महाराष्ट्र के मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सातों आरोपियों को बरी कर दिया है। 17 साल के लंबे इंतजार के बाद अदालत से बरी होने पर साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि यह फैसला न केवल उनकी, बल्कि हिंदुत्व की जीत है। वोट बैंक की राजनीति के लिए भगवा आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ने वाली कांग्रेस ने उनके जीवन के 17 साल बर्बाद कर दिए। इस दौरान उन्हें बिना दिन-रात देखे पुलिस कस्टडी में लगातार बेल्टों से पीटा गया और टार्चर किया गया। मारते-मारते उनके फेफड़े की झिल्ली तक फट गई। वह बेहोश हो गईं। इसके बाद भी उन पर जुल्म करना जारी रहा।
प्रज्ञा ठाकुर ने अपनी आपबीती में कई और दिल दहला देने वाले खुलासे किए हैं, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे। उनकी जगह शायद कोई और होता तो वह भीतर से टूट जाता, लेकिन उन्होंने अपनी न्यायपालिका पर विश्वास कायम रखा।
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में जन्मी प्रज्ञा सिंह ठाकुर इस्लामिक आतंकवाद, तुष्टीकरण और कश्मीर में बैठे देशद्रोहियों पर जिस प्रकार से प्रहार करती थीं, वह कांग्रेस को बिल्कुल भी रास नहीं आया। ऐसे में इस्लामिक आतंकवाद से देश को बचा पाने में नाकाम कांग्रेस सरकार ने भगवा आतंकवाद का नारा गढ़ा। मालेगांव ब्लास्ट के बाद एक साजिश के तहत 11 अक्टूबर 2008 को महाराष्ट्र एटीएस के इंस्पेक्टर अरुण खानविलकर ने प्रज्ञा को हिरासत में ले लिया। 13 दिन तक प्रज्ञा को अवैध हिरासत में रखने के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया और 11 दिन का रिमांड लिया। इस दौरान उन्हें बिना दिन-रात देखे बिना लगातार पीटा गया और टार्चर किया गया।
‘अस्पताल से आने के बाद फिर बेरहमी से पीटा, जिससे रीढ़ की हड्डी टूट गई’
साध्वी अपने बुरे दिनों को याद करते हुए कहती हैं, “मुझे मारते-मारते मेरे फेफड़े की झिल्ली फट गई। मैं बेहोश हो गई। फिर मुझे 5 दिन के लिए अस्पताल ले जाया गया। जब होश आया तो देखा कि मेरे शरीर से सारे भगवा वस्त्र गायब थे। उसकी जगह मुझे एक फ्राक पहनाया गया था। मुझे वेंटिलेटर और ऑक्सीजन पर रखा गया था। जैसे ही थोड़ा सा ठीक हुई, पुलिस वालों ने मुझ पर फिर से जुल्म करना शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों द्वारा मुझे बेल्टों से पीटा जाता था। वे मुझे झूले की तरह पटकते थे, जिससे सिर जमीन में टकराता था। इस दौरान मेरी रीढ़ की हड्डी तक टूट गई।”
‘6-7 पुलिसकर्मियों ने घेरा बनाकर बारी-बारी से बेल्टों से पीटा’
साध्वी ने अपनी आपबीती में यह भी बताया, “मेरे साथ मेरे एक शिष्य को भी गिरफ्तार करके लाया गया था। पहले उसे अकेले में बुरी तरह मारा गया फिर खानविलकर ने मेरे सामने लाकर उसको बुरी तरह पीटा। इसके बाद उसने मेरे शिष्य को बेल्ट देकर कहा कि मार अपने गुरु को। जब वह हिचकिचाया तो मैं बोली मारो मुझे। शिष्य ने मजबूरी में मारा तो जरूर मुझे, लेकिन उसका हाथ कंपकंपा रहा था। तब खानविलकर ने शिष्य से बेल्ट छीनी और उसको बेरहमी से मारते हुए बोला ऐसे मारा जाता है। इसके बाद 6-7 पुलिसकर्मियों ने एक घेरा बनाया और बारी-बारी से मुझे बेल्टों से पीटने लगे। ठाणे के पुलिस कमिश्नर ने तो उस वक्त मुझे तब तक बेल्टों से पीटा कि जब तक वो थक नहीं गया और मैं गिर नहीं पड़ी। उस दौरान सिर्फ एक महिला पुलिसकर्मी थी, जिसने सिर्फ एक डंडा मुझे मारा।”
‘अश्लीलता की सभी हदें पार कीं, गंदा ऑडियो सुनाया गया’
कांग्रेस के शासनकाल में कैदियों के साथ अश्लीलता की सभी हदें पार की गईं। साध्वी के अनुसार, कुछ पुरुष कैदियों के साथ मुझे खड़ा करके अश्लील और गंदा ऑडियो भी सुनाया गया। वह कहती हैं, “उस दिन मुझे बेरहमी से मारा गया था, जिससे मेरा खड़े रहना मुश्किल था। मैंने कहा कि मैं बैठ जाऊं तो पुलिस वाले बोले कि शादी में आई है क्या कि बैठ जाएगी। मेरी आंख बंद होने लगी और मैं बेहोश हो गई। उस वक्त जब एक कैदी ने पुलिसवालों से कहा कि साध्वी हैं, इनको अश्लील ऑडियो मत सुनवाइए तो उस पुलिस वाले ने बेरहमी से उस कैदी की पिटाई की।”
‘मुझे तोड़ने के लिए मेरे चरित्र पर उंगली उठाई’
साध्वी ने आगे बताया कि पुलिस वाले उनके दोनों हाथों को सामने फैलवाकर एक चौड़े बेल्ट से उन्हें मारते थे, जिससे उनके दोनों हाथ सूज जाते थे। अंगुलियां भी काम नहीं करती थीं, तब गुनगुना पानी लाया जाता था। जब वह अपने हाथ उसमें डालती थीं तो कुछ आराम मिलता था। साध्वी के मुताबिक, “मुझे कागज हाथ में पकड़वाकर हाथों को दीवारों पर पटकवाया जाता था। जब उंगलियां हिलने-डुलने लगती थीं, तो फिर से उसी तरीके से मुझे पीटा जाता था। यही नहीं मुझे तोड़ने के लिए मेरे चरित्र पर उंगली भी उठाई गई।”
‘भगवा को बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने साजिश रची’
कांग्रेस की सोची समझी साजिश पर साध्वी ने कहा- भगवा के प्रति कांग्रेस द्वेष से भरी थी। वह फूटी आंख भी भगवा को नहीं देखना चाहती थी। इसलिए इसे बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने एक सुनियोजित साजिश रची। राहुल गांधी के उपाध्यक्ष बनने के दौरान मंच से पी. चिदम्बरम, दिग्विजय सिंह व सुशील शिंदे द्वारा बार-बार मेरा व भगवा आतंकवाद का नाम लेना ये साबित कर रहा था।

















