौहर पूरी तरह सच, हुमायूं का न आना भी सच, परंतु…

चित्तौड़ में रानी कर्णावती ने हजारों रानियों के साथ जौहर कर लिया था। जौहर पूरी तरह से सच है, हुमायूँ का न आना सच है, मगर वह कहानी सच नहीं है कि हुमायूँ जब तक आया तब तक रानी ने जौहर कर लिया था और राखी का मान रखते हुए हुमायूँ ने बहादुरशाह पर हमला किया। हुमायूँ ने बहादुरशाह पर इसलिए बाद में हमला किया था, क्योंकि बहादुरशाह तब तक थक चुका था और जब तक बहादुरशाह चित्तौड़ पर हमले में व्यस्त था, तब तक हुमायूँ को अपनी ताकत बढ़ाने का मौका मिल गया था।

 

 

 

Topics: राखी पर कहानीरानी कर्णावती की राखीरानी कर्णावती कौन थींरक्षाबंधनरानी कर्णावतीहुमायूंरानी कर्णावती और हुमायूं राखी
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ @100 : संघ और महिलाएं

Uttarakhand Rakhsabandhan

उत्तराखंड: सीएम धामी ने रक्षाबंधन पर बहनों की सेवा का लिया संकल्प, जल सखी योजना की घोषणा

हुमयां को बेचारा बनाकर पेश किया गया

अफीमची हुमायूं: जो अपनी बेटी को मारने की सोच रखता था क्या वह हिंदू रानी को बचाने जा सकता है ? हुमायूंनामा में क्या लिखा

प्रधानमंत्री मोदी को राखी बांधती बच्ची

रक्षाबंधन पर देखिये यह प्यारा सा वीडियो, प्रधानमंत्री के साथ बच्चों का प्यार भरा संवाद, ‘भाई’ से ‘बहनों’ ने लिया वादा

Rakshabandhan Rani Karnavati Humayu

रक्षाबंधन आते ही गूंजी हुमायूं-कर्णावती की कहानी: परंतु क्या सच यही है? रानी कर्णावती का जौहर कुछ और ही कहता है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्यों मनाता है ‘रक्षाबंधन’? क्या है इसका 100वें वर्ष से कनेक्शन ?

Load More

ताज़ा समाचार

पर्यावरण दिवस पर विशेष : प्रकृति ही परमात्मा

rss karyakarta vikas varg nagpur concludes kumar mangalam birla speech

“संघ का कार्य अभूतपूर्व है” : नागपुर में बोले कुमार मंगलम बिरला, ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’ के समापन पर दिया बड़ा मंत्र

rss karyakarta vikas varg nagpur mohan-bhagwat speech kumar mangalam birla

“दुनिया को भारत की आवश्यकता है” : डॉ. मोहन भागवत जी

rss path sanchalan karyakarta vikas varg nirala nagar lucknow

लखनऊ: RSS के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’ का भव्य पथ संचलन, घोष की धुन और कदमताल से दिखा अनुशासन का अद्भुत नजारा

विश्व पर्यावरण दिवस :- स्वस्थ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन : आज की सबसे बड़ी आवश्यकता

5 जून का पंचांग

5 जून पंचांग: किस समय करें शुभ कार्य, क्या कहती है ग्रहों की स्थिति?

Constitution expert Dr Subhash Kashyap passes away

संविधान विशेषज्ञ और पद्म भूषण डॉ. सुभाष कश्यप का 97 वर्ष की उम्र में निधन, संसदीय जगत में शोक की लहर

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी: बड़े मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी, लिखा- बदला, बदला, बदला

bijnor umar international meat factory-sealed 168 crore assets attached in cow smuggling

बिजनौर: ‘फिश फूड’ की आड़ में गोतस्करी, अतीक अहमद की 168 करोड़ की मीट फैक्ट्री सील

बशीर बद्र (फाइल फोटो)

असली जमींदार कौन? भारत की मिट्टी पर अधिकार: कब्रों से या कर्तव्यों से?

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies