भारत का सहकारी क्षेत्र इस साल के अंत तक एक नई कैब सेवा शुरू करने जा रहा है, जो देश में ओला और उबर जैसी बड़ी कंपनियों को सीधी चुनौती देगी। यह सेवा “भारत ब्रांड” के नाम से शुरू की जाएगी और इसका उद्देश्य यात्रियों को किफायती, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करना तथा ड्राइवरों को बेहतर आमदनी सुनिश्चित करना है। इस नई कैब सेवा की शुरुआत सहकारी कैब कोऑपरेटिव लिमिटेड नामक एक बहु-राज्य सहकारी संस्था के द्वारा की जा रही है। यह संस्था 6 जून को पंजीकृत हुई है और इसे 300 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी मिली है।
इस सहकारी संस्था में देश की आठ प्रमुख सहकारी समितियाँ शामिल हैं, जिनमें से प्रमुख नाम हैं- राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), भारतीय कृषक उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको), गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (अमूल/GCMMF),
कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL), यह कैब सेवा पूरी तरह से सहकारी समितियों द्वारा संचालित और वित्त पोषित होगी। इसमें सरकार की कोई सीधी भागीदारी नहीं है।
ड्राइवरों को मिलेगा अधिक लाभ- एनसीडीसी के उप-प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता ने बताया कि इस कैब सेवा का उद्देश्य है कि जो लोग इसमें ड्राइविंग करेंगे, उन्हें उचित लाभ और सम्मान मिले। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 200 ड्राइवरों को जोड़ा जा चुका है, जिनमें से 50-50 ड्राइवर दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से हैं। आने वाले समय में और अधिक राज्यों में विस्तार की योजना है। इस सेवा को संचालित करने के लिए एक ‘राइड-हेलिंग’ ऐप विकसित किया जा रहा है। इसके लिए टेक्नोलॉजी पार्टनर चुनने हेतु टेंडर प्रक्रिया जारी की गई है। गुप्ता ने बताया कि कुछ ही दिनों में टेक पार्टनर को अंतिम रूप दे दिया जाएगा और दिसंबर 2025 तक ऐप तैयार हो जाएगा। इस ऐप की मार्केटिंग रणनीति तैयार करने के लिए देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थान आईआईएम-बेंगलुरु और एक टेक सलाहकार की मदद ली जा रही है। यह सेवा एक सहकारी मूल्य निर्धारण मॉडल (Cooperative Pricing Model) पर काम करेगी, जिससे ग्राहक और ड्राइवर दोनों को लाभ होगा।
सहकारी मॉडल का लाभ- सहकारी मॉडल का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इसमें किसी एक व्यक्ति या कंपनी का स्वामित्व नहीं होता, बल्कि सभी सदस्य मिलकर संचालन करते हैं और लाभ भी मिल-बांट कर लेते हैं। इस नई कैब सेवा में भी यही मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे ड्राइवरों को बेहतर पारिश्रमिक, बीमा, और अन्य सुविधाएँ मिलेंगी। साथ ही यात्रियों को भी पारदर्शिता और किफायती सेवा मिलेगी। यह पहल एक ऑल इंडिया प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू की जा रही है और इसमें सदस्यता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा सहकारी संस्थाएँ और ड्राइवर जुड़ सकें। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक राष्ट्रीय सहकारी नीति का ऐलान करते हुए बताया था कि 2025 के अंत तक एक कैब सेवा शुरू की जाएगी। अब वह योजना तेजी से साकार होती दिख रही है।

















