उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बादल फटने से कई घर तबाह हो गए हैं। गंगोत्री धाम और मुखवा के पास स्थित धराली में मंगलवार (5 अगस्त) को हुए इस हादसे में अब तक चार लोगों की मौत की खबर है। शासन-प्रशासन और सेना युद्धस्तर पर काम कर रही है। वहीं, धराली हादसे ने 12 वर्ष पहले केदारनाथ त्रासदी के जख्म एक बार फिर से हरा कर दिया है।
केदारनाथ त्रासदी में हजारों लोगों की गई थी जान
केदारनाथ में 16 जून 2013 को खतरनाक बाढ़ और भूस्खलन हुआ था, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी। पुलिस-प्रशासन की जांच पड़ताल में आज भी 3183 लोग गुमशुदा हैं, जो केदारनाथ आए थे और वापस अपने घर नहीं पहुंचे। मामले में 1840 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की गई थीं, जिनकी जांच हुई और 1256 एफआईआर को सही पाया गया। केदारनाथ हादसे के बाद 703 मानव अवशेष मिले, जिनका डीएनए करवाकर उनका दाह संस्कार किया गया। कई परिवार आज भी अपनों के आने के इंतजार में हैं।
केदारनाथ हादसे में केदारपुरी, सोनप्रयाग, विजय नगर आदि की भौगौलिक सूरत ही बदल डाली थी। 2013 में आई तबाही में भी भारी नुकसान हुआ था। इसके बावजूद बाबा केदार का मंदिर टस से मस नहीं हुआ।
हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं केदारनाथ
केदारनाथ हिंदुओं का प्रमुख तीर्थस्थल है। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए दुर्गम रास्तों से होकर यहां पहुंचते हैं। 2013 से पहले केदारनाथ का रास्ता रामबाड़ा से होकर जाता था। इस रास्ते पर खूब रौनक रहती थी। यहां छोटे-बड़े कई होटल, धर्मशालाएं और दुकानें थीं। मंदाकिनी नदी के किनारे बसा यह इलाका तीर्थयात्रियों का एक मुख्य पड़ाव हुआ करता था। वे यहां रात में ठहरते और अगले दिन केदारनाथ के दर्शन के लिए निकलते थे। लेकिन हादसे के बाद भी श्रद्धालुओं का हौसला कभी कम नहीं हुआ। आज भी लाखों की संख्या में भक्त यहां बाबा केदार के दर्शन के लिए आते हैं।

















