5 अगस्त 2020 का दिन भारत के इतिहास में बहुत खास बन गया। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन किए। इस पावन अवसर का हिंदू समाज लगभग 500 वर्षों से इंतजार कर रहा था। यह सिर्फ एक मंदिर का निर्माण नहीं था, बल्कि आस्था, संघर्ष और न्याय की प्रतीक बन चुकी एक लंबी यात्रा का फल था।
इतिहास के अनुसार, 21 मार्च 1528 को मुगल शासक बाबर के सिपहसलार मीर बाकी ने अयोध्या में बने प्राचीन राम मंदिर को तोड़ दिया था। इसके स्थान पर एक ढांचा बना दिया, जिसे बाद में बाबरी मस्जिद कहा गया।
500 सालों का संघर्ष- राम मंदिर को दोबारा बनाने की मांग कोई नई नहीं थी। इस स्थान को लेकर कई बार टकराव हुए। अनेक संतों, भक्तों और आम लोगों ने इसके लिए अपने प्राण दे दिए। समय के साथ यह केवल धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बन गया। एक बड़ा मोड़ तब आया जब 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने उस विवादित ढांचे (बाबरी मस्जिद) को गिरा दिया। इसके बाद देशभर में इस मुद्दे को लेकर काफी विवाद हुआ। यह मामला अदालत तक पहुंचा और कई सालों तक सुनवाई चली। करीब 30 साल बाद, 9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या की वह जमीन, जहाँ बाबरी मस्जिद थी, भगवान राम की जन्मभूमि है।कोर्ट ने कहा कि वहां राम मंदिर का निर्माण हो सकता है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में दूसरी जगह 5 एकड़ भूमि देने का आदेश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर के निर्माण का मार्ग स्पष्ट हो गया। इसके बाद, 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या गए और मंदिर निर्माण की शुरुआत के लिए भूमि पूजन किया। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गया। देश और दुनिया भर के करोड़ों हिंदुओं ने इस ऐतिहासिक पल को टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से देखा और साक्षी बने। भूमि पूजन के बाद राम मंदिर के निर्माण कार्य की विधिवत शुरुआत हुई। राम मंदिर बनकर तैयार है और लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर न केवल भव्य और विशाल है बल्कि भारतीय संस्कृति, वास्तुकला और आस्था का प्रतीक भी है।

















