पहलगाम : आतंकवादियों की पहचान पर प्रश्‍न उठाने वालों के लिए आ गए सबूत, लश्कर का कश्मीर मॉड्यूल बेनकाब
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पहलगाम : आतंकवादियों की पहचान पर प्रश्‍न उठाने वालों के लिए आ गए सबूत, लश्कर का कश्मीर मॉड्यूल बेनकाब

पहलगाम हमले में मारे गए तीन आतंकी पाकिस्तानी निकले। NADRA आईडी, सैटेलाइट फोन और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पाकिस्तान की साजिश उजागर की। जानिए विस्तृत रिपोर्ट...

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
Aug 4, 2025, 08:02 pm IST
in भारत, विश्व, विश्लेषण

पहलगाम आतंकी हमलों में आतंकवादियों की पहचान को लेकर लगातार उठाए जा रहे प्रश्‍नों को अब पूरी तरह से विराम लग जाएगा। जिन्‍हें इनके पाकिस्‍तानी होने पर संदेह रहा और जो लगातार केंद्र सरकार को घेर रहे थे, अब उनके पुख्‍ता सबूत मिल चुके हैं, कि वे सभी पाकिस्‍तान से आए आतंकवादी थे।

दरअसल, आतंकियों के पास से जो दस्तावेज और सबूत बरामद हुए हैं, उनसे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि ये आतंकी पाकिस्तान के नागरिक थे और लश्कर-ए-तैयबा जैसे कुख्यात आतंकी संगठन से जुड़े थे। ये तीनों आतंकवादी 28 जुलाई को ऑपरेशन महादेव के दौरान श्रीनगर के बाहरी इलाके दाचीगाम जंगल में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। वे पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए हमले के बाद से दाचीगाम-हरवान वन क्षेत्र में छिपे हुए थे इस खुलासे के बाद एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवाद को शह देने वाली नीति दुनिया के सामने उजागर हुई है।

सरकारी दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों से हुई पुष्टि

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस हमले की जांच के दौरान जो साक्ष्य जुटाए हैं, वे अभूतपूर्व माने जा रहे हैं। बरामद किए गए दस्तावेजों में पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी की गई दो मतदाता पहचान पर्चियां शामिल हैं, जो क्रमशः लाहौर (NA-125) और गुंझरांवाला (NA-79) की मतदाता सूची से मेल खाती हैं। इसके अलावा NADRA से जुड़ी एक स्मार्ट आईडी चिप भी एक सैटेलाइट फोन से प्राप्त हुई, जिसमें तीनों आतंकियों की उंगलियों के निशान, चेहरे की बायोमेट्रिक प्रोफाइल और पारिवारिक जानकारियां दर्ज थीं। इन सूचनाओं से आतंकियों का संबंध पाकिस्तान के कसूर जिले के चंगा मंगा और रावलकोट के पास स्थित कोइयां गांव से जुड़ा पाया गया है।

फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भी किया हमले में शामिल होने की पुष्टि

बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से सुरक्षा एजेंसियां इन आतंकियों की तलाश में जुटी थीं। 28 जुलाई को ऑपरेशन महादेव के दौरान मारे गए तीनों आतंकवादियों के पास से बरामद की गई AK-103 राइफलों की फायरिंग जांच में यह पाया गया कि उन्हीं राइफलों से बैसरन में गोलियां चलाई गई थीं। बरामद खोखे और राइफल के फायरिंग सिग्नेचर 100 प्रतिशत मेल खा गए।

इतना ही नहीं, पहलगाम में हमले के दिन एक घायल की शर्ट पर मिले खून के सैंपल और मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के शवों से लिए गए डीएनए नमूनों का माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए प्रोफाइल भी पूरी तरह से मेल खा गया। ये वैज्ञानिक पुष्टि बताती है कि हमला इन्हीं आतंकियों ने किया था। सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों के पास से कराची में निर्मित ‘कैंडीलैंड’ और ‘चोकोमैक्स’ ब्रांड की चॉकलेट के रैपर भी बरामद किए हैं। इन छोटे-छोटे साक्ष्यों ने भी उनकी नागरिकता को लेकर किसी भी संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़ी है।

डिजिटल सबूतों ने बताया आतंकी गतिविधियों का नक्शा

एक और बड़ा सबूत मिला आतंकियों के पास से बरामद Huawei सैटेलाइट फोन से। इसका IMEI नंबर 86761204-XXXXX था, जो 22 अप्रैल से 25 जुलाई तक हर रात Inmarsat-4 F1 उपग्रह से जुड़ा पाया गया। इसके सिग्नल्स की मदद से सुरक्षा एजेंसियों ने उनका मूवमेंट ट्रैक किया और खोज क्षेत्र को दाचीगाम-हरवान वन क्षेत्र में सीमित कर दिया। इसी आधार पर ऑपरेशन महादेव को अंजाम दिया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मारे गए आतंकियों की पहचान सुलेमान शाह उर्फ फैसल जट्ट (A++ श्रेणी का आतंकी), अबू हमजा उर्फ अफगान (A श्रेणी का कमांडर) और यासिर उर्फ जिबरान (A श्रेणी का कमांडर) के रूप में हुई है। फैसल जट्ट पहलगाम हमले का मुख्य शूटर और मास्टरमाइंड था। जांच में सामने आया है कि ये तीनों आतंकी मई 2022 में उत्तरी कश्मीर के गुरेज सेक्टर से नियंत्रण रेखा पार कर भारत में दाखिल हुए थे।

स्थानीय मददगारों की भूमिका भी आई सामने

हिरासत में लिए गए दो कश्मीरी युवकों की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि ये आतंकी 21 अप्रैल को हिल पार्क के पास एक मौसमी झोपड़ी (धोक) में रुके थे। युवकों ने उन्हें रात भर पनाह दी और खाना भी दिया। अगली सुबह, यानि 22 अप्रैल को आतंकियों ने बैसरन घाटी में हमला किया और फिर दाचीगाम की ओर भाग गए।

कमांड और कंट्रोल का लिंक भी हुआ बेनकाब

इस हमले की योजना पाकिस्तान के लाहौर निवासी और लश्कर के दक्षिण कश्मीर ऑपरेशन प्रमुख साजिद सैफुल्लाह जट्ट ने बनाई थी। ऑपरेशन के दौरान आतंकियों से बरामद सैटेलाइट फोन से मिली आवाज सैंपल्स पहले की रिकॉर्डिंग से मेल खा गई। इसके अलावा, लश्कर के रावलकोट प्रमुख रिजवान अनीस को 29 जुलाई को आतंकियों के परिवार से मिलते और गायबाना जनाज़ा नमाज़ पढ़ते हुए देखा गया, जिसका वीडियो अब भारत के पास प्रमाण के रूप में मौजूद है।

पहले जारी किए गए स्केच निकले गलत

हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जिन संदिग्धों (हाशिम मूसा, अली भाई उर्फ तल्हा और आदिल हुसैन ठोकर) के स्केच जारी किए थे, वे दरअसल दिसंबर 2024 की एक पुरानी मुठभेड़ से जुड़े एक फोन में मिली तस्वीरों के आधार पर बनाए गए थे। इससे आतंकियों की भ्रम फैलाने की रणनीति का भी खुलासा होता है। वहीं, अब इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी से सवाल किए हैं कि अब जब हमलावरों की पाकिस्तानी नागरिकता के पुख्ता प्रमाण मिल चुके हैं, तो वे क्या रुख अपनाएंगे? बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और कुछ विपक्षी दल बार-बार आतंकी हमलों पर संदेह जताकर देश की सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल को नुकसान पहुंचाते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केस पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के सबसे ठोस सबूतों में से एक है। NADRA डेटा, सैटेलाइट फोन लिंक, फोरेंसिक मिलान और व्यक्तिगत दस्तावेज़ इस बात को सिद्ध करते हैं कि पाकिस्तान की धरती से चलने वाला आतंकी नेटवर्क आज भी सक्रिय है और कश्मीर में आतंक फैलाने की कोशिश कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने लगा रखा है आतंकी का ठप्पा

कुल मिलाकर कहना यही है कि लश्कर-ए-तैयबा पर संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही आतंकी संगठन का ठप्पा लगा रखा है, फिर भी यह खुलेआम पाकिस्तान में कार्य कर रहा है। इस पर वैश्‍विक मंचों पर भारत सरकार प्रश्‍न उठाए। यहां आतंकवादियों की NADRA जैसी सरकारी एजेंसी से जुड़ी स्मार्ट ID का मिलना यह दर्शाता है कि इन आतंकियों को सरकारी संरक्षित ID दस्तावेज मुहैया कराए गए थे – एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराध है। आतंकी जिस Inmarsat-4 F1 उपग्रह से जुड़े थे, वह एक सैन्य और वाणिज्यिक संचार उपग्रह है। इसका अर्थ है कि आतंकियों को हाई-एंड सैटेलाइट कम्युनिकेशन की ट्रेनिंग दी गई थी, जो सामान्य आतंकी प्रशिक्षण से कहीं ऊपर का स्तर है।

आतंकियों से मिले पाकिस्तानी हथियार

आतंकियों के पास मिली AK-103 असॉल्ट राइफल रूसी डिज़ाइन पर आधारित है और आमतौर पर पाकिस्तानी सेना और ISI के नियंत्रण में पाई जाती है। यह इन राइफलों की आपूर्ति श्रृंखला पर भी सवाल खड़ा करता है, क्या वे सीधे पाकिस्तान के सरकारी हथियार डिपो से प्राप्त हुई थीं? आतंकियों के लिए पाकिस्तान में की गई गायबाना जनाज़ा नमाज़ केवल धार्मिक क्रिया नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक प्रक्रिया थी जिसमें मारे गए सभी आतंकियों को लेकर कहा गया कि वे “शहीद” हैं और उन्हें पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा सकता है भारत

इसके साथ यह भी कहना होगा कि पहलगाम हमले की जांच अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रमाण की तरह है। भारत अब इन सबूतों के आधार पर पाकिस्तान को वैश्विक मंचों संयुक्त राष्ट्र, FATF और SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा सकता है। भारत पहले भी पुलवामा और उरी हमलों में पाकिस्तान के खिलाफ डोज़ियर पेश कर चुका है। यह मामला तीसरे बड़े डोज़ियर के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

Topics: लश्कर-ए-तैयबाजम्मू-कश्मीर आतंकवादपहलगाम आतंकी हमलाऑपरेशन महादेवपाकिस्तान आतंकी सबूतNADRA ID आतंकीInmarsat सैटेलाइट फोनAK-103 राइफल
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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